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Mysterious Gayab Mandir: देशभर में कई शिव भगवान को समर्पित मंदिर है. सबकी अपनी विशेषताएं हैं, समय सारणी है जिसके अनुसार कपाट बंद और खुलते हैं. लेकिन एक मंदिर ऐसा भी है, जिस पर पूरी तरह प्रकृति का कंट्रोल है. यहां आप शिवलिंग के दर्शन किस वक्त कर सकेंगे ये भी प्रकृति पर ही निर्भर करता है. यहां आप इसे मंदिर के बारे में डिटेल में जान सकते हैं.
भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जो अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. गुजरात के भरूच जिले के पास स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर भी ऐसा ही एक अद्भुत स्थान है. यह मंदिर अरब सागर के किनारे बसे छोटे से गांव कवी कंबोई में स्थित है और अपनी अनोखी पहचान के कारण “गायब मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध है.
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दिन में दो बार समुद्र की लहरों में पूरी तरह डूब जाता है और कुछ घंटों बाद फिर से दिखाई देने लगता है. समुद्र तट से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर ज्वार आने पर धीरे-धीरे पानी में समा जाता है. उस समय मंदिर की दीवारें, खंभे और गर्भगृह तक पानी के नीचे चले जाते हैं. केवल शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा ही कभी-कभी नजर आता है.
मंदिर का नाम “स्तंभेश्वर” यहां मौजूद मजबूत पत्थर के स्तंभों के कारण पड़ा है. ये स्तंभ वर्षों से समुद्र की तेज लहरों और रोजाना होने वाले जलमग्न होने के बावजूद मजबूती से खड़े हैं. यही वजह है कि यह मंदिर प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ज्वार-भाटा के समय का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. मंदिर में दर्शन केवल भाटा यानी लो टाइड के दौरान ही किए जा सकते हैं.
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का महत्व केवल इसकी प्राकृतिक विशेषता तक सीमित नहीं है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने राक्षस तारकासुर का वध करने के बाद आत्मिक शांति के लिए तीन शिवलिंग स्थापित किए थे. माना जाता है कि स्तंभेश्वर महादेव उन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है. इस मंदिर की एक और विशेष परंपरा है. यहां भगवान शिव का अभिषेक दूध की बजाय तेल से किया जाता है, जो इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाता है.
कैसे पहुंचे
यदि आप किसी अनोखी और यादगार यात्रा की तलाश में हैं, तो स्तंभेश्वर महादेव मंदिर जरूर जाएं. यह मंदिर वडोदरा से लगभग 75 किलोमीटर और अहमदाबाद से करीब 160 किलोमीटर दूर स्थित है. यात्रा पर निकलने से पहले ज्वार-भाटा का समय जरूर जांच लें, ताकि आप इस अद्भुत मंदिर के दर्शन कर सकें और इसके समुद्र में गायब होने का अनोखा नजारा भी देख सकें.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



