रत्न और आभूषण के कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों सोमवार को लगातार तीसरे दिन लोअर सर्किट लगा। पिछले सप्ताह सेबी की ओर से बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों पर अंतरिम आदेश पारित करने के बाद यह गिरावट आई है। पिछले तीन दिनों में कंपनी के शेयरों में 14 फीसदी से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
बीएसई पर कंपनी के शेयर 4.98 फीसदी गिरकर 94.50 रुपये के निचले सर्किट पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई पर यह 4.99 फीसदी गिरकर 93.80 रुपये पर आ गया। सेबी की कार्रवाई के बाद से 3 जून से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर बीएसई पर 14.20 फीसदी तक लुढ़क चुके हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रवर्तक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश मेहता को कंपनी की प्रतिभूतियों में कारोबार करने से रोक दिया था। सेबी ने वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर गलत बयानी और धन के हेरफेर का आरोप लगाया है। नियामक ने 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में पाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने पांच वर्षों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का समेकित राजस्व बढ़ाया। यह राजस्व विदेशी सहायक कंपनियों, विशेषकर वालकैम्बी एसए को जिम्मेदार ठहराया गया। जबकि सहायक कंपनी के लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों में इन राशियों का केवल एक छोटा हिस्सा ही दिखाया गया था।
क्या हैं सेबी के मुख्य आरोप?
सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। कंपनी पर धन के हेरफेर और राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है। नियामक ने कहा कि कंपनी ने पांच वर्षों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व बढ़ाया। यह राजस्व मुख्य रूप से विदेशी सहायक कंपनी वालकैम्बी एसए के माध्यम से दिखाया गया।
कंपनी ने आरोपों पर क्या सफाई दी?
राजेश एक्सपोर्ट्स ने शुक्रवार को बढ़े हुए राजस्व के आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी ने इन्हें अनुमानित निष्कर्ष बताया है। बेंगलुरु स्थित इस सोने के आभूषण निर्माता ने कहा कि सेबी के अंतरिम आदेश ने केवल कुछ पहलुओं पर संदेह उठाया है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि किसी भी कंपनी के मामले में कोई निर्णायक प्रतिकूल निष्कर्ष फिलहाल नहीं निकाला गया है।



