केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि ग्रीस में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) शुरू होने से लोगों को पैसे भेजना और भुगतान करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब योग्य ग्राहक तुरंत, सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के लेनदेन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पैसे ट्रांसफर करने की लागत भी पारंपरिक तरीकों के मुकाबले काफी कम हो गई है।
केंद्रीय मंत्री ने क्या लिखा?
मंत्री ने एक एक्स पोस्ट में लिखा,’ यूपीआई की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति और सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण में विश्वास को दर्शाती है, जिसके तहत सीमाओं से परे मूल्य सृजित करने और साझा विकास और समृद्धि के लिए साझेदारी को गहरा करने वाले प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे।’ ग्रीस यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोबैंक के सीईओ फोकियन कारावियास से मुलाकात की और भारत-ग्रीस आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर सार्थक चर्चा की।
गोयल ने कहा, ‘हमने ग्रीक व्यवसायों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया और ग्रीस में विनिर्माण और बुनियादी ढांचा विकास में सहयोग के रास्ते तलाशे, जिससे विकास और समृद्धि के लिए हमारी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाया जा सके।’ उन्होंने एथेंस में यूरोबैंक मुख्यालय में यूरोबैंक-एनआईपीएल साझेदारी के लाइव प्रदर्शन को देखा, जिसके तहत यूपीआई सेवाएं सक्षम की गईं। इस दौरान उनके साथ यूरोबैंक के सीईओ करावियास और फेयरफैक्स डिजिटल सर्विसेज के सीईओ संजय तुगनाइट भी मौजूद थे, जो भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के वैश्विक विस्तार में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम में शामिल होने पर क्या बोला?
इससे पहले उन्होंने ग्रीस के उप विदेश मंत्री हैरी थियोहारिस के साथ भारत-ग्रीस व्यापार मंच को संबोधित किया था। गोयल ने कहा, ‘मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करने का भी अवसर मिला। ‘मंत्री ने भारत की उल्लेखनीय विकास गाथा, मजबूत व्यापक आर्थिक आधारभूत संरचना और निरंतर आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डाला, जो ग्रीस के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करती है।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते दिया जोर
गोयल ने कहा, ‘उन्होंने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को खोलने में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की अपार क्षमता पर भी जोर दिया।’ वाणिज्य मंत्री ने प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसके साथ ही व्यवसायों और निवेशकों से भारत के साथ सह-निर्माण, सह-निवेश और सह-विनिर्माण करने का आग्रह किया, जिससे हमारे देशों के बीच अधिक निवेश, मजबूत व्यापारिक संबंध और साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सके।



