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Tax: पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा, डीजल व एटीएफ को शुल्क में राहत; नई दरें 1 जुलाई से लागू


केंद्र सरकार ने एक जुलाई से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में संशोधन किया है। हालांकि, देश में घरेलू खपत के लिए बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार ने देश में ईंधन की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पहले यह 1.50 रुपये प्रति लीटर था। डीजल पर टैक्स 14 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 12.50 रुपये से घटाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) में संशोधन से संबंधित दो अधिसूचनाएं जारी कीं।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नई दरें अगले 15 दिनों के लिए लागू होंगी। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों के नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के निर्यात पर दी गई छूट अब मॉरीशस और मालदीव तक बढ़ा दी गई है। सरकार ने पश्चिम एशिया तनाव को देखते हुए 27 मार्च 2026 को डीजल और एटीएफ एवं 16 मई से पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगा दिया। 

सरकार इन शुल्कों की समीक्षा प्रत्येक दो सप्ताह में करती है। इसके लिए पिछली समीक्षा के बाद कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों को आधार बनाया जाता है। इससे पहले इन दरों में संशोधन 16 जून 2026 को किया गया था। इसके लिए पिछली समीक्षा के बाद कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों को आधार बनाया जाता है। इससे पहले इन दरों में संशोधन 16 जून 2026 को किया गया था।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में एक जुलाई से निर्यातकों के कर भार में बदलाव होगा, लेकिन देश में पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर इन अधिसूचनाओं का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

तेल की कीमतों में तेज गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। एक समय 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल अब काफी नीचे आ गया है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का कम होना और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही का सामान्य होना है। इससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कमजोर पड़ी हैं। अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 84.50 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जबकि पिछले महीने इसका अनुमान 90.44 डॉलर प्रति बैरल लगाया गया था।

विंडफॉल टैक्स क्या होता है?


विंडफॉल टैक्स ऐसा कर है, जिसे सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जिन्हें किसी असाधारण परिस्थिति के कारण अचानक बड़ा मुनाफा होता है। उदाहरण के लिए, युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल या किसी वैश्विक संकट के चलते यदि कंपनियों की आय सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाती है, तो उस अतिरिक्त लाभ के एक हिस्से पर सरकार कर वसूलती है। इसका उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देना भी होता है।



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