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Social Media Safety Research: जब भी ऑनलाइन सुरक्षा की बात होती है, तो सोशल मीडिया कंपनियां दावा करने लगती हैं कि उन्होंने टीनएजर्स की सुरक्षा के लिए कई नए फीचर्स जोड़े हैं या उनके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं। लेकिन इस रिपेार्ट ने कंपनियों के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स की माने तो स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ सेफ्टी फीचर्स या तो पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं या फिर उन्हें इस तरह रखा गया है कि आम यूजर्स और पैरेंट्स के लिए उनका इस्तेमाल करना आसान नहीं है।

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Snapchat
– फोटो : Snapchat
Snapchat: यूजरनेम पता हो तो मिल सकता है टीनएजर का अकाउंट
- जैसा की स्नैपचैट ने 2023 में कहा था कि टीनएजर्स की प्रोफाइल केवल उन्हीं लोगों को दिखाई जाएगी, जिनके साथ उनके म्यूचुअल फ्रेंड्स होंगे। हालांकि, रिसर्च में पाया गया कि अगर किसी व्यक्ति को किसी टीनएजर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है।
- इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि यह एप कुछ मामलों में बच्चों को ऐसे वयस्क यूजर्स की प्रोफाइल को सजेस्ट करता था, जिनसे उनको काेई लेना-देना नहीं था।

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instagram
– फोटो : FREEPIK
Instagram: प्राइवेट अकाउंट के बावजूद अजनबियों के सुझाव
- मेटा, जो इस समय अपने ही कई फीचर्स को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने टीन अकाउंट लॉन्च करते वक्त दावा किया था कि टीनएजर्स के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट होंगे और अनचाहे लोगों से संपर्क कम होगा।
- जब इसपर रिसर्च की गई, तो सामने कुछ और ही आया। रिसर्चर ने एक बच्ची अकाउंट बनाया, जिसके सजेस्टेड फॉर यू सेक्शन में अधिकतर प्रोफाइल ऐसे वयस्क पुरुषों की थीं, जिन्हें वह जानती तक नहीं थी। इससे एल्गोरिदम पर सवाल उठे हैं।

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YouTube Update
– फोटो : FREEPIK
YouTube: स्क्रीन टाइम लिमिट के बाद भी मिल रहे विकल्प
- यूट्यूब का कहना है कि वह अपने एप पर टीनएजर्स के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और Take a Break रिमाइंडर जैसी सुविधाएं देता है।
- हालांकि, रिसर्च में पाया गया कि समय पूरा होने पर यूट्यूब खुद इग्नोर लिमिट फॉर टुडे और चेंज लिमिट जैसे विकल्प भी दिखाता है। इसपर कंपनी का कहना है कि अगर स्क्रीन टाइम Family Link के जरिए माता-पिता ने सेट किया है, तो बच्चे इन सेटिंग्स को बदल नहीं सकते।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : एआई जनरेटेड
सेफ्टी फीचर्स मौजूद, लेकिन पहुंच मुश्किल
रिसर्च के अनुसार, कई सुरक्षा फीचर्स ऐसे कठिन मेन्यू में छिपे हैं कि अधिकांश माता-पिता को उनके बारे में जानकारी ही नहीं होती। कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा विकल्प डिफॉल्ट रूप से चालू भी नहीं थे, जिससे उनका फायदा सीमित हो जाता है।



