केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलिंडर की वार्षिक संख्या को नौ से घटाकर चार करने के सरकारी फैसले के पीछे कुछ लाभार्थियों द्वारा योजना के दुरुपयोग को कारण बताया गया है।
योजना के दुरुपयोग का खुलासा
मंत्री हरदीप पुरी का कहना है कि यह कदम इस सबूत के आधार पर उठाया गया था कि कई लाभार्थियों को अतिरिक्त सिलेंडरों की जरूरत नहीं थी और कुछ सिलेंडरों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जा रहा था। उन्होंने कहा, आज सुबह से ही इस बात पर काफी चर्चा हो रही है कि हमने उज्ज्वला सिलेंडर्स की संख्या नौ से घटाकर चार कर दी है। लेकिन अगर आपको चार से अधिक सिलेंडर्स की जरूरत नहीं है, तो आपको और सिलेंडरों की क्या जरूरत होगी?
सब्सिडी का औचित्य
उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी परिवार को साल में चार से अधिक सिलेंडर की जरूरत नहीं है, तो उन्हें और सब्सिडी वाले रिफिल देने का कोई ठोस कारण नहीं है।हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हमें भरोसेमंद जानकारी मिली थी कि हमारे कई उज्ज्वला लाभार्थियों को असल में सिलेंडर की जरूरत नहीं थी। वे सिलेंडर ले रहे थे और या तो उसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बेच रहे थे, या कहीं और इस्तेमाल कर रहे थे, या फिर किसी और अधिक रुपए में दे रहे थे।”
प्रधानमंत्री मोदी के शासन मॉडल की सराहना
इस बातचीत के दौरान पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन मॉडल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को प्रधानमंत्री द्वारा अपनाए गए विकास-केंद्रित दृष्टिकोण को समझना और अपनाना चाहिए। मंत्री के अनुसार, मतदाता बार-बार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा का समर्थन करते आए हैं क्योंकि वे सरकार को विकास और जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़ते हैं।
ई85 फ्यूल आउटलेट्स के बाद, सरकार एथेनॉल आधारित ईंधन के विस्तार पर कर रही चर्चा : हरदीप पुरी
केंद्र सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए ई85 ईंधन को लॉन्च कर दिया है। अब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ भविष्य में इथेनॉल आधारित ईंधन के विस्तार को लेकर चर्चा कर रही है। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की ओर से बुधवार को दी गई।
इथेनॉल मिश्रण में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि देश ने तय समय से पहले ही अपने लक्ष्यों को हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा 2014 में 1.5 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर 2022 में 10 प्रतिशत हो गई है, जबकि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया। पुरी ने कहा, “2014 में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 1.5 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2022 में बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है। हमारा लक्ष्य इसे 2030 तक 20 प्रतिशत तक ले जाना था, लेकिन हमने इसे समय से पहले 2024 में हासिल कर लिया।”
मंत्री ने आगे कहा, “फिलहाल, हम इंडस्ट्री के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें हमारी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन, सियाम और दूसरे संगठन शामिल हैं। इसी बीच, हमने ई85 फ्यूल पेश किया है। हालांकि, ई85 को सिर्फ ई85-कम्पैटिबल फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए ही पेश किया गया है।”
सरकार की व्यापक ऊर्जा रणनीति पर पुरी ने कहा कि भारत, घरेलू स्तर पर खोज और उत्पादन बढ़ाकर, बायोफ्यूल की अधिक ब्लेंडिंग करके और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का विस्तार करके ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत, नए कुएं खोदने और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 90,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताए जाने के बाद, मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कई बार एक्साइज ड्यूटी घटाने की वजह से दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें चार साल पहले की तुलना में कम हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की थी, जबकि बीजेपी शासित कई राज्यों ने भी ईंधन पर वैट कम किया था।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार करने के बारे में पुरी ने कहा कि यह फैसला सब्सिडी वाले सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था। उनके मुताबिक, कुछ लाभार्थी सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए कर रहे थे या उन्हें दोबारा बेच रहे थे, जबकि उन्हें पूरे कोटे की जरूरत नहीं थी।



