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बेहद खास है उत्तराखंड का देवरिया ट्रैक, छुट्टियों में दोस्तों और फैमिली संग बनाएं प्लान


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Deoria Tal Rudraprayag Trek: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बसा देवरिया ताल प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है. पहाड़ों और घने जंगलों के बीच मौजूद इस शांत झील के पानी में जब विशाल चौखंबा पर्वत का प्रतिबिंब दिखाई देता है, तो वह नजारा किसी का भी दिल जीत लेता है. महाभारत काल के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से जुड़े इस पौराणिक और बेहद खूबसूरत ट्रैक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बच्चे और बुजुर्ग भी बड़ी आसानी से पूरा कर सकते हैं. यहां जानिए सारी गांव के होमस्टे से लेकर झील के किनारे कैंपिंग करने और यहां पहुंचने की जानकारी.

Deoria Tal Rudraprayag Trek: रुद्रप्रयाग में स्थित देवरिया ताल अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. समुद्र तल से करीब 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील घने जंगलों और हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसी हुई है. यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को शांत वातावरण, शुद्ध हवा और हरियाली का अनूठा अनुभव मिलता है. देवरिया ताल का सबसे बड़ा आकर्षण इसके स्वच्छ जल में दिखाई देने वाला चौखंबा पर्वत का प्रतिबिंब है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बेहद मनमोहक नजर आता है. प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता है. हर साल हजारों पर्यटक यहां की प्राकृतिक छटा को देखने पहुंचते हैं.

देवरिया ताल ट्रेक को उत्तराखंड के सबसे आसान और लोकप्रिय ट्रेकों में गिना जाता है. यह ट्रेक उखीमठ के पास स्थित सारी गांव से शुरू होता है, लगभग 2.5 से 3 किलोमीटर लंबा है. सामान्य गति से चलने वाला व्यक्ति इसे डेढ़ से दो घंटे में आसानी से पूरा कर सकता है. रास्ते में बने पत्थर के मार्ग और सुंदर जंगल यात्रा को और भी सुखद बना देते हैं. यह ट्रेक बच्चों, बुजुर्गों और पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है. ट्रेक के दौरान पर्यटक हिमालय की खूबसूरत चोटियों और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. परिवार के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए यह बेहतरीन विकल्प है.

देवरिया ताल ट्रेक को उत्तराखंड के सबसे आसान और लोकप्रिय ट्रेकों में गिना जाता है. यह ट्रेक उखीमठ के पास स्थित सारी गांव से शुरू होता है, लगभग 2.5 से 3 किलोमीटर लंबा है. सामान्य गति से चलने वाला व्यक्ति इसे डेढ़ से दो घंटे में आसानी से पूरा कर सकता है. रास्ते में बने पत्थर के मार्ग और सुंदर जंगल यात्रा को और भी सुखद बना देते हैं. यह ट्रेक बच्चों, बुजुर्गों और पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है. ट्रेक के दौरान पर्यटक हिमालय की खूबसूरत चोटियों और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. परिवार के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए यह बेहतरीन विकल्प है.

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पर्वतारोही भुवन चौबे ने लोकल 18 को बताया कि देवरिया ताल से दिखाई देने वाला चौखंबा पर्वत और आसपास की हिमालयी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. साफ मौसम में यहां से चौखंबा, केदारनाथ, नीलकंठ और कई अन्य बर्फ से ढकी चोटियों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं. झील के शांत जल में इन पर्वतों का प्रतिबिंब एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं. सुबह के समय सूरज की पहली किरण जब पर्वतों पर पड़ती है, तो पूरा क्षेत्र सुनहरे रंग में रंग जाता है. यही दृश्य देवरिया ताल को फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों की पसंदीदा जगह बनाता है. यहां का शांत वातावरण लोगों को शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून का एहसास कराता है.

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देवरिया ताल केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पौराणिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि महाभारत काल में यह स्थान इंद्र सरोवर के नाम से जाना जाता था. कहा जाता है कि यहीं पर यक्ष ने पांडवों से प्रश्न पूछे थे और उनके उत्तरों की परीक्षा ली थी. इस कथा का उल्लेख महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में भी मिलता है. धार्मिक आस्था रखने वाले लोग इस स्थान को विशेष महत्व देते हैं. स्थानीय लोग भी इस झील को पवित्र मानते हैं और इसके संरक्षण में सहयोग करते हैं. पौराणिक इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का यह संगम देवरिया ताल को उत्तराखंड के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में शामिल करता है.

देवरिया ताल ट्रेक करने वाले पर्यटकों के लिए कैंपिंग भी एक खास आकर्षण है. वन विभाग की अनुमति से यहां निर्धारित क्षेत्रों में कैंप लगाए जा सकते हैं. रात के समय खुले आसमान के नीचे चमकते सितारों और हिमालयी चोटियों के बीच कैंपिंग का अनुभव बेहद रोमांचक होता है. पर्यटक यहां बोनफायर, प्रकृति दर्शन और फोटोग्राफी का आनंद लेते हैं. सुबह उठते ही सामने चौखंबा पर्वत का दृश्य किसी सपने जैसा प्रतीत होता है. कैंपिंग के दौरान पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना होता है, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे. एडवेंचर और प्रकृति का संगम तलाशने वालों के लिए यह स्थान आदर्श माना जाता है.

देवरिया ताल ट्रेक करने वाले पर्यटकों के लिए कैंपिंग भी एक खास आकर्षण है. वन विभाग की अनुमति से यहां निर्धारित क्षेत्रों में कैंप लगाए जा सकते हैं. रात के समय खुले आसमान के नीचे चमकते सितारों और हिमालयी चोटियों के बीच कैंपिंग का अनुभव बेहद रोमांचक होता है. पर्यटक यहां बोनफायर, प्रकृति दर्शन और फोटोग्राफी का आनंद लेते हैं. सुबह उठते ही सामने चौखंबा पर्वत का दृश्य किसी सपने जैसा प्रतीत होता है. कैंपिंग के दौरान पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना होता है, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे. एडवेंचर और प्रकृति का संगम तलाशने वालों के लिए यह स्थान आदर्श माना जाता है.

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देवरिया ताल घूमने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. गर्मियों में यहां का मौसम सुहावना रहता है और हिमालयी पर्वतों के स्पष्ट दृश्य दिखाई देते हैं. वहीं मानसून के बाद हरियाली अपने चरम पर होती है, जिससे पूरा क्षेत्र और भी खूबसूरत नजर आता है. सर्दियों में यहां बर्फबारी भी देखने को मिलती है, लेकिन ट्रेकिंग अपेक्षाकृत कठिन हो जाती है. मौसम साफ होने पर झील में पर्वतों की परछाई स्पष्ट दिखाई देती है. पर्यटन विभाग और स्थानीय गाइड भी इन्हीं महीनों में यात्रा की सलाह देते हैं.

देवरिया ताल ट्रेक की शुरुआत सारी गांव से होती है, जो अपनी पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति और आतिथ्य के लिए जाना जाता है. गांव तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यहां स्थानीय लोगों द्वारा संचालित होमस्टे पर्यटकों को पहाड़ी जीवनशैली का अनुभव कराते हैं. पारंपरिक भोजन, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण परिवेश पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. गांव के आसपास के प्राकृतिक दृश्य भी बेहद सुंदर हैं. ट्रेक शुरू करने से पहले अधिकांश पर्यटक यहीं रुकते हैं, आवश्यक तैयारियां करते हैं. पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिले हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच रहा है.

देवरिया ताल ट्रेक की शुरुआत सारी गांव से होती है, जो अपनी पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति और आतिथ्य के लिए जाना जाता है. गांव तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यहां स्थानीय लोगों द्वारा संचालित होमस्टे पर्यटकों को पहाड़ी जीवनशैली का अनुभव कराते हैं. पारंपरिक भोजन, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण परिवेश पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. गांव के आसपास के प्राकृतिक दृश्य भी बेहद सुंदर हैं. ट्रेक शुरू करने से पहले अधिकांश पर्यटक यहीं रुकते हैं, आवश्यक तैयारियां करते हैं. पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिले हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच रहा है.

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देवरिया ताल केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. स्थानीय ग्रामीण, वन विभाग और पर्यटन से जुड़े लोग मिलकर इस क्षेत्र की स्वच्छता और जैव विविधता को बनाए रखने का प्रयास करते हैं. पर्यटकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने और कचरा वापस ले जाने की अपील की जाती है. झील और आसपास के जंगल कई प्रकार के पक्षियों और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हैं. पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं. देवरिया ताल आज भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छता को बरकरार रखे हुए है.

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