भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से होने वाले साइबर हमले भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए निकट भविष्य का सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। आरबीआई के अनुसार, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने साइबर सुरक्षा को लेकर कई मजबूत व्यवस्थाएं विकसित की हैं, लेकिन कर्मचारियों में साइबर सुरक्षा जागरूकता और डिजिटल फोरेंसिक तैयारियों को अभी और मजबूत करने की जरूरत है। आरबीआई ने मंगलवार को जारी अपनी द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली की साइबर सुरक्षा तैयारियों का आकलन करने के लिए एक सर्वे कराया था।
बैंकों ने साइबर सुरक्षा में किए बेहतर इंतजाम
सर्वे में सामने आया कि अधिकांश वित्तीय संस्थानों ने साइबर जोखिम प्रबंधन के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई है। खासकर महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों की कमजोरियों की पहचान और पैठ परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से अपनाया जा रहा है। आरबीआई ने कहा कि बड़े साइबर हमलों की जानकारी नियामक और बैंक के निदेशक मंडल (बोर्ड) तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले अधिक व्यवस्थित और परिपक्व हुई है।
कर्मचारियों की साइबर ट्रेनिंग पर देना होगा ज्यादा ध्यान
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता और नियमित प्रशिक्षण अभी भी कमजोर कड़ी है। यदि कर्मचारी सतर्क नहीं होंगे तो फिशिंग, मालवेयर और एआई आधारित साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, डिजिटल फोरेंसिक तैयारियों को भी और मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इससे किसी बड़े साइबर हमले के बाद डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने, हमले की जांच करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहयोग देने में आसानी होगी।
एआई आधारित शेयर बाजार तेजी भी चिंता का कारण
आरबीआई ने रिपोर्ट में केवल साइबर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि एआई से जुड़ी कंपनियों के कारण शेयर बाजार में आई तेज तेजी को भी संभावित वित्तीय जोखिम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों के शेयर बाजारों में हाल के समय में आई तेजी व्यापक आर्थिक मजबूती की बजाय एआई से जुड़ी चुनिंदा कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के कारण रही है। यदि इन कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आती है तो इसका असर पूरे अमेरिकी शेयर बाजार पर पड़ सकता है और उसका प्रभाव दुनिया के अन्य बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। आरबीआई ने कहा कि ऐसे हालात वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं और दूसरे देशों के बाजार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।



