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सुप्रीम कोर्ट बोला-बहू और उसके परिवार का अपमान बंद करें: दहेज केस में कहा- बेटी को बचाने की गुहार लगाने वाले को भिखारी कह रहे; सजा बरकरार




दहेज प्रताड़ना के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, ‘आखिर लड़के शादी क्यों करते हैं, अगर उन्हें बाद में लड़की और उसके परिवार का अपमान ही करना है। समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार का अपमान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप जिनसे पैसे लेते हो, आखिर उनको ही भिखारी कैसे कह सकते हो। लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगा रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था। कोशिश यही होती है कि बहू और उसके परिवार से और पैसे निकाले जाएं। परिवार को आर्थिक रूप से निचोड़ने की कोशिश की जाती है। कोर्ट की यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ के एक दहेज केस में आई। महिला ने ससुराल में फांसी लगा ली थी। पीड़ित के परिवार ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। कहा था कि बेटी की हत्या हुई है। हाईकोर्ट ने आरोपी परिवार के कई सदस्यों को दोषी ठहराया था। इनमें से देवर ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने राहत देने से इनकार कर अपील खारिज कर दी। मामला 16 साल पुराना, आरोप- पीड़ित परिवार से कई बार पैसे लिए यह मामला वर्ष 2010 का है। आरोप था कि महिला के पति और ससुराल वालों ने लगातार दहेज की मांग की। परिवार से नकद रकम और कार मांगी जा रही थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि महिला के परिवार ने कई बार पैसे देकर समझौता करने की कोशिश की, लेकिन प्रताड़ना बंद नहीं हुई। बाद में महिला की फांसी लगने से मौत हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताई गई। परिवार की डिटेल जानकारी सामने नहीं आई है। ट्रॉयल कोर्ट ने माना था- दहेज की मांग का महिला की मौत से सीधा संबंध एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट बोला- परिवार का प्रेशर बेटी की मौत की वजह एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति को दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी बेटियों की शादी बचाने की माता-पिता की चिंता कई महिलाओं को मौत के जाल में धकेल सकती है। वे प्रताड़ना की शिकायतों के बावजूद उन्हें उनके ससुराल वापस भेज देते हैं। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सोमवार को पूछा, “क्या युवा सोमा आचार्य की जान बचाई जा सकती थी? क्या सामाजिक बदनामी के डर की वजह से सोमा को भेड़ियों के हवाले कर दिया गया?” कोर्ट ने पाया कि सोमा ने बार-बार अपने माता-पिता को प्रताड़ना के बारे में बताया था लेकिन बड़ों ने उसके और उसके पति के बीच सुलह कराकर उसे वापस भेज दिया। शादी के 15 महीने बाद सोमा का शव फंदे से लटका मिला था। पति ने इसे सुसाइड बताया था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कि कहा कि मेडिकल और अन्य सबूत साफ तौर पर दहेज हत्या की ओर इशारा करते हैं। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि सोमा को मोटरसाइकिल, टीवी और अन्य सामान के लिए प्रताड़ित किया गया था और उसके माता-पिता ने कुछ मांगें मान भी ली थीं। कोर्ट ने कहा- मृतक के शरीर पर पाए गए जख्म आत्महत्या के लिए फांसी लगाने के किसी सामान्य मामले से मेल नहीं खाते।” साथ ही यह भी कहा कि ये जख्म ऐसे नहीं थे जिन्हें व्यक्ति ने खुद को पहुंचाया हो। बेंच ने कहा कि मेडिकल सबूतों से संकेत मिलता है कि सोमा की मौत से पहले उसके साथ हिंसा की गई थी, जिससे आत्महत्या की थ्योरी गलत साबित होती है और यह “नकली फांसी” का मामला लगता है। — ये खबर भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट अभी बंद ही रहेगा:दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और X को नोटिस दिया, 4 हफ्ते में जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका पर केंद्र सरकार और X को नोटिस जारी किया है। दिपके ने CJP का X अकाउंट ब्लॉक किए जाने को चुनौती दी है। कोर्ट ने फिलहाल अकाउंट दोबारा चालू करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला लेने से पहले सरकार का पक्ष सुनना जरूरी है। पढ़ें पूरी खबर…



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