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नई दिल्ली22 मिनट पहले
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जनरल एनएस राजा सुब्रमणि देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बने हैं।
देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने रविवार को पदभार संभाल लिया। दिल्ली में उन्हें साउथ ब्लॅाक लॅान्स में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वे देश के तीसरे CDS है। उन्होंने जनरल अनिल चौहान की जगह ली है। जनरल चौहान शनिवार को रिटायर हुए थे।
पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और सभी संबंधित संस्थान देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एकजुट हैं।
उन्होंने कहा,
भारतीय सेना में स्वदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों के अपडेशन, उनकी खरीद और इस्तेमाल को तेज किया जाएगा। सेना की ताकत बढ़ाने के लिए नई सोच और नए तरीकों को अपनाया जाएगा।


CDS सुब्रमणि का पहला टॉस्क सेना का थिएटर कमांड सिस्टम
नए CDS सुब्रमणि के सामने पहला टास्क सेना में थिएटर कमांड मॉडल को लागू करने को होगा। दरअसल एक दिन पहले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने थिएटर कमांड व्यवस्था पर बोलते हुए कहा था कि यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इससे जुड़ी पूरी रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंप दी गई है। इसका अलग-अलग लेवल पर रिव्यू भी चल रहा है।
जनरल द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि अगले 2 से 3 साल में यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर लागू होती दिखाई दे सकती है, इसके लिए तीनों सेनाओं के प्रमुख हितों का ध्यान रखा जाए।
अभी भारत में तीनों सेनाओं के अलग-अलग कुल 17 कमांड हैं। किसी सैन्य अभियान के दौरान तीनों सेनाएं मिलकर काम तो करती हैं, लेकिन उनकी कमान अलग-अलग रहती है।
थिएटर कमांड व्यवस्था में किसी क्षेत्र या मिशन के लिए एक ही कमांडर होगा। इसके सेना की तीनों यूनिट्स एक साथ काम करेंगी।
गढ़वाल राइफल्स से सेना में कमीशन लिया था सुब्रमणि ने
पढ़ाई और ट्रेनिंग
- एनएस राजा सुब्रमणि ने दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स से सेना में कमीशन लिया था।
- उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) से सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया।
- इसके बाद वे ब्रिटेन के ब्रैकनेल स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज भी गए।
- भारत लौटने के बाद उन्हें माउंटेन ब्रिगेड में ब्रिगेड मेजर की जिम्मेदारी दी गई। बाद में उन्होंने दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से पढ़ाई की।
- लंदन के किंग्स कॉलेज से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल की डिग्री भी है।
40 साल का करियर
- सुब्रमणि ने करीब 40 सालों तक सेना में सर्विस दी है। 2025 में वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार थे।
- जुलाई 2024 से जुलाई 2025 के बीच सेना उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया था।
- जम्मू-कश्मीर के सांबा में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ इंस्ट्रक्टर रहे।
- सुब्रमणि को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

क्या होता है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) देश की तीनों सेना यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच तालमेल बनाने वाला सबसे सीनियर मिलिट्री ऑफिसर होता है। यह फोर-स्टार रैंक का पद है। CDS, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CoSC) का स्थायी चेयरमैन और रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) का प्रमुख भी होता है।
इस पद का मकसद तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाना, संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करना और रक्षा मामलों में फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करना है। दिसंबर 2019 में यह पद बनाया गया था। बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे।
CDS सरकार और रक्षा मंत्रालय को सैन्य मामलों में सलाह देता है। वह सैन्य खरीद, लॉजिस्टिक्स, संयुक्त ऑपरेशन, साइबर और स्पेस से जुड़े समन्वय पर भी काम करता है। न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी में भी CDS की अहम भूमिका होती है।
पहले सीडीएस बिपिन रावत जनवरी 2020 में बने थे। उसके बाद अनिल चौहान ने 2022 में यह जिम्मेदारी संभाली थी।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों की भूमिकाओं में अंतर?
CDS तीनों सेनाओं का ऑपरेशनल प्रमुख नहीं होता। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की कमान उनके अपने-अपने प्रमुखों के पास ही रहती है। CDS सीधे सैन्य आदेश जारी नहीं करता, बल्कि तीनों सेनाओं और सरकार के बीच समन्वय की भूमिका निभाता है। आर्मी, नेवी या एयरफोर्स को सैन्य कमांड देने का काम कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की सलाह पर उनके प्रमुख ही करते हैं।
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जनरल द्विवेदी पुणे एकेडमी की 150वीं पासिंग आउट परेड में पहुंचे थे। वे यहीं से 65वें कोर्स के कैडेट रह चुके हैं। वे ‘चार्ली स्क्वाड्रन’ में थे।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थिति है। जरूरत पड़ी तो तीनों सेनाएं ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
आर्मी चीफ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बेंचमार्क सेट कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे पर कैसे जवाब देता है। आज पास होने वाले अफसर अपने करियर की शुरुआत से ही इस बेंचमार्क को बनाए रखें।
आर्मी चीफ पुणे के खड़कवासला में शनिवार को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) का 150वीं पासिंग आउट परेड में शामिल हुए। उन्होंने 355 कैडेट अफसरों की परेड की सलामी ली। पूरी खबर पढ़ें




