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Bhimlat Tourist Spot: राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित भीमलत इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है. प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और ऐतिहासिक मान्यताओं से भरपूर यह स्थान अपनी अनूठी पहचान रखता है. स्थानीय किंवदंती के अनुसार महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान भीम ने अपनी लात से जमीन पर प्रहार किया था, जिससे यहां जलस्रोत फूट पड़ा और बाद में यह क्षेत्र भीमलत के नाम से प्रसिद्ध हुआ. यहां का आकर्षक जलप्रपात, शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं. मानसून के दौरान इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जब झरनों का बहाव और आसपास की हरियाली देखने लायक होती है.
राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित भीमलत इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद
भीलवाड़ा: भीलवाड़ा जिले के अंटाली क्षेत्र में स्थित भीमलत गांव इन दिनों प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक मान्यताओं के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. खेजड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला यह गांव अपनी अनोखी कहानी, प्राकृतिक जलस्रोतों और शांत वातावरण के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के साथ-साथ धार्मिक आस्था का भी अनुभव करते हैं. मान्यता के अनुसार महाभारत काल मे अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे. यात्रा के दौरान माता कुंती को प्यास लगी, लेकिन आसपास कहीं भी पानी का स्रोत नहीं था. तब महाबली भीम ने अपनी शक्ति से एक विशाल चट्टान पर पैर मारा, जिससे वहां से पानी की धारा फूट पड़ी. माना जाता है कि भीम की इसी लात से निकले जलस्रोत के कारण इस स्थान का नाम भीमलत पड़ा. आज भी यह कथा ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के बीच आस्था का विषय बनी हुई है.
पत्थरों की गहरी दरारों में सालभर पानी भरा रहता
भीलवाड़ा शहर से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव प्राकृतिक रूप से बेहद आकर्षक दिखाई देता है. चारों ओर फैली पहाड़ियां, विशाल चट्टानें और हरियाली यहां के वातावरण को खास बनाती हैं. गांव के लोग अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को आज भी संजोए हुए हैं. ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. भीमलत की सबसे बड़ी पहचान यहां चट्टानों के बीच स्थित प्राचीन बालाजी मंदिर है. मंदिर परिसर के आसपास मौजूद प्राकृतिक जलस्रोत लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. विशाल पत्थरों की गहरी दरारों में सालभर पानी भरा रहता है.
पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता
शंकर लाल गुर्जर ने बताया कि भीषण गर्मी के दिनों में भी यहां का पानी नहीं सूखता हैं. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में भी यहां ठंडक का एहसास बना रहता है. बरसात के मौसम में भीमलत का नजारा और भी मनमोहक हो जाता है. पहाड़ियों से बहता पानी, चट्टानों के बीच बने प्राकृतिक कुंड और हरियाली से घिरा वातावरण किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं लगता. फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए भी यह स्थान बेहद खास माना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करने का मौका नहीं छोड़ते. भीमलत वर्षों से आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम बना हुआ है. यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है.
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