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Karauli Dholpur Tiger Reserve: धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास बसे गांवों के लिए पर्यटन विकास की नई संभावनाएं खुलने जा रही हैं. प्रशासन और पर्यटन विभाग की पहल से यहां होमस्टे और विलेज टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकेंगे. इस योजना के तहत पर्यटक गांवों की संस्कृति, परंपराओं, स्थानीय खानपान और ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव कर सकेंगे. वहीं ग्रामीण अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर आर्थिक लाभ प्राप्त करेंगे. इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि हस्तशिल्प, लोक कला और स्थानीय उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी.
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के गांवों में खुलेगा रोजगार का नया रास्ता
धौलपुर: धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (डीकेटीआर) के आसपास बसे ग्रामीणों और पर्यटन से जुड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है. धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व क्षेत्र के लिए तैयार किए गए ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) प्रस्ताव को राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के पास भेज दिया गया है. अंतिम स्वीकृति मिलते ही क्षेत्र में विलेज टूरिज्म और होमस्टे जैसी गतिविधियों का नया दौर शुरू होगा.
ईएसजेड लागू होने के बाद बफर क्षेत्र के चिन्हित गांवों में रहने वाले लोग अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर सकेंगे. इससे पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में रहने, स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने और चंबल अंचल के पारंपरिक खानपान का अनुभव करने का अवसर मिलेगा. वहीं ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए स्रोत भी खुलेंगे.
टाइगर रिजर्व राजस्थान का पांचवां टाइगर रिजर्व
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व राजस्थान का पांचवां टाइगर रिजर्व है. वर्तमान में यहां पांच बाघ-बाघिन और एक युवा शावक का विचरण है, जो वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. आने वाले समय में पर्यटक जंगल सफारी के साथ-साथ गांवों की संस्कृति, लोकजीवन और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकेंगे.
जल्द ही राज्य सरकार को भेजा जाएगा
डीकेटीआर का टाइगर कंजर्वेशन प्लान (टीसीपी) भी तैयार हो चुका है, जिसे जल्द ही राज्य सरकार को भेजा जाएगा. टीसीपी लागू होने के बाद रिजर्व क्षेत्र के प्रवेश द्वार, पर्यटन मार्ग, जैव विविधता से जुड़ा डेटा और अन्य पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए भी विशेष प्रबंधन किया जाएगा.
जंगल से सटे गांवों का सर्वे किया जा रहा
जिला कलेक्टर श्री निधि बीटी ने बताया कि जंगल से सटे गांवों का सर्वे किया जा रहा है और होमस्टे के लिए उपयुक्त गांवों की सूची तैयार की जा रही है. इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और धौलपुर में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी. पर्यटन, रोजगार और वन्यजीव संरक्षण के संतुलन की दिशा में यह पहल धौलपुर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
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