भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत आने वाले पहले 15 वर्षों में भारत ब्रिटेन से कुल 3.78 लाख पारंपरिक पेट्रोल और डीजल इंजन वाली यात्री कारों के आयात की अनुमति देगा। इसमें सिर्फ महंगी या खास कारें ही नहीं, बल्कि आम लोगों के इस्तेमाल वाली सस्ती और मध्यम श्रेणी कारें भी शामिल होंगी। इन कारों को भारत में लाने पर सामान्य कर (टैक्स) की तुलना में कम सीमा शुल्क देना होगा।
इस समझौते के तहत कारों और दूसरे वाहनों के आयात पर लगने वाला कर (टैरिफ) लगभग 110 फीसदी से घटकर 10 फीसदी तक हो जाएगा। साथ ही दोनों देशों के बीच तय सीमा के अनुसार ही गाड़ियों के आयात और निर्यात की अनुमति दी जाएगी, यानी एक निश्चित संख्या (कोटा) से ज्यादा गाड़ियां नहीं लाई या भेजी जा सकेंगी।
बुधवार को जारी इंडिया-ब्रिटेन सीईटीए दस्तावेज के अनुसार, भारत को ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाली यात्री कारों के बाजार में छठे वर्ष से बिना किसी शुल्क के निर्यात करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा उन कारों पर लागू होगी, जिनकी कीमत 20 हजार से 80 हजार ब्रिटिश पाउंड के बीच है। धीरे-धीरे इस योजना के तहत निर्यात का कोटा बढ़ता जाएगा और 15वें वर्ष तक यह बढ़कर 88 हजार गाड़ियों तक पहुंच जाएगा और इसके बाद भी यह सुविधा जारी रहने की संभावना है।
इससे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों ने घोषणा की है कि व्यापक आर्थिक और व्यापार साझेदारी समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू किया जाएगा।



