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दिल्ली अमर कॉलोनी के साई हत्याकांड में पुलिस ने 16 साल से अधिक उम्र के एक किशोर आरोपी पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की मांग की है. इसके लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में आवेदन दायर किया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में किसी नाबालिग पर भी वयस्क की तरह केस चलाया जा सकता है? जानिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के नियम, किन परिस्थितियों में 16 से 18 साल के किशोरों पर बालिग की तरह ट्रायल हो सकता है और अमर कॉलोनी फायरिंग केस में आगे क्या होगा.
साई केस में दिल्ली पुलिस ने जेजे बोर्ड से आरोपी के खिलाफ बालिग की तरह केस चलाने की मांग की हे.
साई हत्याकांड: दिल्ली के अमर कॉलोनी फायरिंग केस में पुलिस एक नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही है. मामले में गिरफ्तार किए गए किशोर की उम्र 16 साल से अधिक बताई जा रही है, जिसके बाद पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष आवेदन दायर किया है. पुलिस के इस कदम के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में पुलिस किसी नाबालिग पर भी बालिग की तरह केस चला सकती है? तो इस सवाल का जवाब ‘हां’ है, लेकिन इसके लिए कानून में कुछ सख्त शर्तें और तय प्रक्रिया शामिल हैं. कानून के अनुसार, हर नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. इसके लिए उम्र, अपराध की गंभीरता और किशोर की मानसिक समझ जैसे कई पहलुओं की जांच की जाती है.
निर्भया केस के बाद बदला था कानून
भारत में लंबे समय तक सभी नाबालिग आरोपियों के मामलों की सुनवाई केवल किशोर न्याय प्रणाली के तहत होती थी. चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, नाबालिग को सामान्य आपराधिक अदालत में नहीं भेजा जाता था. 2012 के निर्भया कांड के बाद देशभर में कानून में बदलाव की मांग उठी. उस मामले में एक आरोपी नाबालिग था, जिसकी उम्र 18 साल से कम थी. घटना की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कानून में संशोधन कर किशोर न्याय अधिनियम 2015 बनाया. इस अधिनियम में नाबालिग पर बालिग की तहत केस चलाने की सशर्त इजाजत दे दी गई.
कब चल सकता है नाबालिग पर बालिग की तरह केस?
किसी भी नाबालिग पर सीधे बालिग की तरह मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. इसके लिए दो सबसे महत्वपूर्ण शर्तों का पूरा होना जरूरी है.
- उम्र 16 से 18 साल के बीच हो: यदि आरोपी की उम्र अपराध के समय 16 साल से कम है, तो किसी भी परिस्थिति में उसके खिलाफ किसी बालिग की तरह ट्रायल नहीं चलाया जा सकता है. लेकिन यदि आरोपी की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है, तब कानून आगे की जांच और वैल्यूवेशन की अनुमति देता है.
- दूअपराध जघन्य श्रेणी का हो: सिर्फ उम्र अधिक होना ही पर्याप्त नहीं है. आरोपी पर ऐसा अपराध दर्ज होना चाहिए जिसे कानून ‘जघन्य अपराध’ माना गया हो. आपको बता दें कि जघन्य अपराध वे होते हैं जिनमें न्यूनतम सजा 7 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित हो. हत्या, बलात्कार, अपहरण और गंभीर हिंसक अपराधों को जघन्य श्रेणी में गिना जाता है.
कौन तय करता है कि नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा?
यह फैसला पुलिस या सामान्य अदालत सीधे तय नहीं कर सकती हैं. सबसे पहले मामला किशोर न्याय बोर्ड के पास जाता है. जेजेबी एक विशेष बोर्ड होता है जो नाबालिग आरोपियों से जुड़े मामलों को देखता है. जब पुलिस को लगता है कि आरोपी 16 से 18 वर्ष की आयु का है और उस पर जघन्य अपराध का आरोप है, तब वह बोर्ड के सामने आवेदन प्रस्तुत कर सकती है. इसके बाद अंतिम निर्णय बोर्ड लेता है.
जेजेबी क्या जांच करता है?
किशोर न्याय बोर्ड आरोपी किशोर का प्रारंभिक मूल्यांकन करता है. इस प्रक्रिया में केवल अपराध की गंभीरता नहीं देखी जाती, बल्कि आरोपी की मानसिक स्थिति और समझ का भी आंकलन किया जाता है. बोर्ड मुख्य रूप से तीन सवालों के जवाब तलाशता है. जिसमें पहला- क्या आरोपी में अपराध करने की मानसिक और शारीरिक क्षमता थी? दूसरा- क्या वह अपने कृत्य के परिणामों को समझता था? और तीसरा- अपराध किन परिस्थितियों में किया गया है? जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य विशेषज्ञों की राय भी ली जाती है. यदि बोर्ड को लगता है कि आरोपी ने पूरी समझ और परिपक्वता के साथ अपराध किया है, तो मामला चिल्ड्रन्स कोर्ट या सत्र न्यायालय को भेजा जा सकता है, जहां उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है.
क्या है अमर कॉलोनी फायरिंग का पूरा मामला?
अमर कॉलोनी थाना क्षेत्र से जुड़े फायरिंग मामले में दिल्ली पुलिस ने एक किशोर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अन्य आरोपियों की पहचान यश बिधूड़ी और जय कुमार के रूप में हुई है. जांच के दौरान एक टैक्सी चालक अहम गवाह के रूप में सामने आया है. चालक ने बताया कि घटना के बाद उसने किशोर आरोपी को अपनी कैब में बैठाकर दूसरी जगह पहुंचाया था. उसका बयान बीएनएसएस की धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया गया है. पुलिस जांच में पता चला कि गिरफ्तार किशोर की उम्र 16 वर्ष से अधिक है. साथ ही उसकी संलिप्तता एक अन्य आपराधिक मामले में भी बताई गई है. इसी आधार पर पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 15 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (JJB) में आवेदन देकर आरोपी का ट्रायल वयस्क की तरह चलाने की मांग की है. अब अंतिम फैसला JJB के मूल्यांकन के बाद लिया जाएगा.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



