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गंगा किनारे बसा वो आश्रम, जिसने दुनियाभर में बनाई ऋषिकेश की पहचान! आएं तो जरूर करें दीदार


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Beatles Ashram Rishikesh: ऋषिकेश का जिक्र होते ही लोगों के दिमाग में गंगा आरती, राम झूला और रिवर राफ्टिंग की तस्वीरें घूमने लगती हैं. लेकिन योग नगरी में एक ऐसी भी जगह है, जो इतिहास, पॉप म्यूजिक, कला और अध्यात्म का संगम है. इसे दुनिया ‘बीटल्स आश्रम’ या ‘चौरासी कुटिया’ के नाम से जानती है. 1968 में जब दुनिया का सबसे मशहूर ब्रिटिश बैंड ‘द बीटल्स’ यहां आत्मिक शांति की तलाश में आया, तो यह जगह रातों-रात इंटरनेशनल हेडलाइन बन गई. आज भी यहां की दीवारों पर बनी रंग-बिरंगी ग्राफिटी, पुराने मेडिटेशन सेल और शांत वातावरण पर्यटकों को सम्मोहित कर देते हैं. आइए जानते हैं इस आश्रम का पूरा इतिहास, इसकी खासियत और यहां घूमने की पूरी डिटेल.

ऋषिकेश घूमने आने वाले ज्यादातर लोग गंगा घाट, लक्ष्मण झूला और रिवर राफ्टिंग की बात करते हैं, लेकिन अगर आप इस शहर की एक अलग और अनोखी पहचान को महसूस करना चाहते हैं तो बीटल्स आश्रम जरूर जाएं. गंगा नदी के किनारे स्थित यह जगह शांति, प्रकृति, कला और इतिहास का शानदार संगम है. आज यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि युवाओं, फोटोग्राफर्स और ट्रैवलर्स की पसंदीदा लोकेशन बन चुकी है. यहां पहुंचते ही शहर की भीड़भाड़ पीछे छूट जाती है और चारों ओर हरियाली और सुकून का माहौल महसूस होने लगता है.

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बीटल्स आश्रम को चौरासी कुटिया के नाम से भी जाना जाता है. इसका निर्माण वर्ष 1961 में महर्षि महेश योगी ने योग और ध्यान की शिक्षा देने के उद्देश्य से कराया था. उस समय यहां देश और दुनिया के कई लोग ध्यान सीखने के लिए आते थे. महर्षि महेश योगी ने भवातीत ध्यान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यही वजह है कि यह आश्रम धीरे-धीरे दुनिया भर के आध्यात्मिक साधकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. आज भी यहां आने वाले लोग उस दौर की झलक और ऊर्जा को महसूस करने की कोशिश करते हैं.

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बीटल्स आश्रम को विश्वभर में पहचान तब मिली जब 1968 में ब्रिटेन का प्रसिद्ध बीटल्स बैंड यहां पहुंचा. बैंड के सदस्य जॉन लेनन, पॉल मैककार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार ने यहां कुछ समय बिताया और ध्यान की शिक्षा ली. माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने कई गीतों की रचना भी की थी. बीटल्स बैंड की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि उनके यहां आने के बाद यह आश्रम दुनियाभर के लोगों की नजरों में आ गया. तभी से चौरासी कुटिया को बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाना जाने लगा.

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आज भी आश्रम परिसर में बीटल्स बैंड और महर्षि महेश योगी से जुड़ी कई यादें संजोकर रखी गई हैं. यहां बनी फोटो गैलरी में उस दौर की दुर्लभ तस्वीरें देखने को मिलती हैं. इन तस्वीरों के जरिए पर्यटक आश्रम के स्वर्णिम इतिहास को करीब से जान पाते हैं. इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह किसी खजाने से कम नहीं है. यहां मौजूद हर तस्वीर और हर दीवार एक कहानी सुनाती है, जो लोगों को उस समय में ले जाती है जब दुनिया भर के प्रसिद्ध लोग ध्यान और आत्मिक शांति की तलाश में ऋषिकेश आते थे.

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बीटल्स आश्रम की सबसे खास बात इसकी रंग-बिरंगी ग्राफिटी और कलात्मक दीवारें हैं. यहां कई जगहों पर खूबसूरत पेंटिंग्स और रचनात्मक आर्टवर्क देखने को मिलता है, जो पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है. यही वजह है कि यह जगह सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और फोटोग्राफी प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है. आश्रम का लगभग हर कोना तस्वीरों और वीडियो के लिए शानदार बैकग्राउंड देता है. यहां की कलात्मकता और प्राकृतिक वातावरण मिलकर ऐसा अनुभव देते हैं जो सामान्य पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग महसूस होता है.

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आश्रम में घूमते समय आपको पुराने मेडिटेशन हॉल, महर्षि महेश योगी की कुटिया, किचन, पोस्ट ऑफिस और कई कमरे देखने को मिलेंगे. हालांकि समय के साथ इनमें से कई संरचनाएं खंडित हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी वे अपने भीतर इतिहास की अनगिनत कहानियां समेटे हुए हैं. यहां जगह-जगह सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिन पर आश्रम का इतिहास और महत्वपूर्ण जानकारियां लिखी गई हैं. इन बोर्डों को पढ़ते हुए पर्यटक न केवल इस स्थान को समझते हैं बल्कि उस दौर की जीवनशैली और आध्यात्मिक वातावरण की भी कल्पना कर पाते हैं.

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बीटल्स आश्रम का शांत वातावरण इसकी सबसे बड़ी ताकत है. घने पेड़ों, पक्षियों की आवाज और गंगा के करीब होने की वजह से यहां एक अलग ही सुकून महसूस होता है. खासकर सुबह और शाम के समय यहां का माहौल बेहद आकर्षक लगता है. सूर्यास्त के दौरान पेड़ों के बीच से छनकर आती रोशनी और आश्रम की पुरानी संरचनाएं एक यादगार दृश्य बनाती हैं. यही कारण है कि विदेशी पर्यटक भी इस जगह की खूब तारीफ करते हैं. प्रकृति और शांति की तलाश करने वालों के लिए यह स्थान किसी आदर्श रिट्रीट से कम नहीं है.

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अगर आप ऋषिकेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो बीटल्स आश्रम को अपनी सूची में जरूर शामिल करें. यहां भारतीय पर्यटकों के लिए 150 रुपये, विदेशी पर्यटकों के लिए 600 रुपये और विद्यार्थियों के लिए 75 रुपये प्रवेश शुल्क निर्धारित है. आश्रम सुबह 10 बजे खुलता है और शाम 4 बजे के बाद प्रवेश नहीं दिया जाता. पर्यटकों की सुविधा के लिए परिसर में कैंटीन की व्यवस्था भी मौजूद है. इतिहास, आध्यात्मिकता, कला और प्राकृतिक सुंदरता का ऐसा अनोखा मेल बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है. इसलिए कहा जाता है कि बीटल्स आश्रम देखे बिना ऋषिकेश की यात्रा अधूरी मानी जाती है.

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