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Digital Fraud: पुराने ठग, नए हथकंडे; तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान के साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा


रात के करीब आठ बजे थे। लखनऊ की सेवानिवृत्त शिक्षिका कंचन शुक्ला के मोबाइल पर फोन आया। आपकी डिजिटल जनगणना का डाटा अपडेट हो चुका है। सिर्फ एक अंतिम सत्यापन बाकी है। आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, कृपया बता दीजिए। आवाज इतनी गंभीर और पेशेवर थी कि बुजुर्ग शिक्षिका धोखा खा गईं। ओटीपी बता दिया। दस मिनट में बैंक खाते से 7.80 लाख रुपये गायब।

48,000 करोड़ रुपये की डिजिटल लूट!

भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं में से एक है। इस चमक के पीछे एक बहुत बड़ा अंधेरा भी है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आम नागरिकों को डिजिटल और साइबर ठगी के कारण लगभग 48,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान हुआ है। दूसरी तरफ डिजिटल लेन-देन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है:-


  • रिजर्व बैंक के डिजिटल भुगतान सूचकांक में 11% की वृद्धि हुई है।

  • UPI के जरिये होने वाले लेन-देन दो सौ अरब के आंकड़े को पार कर चुके हैं।

  • UPI लेन-देन में लगभग 30% की सालाना बढ़ोतरी हुई है।

सीधा सा गणित है- जितनी तेजी से हमारा देश डिजिटल हो रहा है, उतनी ही तेजी से डिजिटल ठगों का नेटवर्क भी मजबूत हो रहा है।

2026 का सबसे खतरनाक हथकंडा


  1. डिजिटल जनगणना: ठग खुद को सरकारी जनगणना अधिकारी बताते हैं और कहते हैं कि आपका डाटा अधूरा है। सत्यापन के नाम पर ओटीपी लेते हैं और पलक झपकते ही खाता खाली कर देते हैं।

  2. फर्जी जनगणना एप: आपके मोबाइल पर लिंक भेजकर कहा जाता है, यह सरकार का आधिकारिक एप है, इसे डाउनलोड करके अपनी जानकारी भरें। असल में यह एक घातक वायरस या रिमोट एक्सेस एप होता है, जो आपके पूरे मोबाइल का नियंत्रण ठगों के हाथ में सौंप देता है।

  3. डिजिटल अरेस्ट: ठग वीडियो कॉल पर खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या रिजर्व बैंक का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा जाता है और केस रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

  4. केवाईसी अपडेट: साइबर ठग लोगों को झांसा देते हैं कि बैंक खाता बंद हो जाएगा, पैन कार्ड लिंक नहीं है या सिम कार्ड ब्लॉक हो जाएगा। इस तरह के डरावने संदेश भेजकर फर्जी वेबसाइटों पर आपकी गोपनीय जानकारी चुराई जाती है।

  5. व्हाट्सएप निवेश: व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर फर्जी ग्रुप बनाकर पहले थोड़ा मुनाफा दिखाया जाता है, फिर बड़ी रकम निवेश कराकर करोड़ों रुपये डकार लिए जाते हैं।

  6. जॉब स्कैम: घर बैठे काम, पार्ट-टाइम नौकरी या वीडियो लाइक करके पैसे कमाने का लालच देकर पंजीकरण शुल्क के नाम पर मोटी ठगी की जाती है।

  7. रोमांस स्कैम: सोशल मीडिया पर दोस्ती। भावनात्मक संबंध। फिर मेडिकल इमरजेंसी या कस्टम क्लियरेंस के नाम पर पैसे की मांग।

  8. गेमिंग फ्रॉड: बच्चों और किशोरों को निशाना बनाया जाता है। गेमिंग कॉइन, स्किन और रिवॉर्ड के नाम पर बैंक खाते और UPI से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

RBI ने क्या नए हथियार उतारे हैं?

अमित दुबे, साइबर एक्सपर्ट ने बताया:-


  1. MuleHunter.ai : AI आधारित प्रणाली संदिग्ध बैंक खातों की पहचान करती है। ये ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को जांचता है। प्रत्येक खाते को एक रिस्क स्कोर देता है। मार्च 2026 तक 26 बैंकों में लागू हो चुका है। इससे फ्रॉड की रकम को जल्दी फ्रीज करने में मदद मिलेगी।

  2. डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DPIP): RBI की अगली पीढ़ी की साइबर सुरक्षा प्रणाली। ये दो चरणों में काम करेगा।


    चरण 1: संदिग्ध और फ्रॉड खातों की राष्ट्रीय स्मार्ट रजिस्ट्री तैयार करना, ताकि अपराधी नए खाते खोलकर सिस्टम में प्रवेश न कर सकें।


    चरण 2: AI और मशीन लर्निंग की सहायता से, प्रत्येक ट्रांजेक्शन का रियल टाइम रिस्क स्कोर बनाना। संदिग्ध भुगतान की पहचान करना और ठगी रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करना। मार्च 2026 तक 7 बैंक DPIP पायलट से जुड़ चुके हैं।


  3. स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा: RBI एक नई सुविधा पर काम कर रहा है। ग्राहक स्वयं UPI, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड पेमेंट को अस्थायी रूप से ऑन या ऑफ कर सकेंगे।

सावधानी ही सबसे कारगर हथियार

डिजिटल दुनिया में आपकी सावधानी ही आपका सबसे कारगर हथियार है। कोई भी व्यक्ति कितना भी डराए या लालच दे, अपने कदम पीछे खींचिए, फोन काटिए और ठंडे दिमाग से सोचिए। डरिए मत, सतर्क रहिए और अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखिए।

अगर ठगी हो जाए…

घबराइए नहीं। पहले 2 घंटे आपकी सबसे बड़ी ताकत हैं। तुरंत बैंक को फोन करें, खाता ब्लॉक करवाएं। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ट्रांजेक्शन आईडी, स्क्रीनशॉट, धोखेबाज का नंबर और बैंक विवरण अपलोड करें। निकटतम साइबर थाना या पुलिस स्टेशन जाएं। FIR दर्ज करवाएं। बड़ी राशि का नुकसान हुआ है, तो साइबर कानून विशेषज्ञ की सहायता लें।

पैसा वापस मिलने की कितनी संभावना है?


  • 3 दिन के भीतर रिपोर्ट : ग्राहक की शून्य देनदारी हो सकती है।

  • 4-7 दिन : आंशिक दायित्व।

  • 7 दिन बाद : मामला बैंक की नीति और जांच पर निर्भर करेगा। यानी, 24 से 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट करना सबसे महत्वपूर्ण है।



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