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SEBI: सेबी को ‘संकट’ रोकने के लिए अधिक ताकत चाहिए, संसदीय समिति ने मजबूत नियामक का किया समर्थन


संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति ने गुरुवार को कहा कि भारत के तेजी से विकसित होते प्रतिभूति बाजार में संकटों को रोकने के लिए सेबी को अधिक शक्तियां मिलनी चाहिए। भाजपा सांसद और समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने प्रस्तावित प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 के तहत नियामक को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए नियम-आधारित प्रणाली को महत्वपूर्ण बताया। समिति ने इस विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श किया है। इसका उद्देश्य बाजार को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाना है।

महताब ने बताया कि यह एक बहुत तेज और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में किसी भी संकट को पहले ही रोकने के लिए सेबी को अधिक शक्ति देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विधेयक एक नियम-आधारित और कम व्यक्तिपरक निर्णय लेने की प्रक्रिया की परिकल्पना करता है। इससे सेबी की जवाबदेही बढ़ेगी। विधेयक पिछले दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे समिति के पास भेजा गया था। समिति को विभिन्न निकायों से 1,055 सुझाव मिले हैं। इन सुझावों को सरकार को टिप्पणियों के लिए भेजा गया है।

क्यों जरूरी है सेबी को मजबूत करना?

महताब ने कहा कि 1992 में सेबी अधिनियम बनने के बाद से देश का प्रतिभूति बाजार लगातार विकसित हो रहा है। इसमें नए चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। अधिक से अधिक मध्यम वर्ग के लोग निवेश कर रहे हैं। निवेशकों की सुरक्षा और प्रणाली को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए एक मजबूत कानून जरूरी है। सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक पेश किया है। यह तीन मौजूदा अधिनियमों को मिलाकर बनाया गया है।

विधेयक में क्या हैं मुख्य प्रावधान?

प्रतिभूति बाजार संहिता एक सिद्धांत-आधारित विधायी ढांचा स्थापित करना चाहती है। इसका लक्ष्य अनुपालन बोझ को कम करना और नियामक शासन को मजबूत करना है। यह प्रौद्योगिकी-संचालित प्रतिभूति बाजार की वृद्धि का भी समर्थन करेगा। विधेयक सेबी की नियामक क्षमता को मजबूत करने का प्रस्ताव करता है। यह बोर्ड को नौ से बढ़ाकर 15 सदस्यों तक करेगा। निर्णय लेने में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त हितों के टकराव के मानदंड भी पेश किए गए हैं।

समिति की आगे की योजना क्या है?

समिति शुक्रवार को आर्थिक मामलों के सचिव के साथ अपनी चर्चा जारी रखेगी। महताब ने बताया कि समिति का लक्ष्य अगले महीने तक अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देना है। इसे मानसून सत्र के पहले सप्ताह के दौरान संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। समिति ने विधि और न्याय मंत्रालय के प्रतिनिधियों से मौखिक साक्ष्य दर्ज किए। इसमें कानूनी मामलों का विभाग और विधायी विभाग शामिल थे। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपनी बात रखी।



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