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कल्याण बनर्जी का अल्टीमेटम- ममता मुझे चुनें या अभिषेक को: TMC के तीसरे राज्यसभा सांसद का इस्तीफा; दावा- 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बना चुके


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नई दिल्ली1 मिनट पहले

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कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को अभिषेक बनर्जी को अहंकारी कहा।

ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होते नहीं दिख रही हैं। विधायक और सांसद लगातार उनका साथ छोड़ रहे हैं। इस बीच, उनके सबसे करीबी सांसद कल्याण बनर्जी की भी गुरुवार को नाराजगी सामने आई। उन्होंने कहा कि ममता दीदी को तय करना होगा कि वे मेरे साथ हैं या अभिषेक बनर्जी के साथ। अभिषेक को सीनियर नेताओं का सम्मान करना नहीं आता। वह बहुत अहंकारी हैं। इसी वजह से पार्टी बर्बाद हुई है। उन्होंने कहा,

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अगर ममता दीदी को अभिषेक बनर्जी पर ही निर्भर रहना है, तो उनके साथ रहे और मुझे छोड़ दे। अगर उनसे अलग रास्ता चुनती हैं, तो मैं ममता दीदी के साथ हूं।

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कल्याण की नाराजगी की वजह टीएमसी का फर्जी साइन केस है। उन्होंने बताया, ‘मुझे आधी रात को बताया गया कि इस केस से जुड़े वकील बदल दिए गए हैं। इनमें मैं भी था। यह अपमानजनक है।’

इधर, TMC के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया। पिछले चार दिनों में तीन राज्यसभा सांसद ममता को छोड़कर जा चुके हैं। 10 जून को सुष्मिता देव ने रिजाइन किया था।

8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी छोड़ी थी। राज्यसभा में 13 में से 3 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। टीएमसी काकोली घोष का दावा है कि 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बना चुके हैं। वहीं, बंगाल के 80 में से 58 TMC विधायक अलग गुट बना चुके हैं।

प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपा।

प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपा।

इस्तीफे के बाद प्रकाश चिक बोले- मैं बूढ़ा नहीं हुआ, आगे समय बताएगा

इस्तीफे के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रकाश चिक ने कहा- पश्चिम बंगाल में लोगों का फैसला भाजपा के पक्ष में था। पार्टी ने वहां सरकार बनाई। मेरे अपने चुनाव क्षेत्र में हम एक भी सीट नहीं जीत पाए। उत्तर बंगाल में भी नतीजे अच्छे नहीं रहे।

इस जनादेश को देखते हुए मुझे लगा कि अब मेरे पद पर बने रहना ठीक नहीं है। इसलिए, मैंने अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। आगे इंतजार कीजिए, समय के साथ सब सामने आएगा। मैं अभी बूढ़ा नहीं हूं। भविष्य में मैं क्या करूंगा, यह समय ही तय करेगा।

2 सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल ने कहा- हम टीएमसी के साथ

TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा: ममता बनर्जी एक स्ट्रीट फाइटर हैं। पार्टी में संकट के बावजूद उनके साथ अब भी 41% वोट शेयर है। हालांकि इससे पहले उन्होंने X पर लिखा था कि पीएम मोदी देश और समाज के मार्गदर्शक हैं। मैं आपके लंबे, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करता हूं।

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सांसद सौगत रॉय ने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी का साथ काम करना जरूरी है। इतना मैं कह सकता हूं। विलय होगा या गठबंधन, यह आगे देखा जाएगा।

TMC के बागी नेता रिजु दत्ता- ‘युवराज का अब चक्की पीसने का समय आ गया है। वह ऐसा व्यक्ति है जो काउंसलर बनने के भी लायक नहीं था, लेकिन ममता बनर्जी ने धृतराष्ट्र की तरह आंखें बंद कर उसे राजनीति में स्थापित कर दिया। अभिषेक ने सालों तक पार्टी के सांसदों, विधायकों और नेताओं का अपमान किया। मेरे जैसे प्रवक्ताओं को गुलाम समझा गया। एक अकेले व्यक्ति ने पार्टी को बर्बाद कर दिया।’

कल्याण बनर्जी के बेटे शिरसान्य बंदोपाध्याय ने कहा, ‘समस्या यह है कि अभिषेक बनर्जी किसी पर भरोसा नहीं कर सकते। वह हम पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वह एक दूसरी लाइन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने हाईकोर्ट, जिला कोर्ट, सब-डिविजनल कोर्ट, जहां भी मुमकिन हो उनकी मदद करने की कोशिश की है।’

TMC सांसदों के अलग गुट पर सस्पेंस, अब तक लिस्ट सामने नहीं आई

TMC के बागी 20 सांसदों के नाम अब तक सामने नहीं आए हैं। सांसद और बागी नेता काकोली घोष ने 8 जून को दावा किया था कि 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। स्पीकर ओम बिरला को इनके समर्थन की चिट्ठी दे दी गई है।

इसके बाद काकोली ने कुछ बागी सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात और बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के साथ दिल्ली में बैठक भी की थी।

इसके बाद 10 जून को एक लिस्ट भी सामने आई जिसमें सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा समेत 19 सांसदों के नाम थे। हालांकि 11 जून को शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वह ममता और टीएमसी के साथ हैं, क्योंकि उन्होंने मेरे बुरे वक्त में साथ दिया था।

एक दिन पहले सामने आए TMC के 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम …

लोकसभा सीट नाम लोकसभा सीट नाम
बारासात काकोली घोष दस्तीदार घाटाल दीपक अधिकारी (देव)
कूचबिहार जगदीश चंद्र बसुनिया झाड़ग्राम कालीपद सोरेन
जांगीपुर खलीलुर रहमान मेदिनीपुर जून मालिया
बहरामपुर यूसुफ पठान बांकुड़ा अरूप चक्रवर्ती
मुर्शिदाबाद अबू ताहेर खान बर्धमान पूर्व डॉ. शर्मिला सरकार
बैरकपुर पार्थ भौमिक आसनसोल शत्रुघ्न सिन्हा
मथुरापुर बापी हलदार बोलपुर असित कुमार माल
जादवपुर सायोनी घोष बीरभूम शताब्दी रॉय
कोलकाता दक्षिण माला रॉय हुगली रचना बनर्जी
आरामबाग मिताली बाग

अभिषेक बनर्जी को आज CID के सामने पेश होने का निर्देश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को फर्जी हस्ताक्षर मामले में अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ तीन हफ्तों तक किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

हालांकि जस्टिस कौशिक चंदा की बेंच ने अभिषेक को आज शाम 6 बजे तक कोलकाता स्थित CID मुख्यालय भवानी भवन में पेश होकर जांच में शामिल होने का निर्देश भी दिया। अभिषेक आज शाम 4 बजे दिल्ली से कोलकाता पहुंच रहे है। इसके बाद CID के सामने पेश होंगे।

ममता 3 दिन दिल्ली में रहीं, राहुल- सोनिया से मुलाकात की

ममता 3 और अभिषेक 5 दिन दिल्ली में रहे। 10 जून को अभिषेक ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। वहीं, 9 जून को ममता सोनिया गांधी से मिलीं थीं। इसके अलावा इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में भी शामिल हुए।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने 10 जून को असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने 10 जून को असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम…

8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे

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8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई।

3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए

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3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।

ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे

टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 3 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 19 राज्यसभा सांसद बचे हैं।

विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

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TMC बचाने के लिए ममता-अभिषेक की 3 कोशिशें…

  • टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच मजबूती बनाए रखने पर चर्चा हुई।
  • ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की। ममता सोनिया के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक घंटे तक चली।
  • 8 जून को करीब दो साल बाद हुई INDIA की बैठक में ममता और अभिषेक भी शामिल हुए थे। इस बैठक में 25 विपक्षी दल शामिल हुए थे।
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TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं

कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे।

दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है।

संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है।

ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है।

भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है।

नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है।

INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी? आने वाले दिनों में असली लड़ाई सिर्फ विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत की होगी।

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