भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त का सिलसिला जारी रहा, जिससे निवेशकों में उत्साह का माहौल है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने घरेलू बाजार को बड़ी राहत दी है। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 377.40 अंक चढ़कर 77,269.54 पर पहुंच गया। निफ्टी 106.70 अंक बढ़कर 24,113.25 पर पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने भी शानदार मजबूती दिखाई और शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 26 पैसे सुधरकर 94.90 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार की शुरुआती तेजी के पीछे कौन से मुख्य कारण रहे हैं?
वैश्विक स्तर पर मिश्रित संकेतों के बावजूद घरेलू शेयर बाजार ने नए महीने की शुरुआत काफी सकारात्मक रुख के साथ की है, जहां बेंचमार्क सूचकांकों ने लगभग 0.5 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। इस तेजी को सबसे बड़ा सहारा ईरान-अमेरिका शांति वार्ता से मिला है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम हुई हैं। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए व्यापक आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आई है। इसी वजह से गुरुवार को लगातार दूसरे सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
दिग्गज शेयरों के प्रदर्शन और सेक्टोरल मूवमेंट का क्या हाल है?
बाजार के खुलते ही प्रमुख सेक्टर्स और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर खींचने में मुख्य भूमिका निभाई:
- इन्फोसिस: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा लिवाली देखी गई और यह शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत तक उछल गया।
- अदाणी एंटरप्राइजेज: अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भी तेजी का रुख रहा और यह दो प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इन प्रमुख शेयरों के मजबूत प्रदर्शन ने बाजार के सेंटिमेंट को काफी बढ़ावा दिया है, जिससे शुरुआती सत्र में ही बुल्स हावी नजर आए।
वैश्विक बाजारों से भारतीय बाजारों को कैसे संकेत मिल रहे हैं?
एशियाई और यूरोपीय बाजारों से गुरुवार को मिले-जुले वैश्विक संकेत देखने को मिले, जिसका मिला-जुला असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। वैश्विक सूचकांकों पर नजर डालें तो स्थिति इस प्रकार रही:
- हांगकांग का हैंग सेंग: इस सूचकांक में सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई और यह 1.7 प्रतिशत मजबूत हुआ।
- जापान का टॉपिक्स: जापानी बाजार भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था और इसमें 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
- एसएंडपी 500 फ्यूचर्स: टोक्यो समय के अनुसार सुबह 10:48 बजे तक इसमें 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई।
- यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स: यूरोपीय बाजार के फ्यूचर्स में भी 0.2 प्रतिशत की सकारात्मक बढ़त रही।
- ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200: ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बहुत कम बदलाव देखा गया और यह लगभग स्थिर रहा।
- शंघाई कम्पोजिट: दूसरी तरफ, चीनी बाजारों में गिरावट का रुख रहा और यह सूचकांक 0.7 प्रतिशत तक नीचे आ गया।
निफ्टी की तकनीकी स्थिति और निवेशकों के लिए विश्लेषकों की क्या सलाह है?
बाजार के जानकारों और तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी वर्तमान में एक कंसॉलिडेशन (दायरे में उतार-चढ़ाव) के दौर से गुजर रहा है। तकनीकी चार्ट के अनुसार, जब तक निफ्टी 23,800 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार या नीचे की ओर नहीं तोड़ता, तब तक यह इसी सीमित दायरे में बना रहेगा। ऐसे में विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बाजार में एक सामान्य दृष्टिकोण अपनाने के बजाय ‘स्टॉक-विशिष्ट’ रुख अपनाएं। निवेशकों को केवल उन क्षेत्रों और शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो बाजार के इस उतार-चढ़ाव वाले दौर में भी तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन दिखा रहे हैं।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता और तेल की कीमतों में गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार और रुपये को बड़ी तात्कालिक मजबूती प्रदान की है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बने मिले-जुले रुख और निफ्टी के कंसॉलिडेशन रेंज को देखते हुए आने वाले समय में बाजार की चाल काफी हद तक विशिष्ट सेक्टर्स के प्रदर्शन और वैश्विक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।



