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कई किलोमीटर तक नहीं मिलता मोबाइल नेटवर्क, फिर भी इस पहाड़ी सफर के दीवाने हैं एडवेंचर लवर्स


अगर आप ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहां शहर की भागदौड़, ट्रैफिक का शोर और मोबाइल नोटिफिकेशन पूरी तरह पीछे छूट जाएं, तो पश्चिम बंगाल का सैंडाकफू ट्रेक (Sandakphu Trek) आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह ट्रेक सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों और बादलों के बीच चलने का अनुभव ही नहीं देता, बल्कि कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से दूर रहने का मौका भी देता है. यही वजह है कि हर साल हजारों एडवेंचर प्रेमी इस ट्रेक को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल करते हैं.

समुद्र तल से लगभग 3,636 मीटर (11,930 फीट) की ऊंचाई पर स्थित सैंडाकफू, पश्चिम बंगाल की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां से दुनिया की चार सबसे ऊंची चोटियों में से माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू को साफ मौसम में देखा जा सकता है. सूर्योदय के समय जब इन बर्फीली चोटियों पर पहली किरण पड़ती है, तो पूरा नजारा किसी पोस्टकार्ड जैसा दिखाई देता है.

इस ट्रेक का एक अनोखा अनुभव यह भी है कि रास्ते के कई हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं मिलता. शुरुआत में यह बात कुछ लोगों को परेशान कर सकती है, लेकिन जैसे-जैसे सफर आगे बढ़ता है, प्रकृति का शांत वातावरण और पहाड़ों की खूबसूरती हर चिंता भुला देती है. यहां पहुंचकर लोग अक्सर महसूस करते हैं कि बिना फोन के भी सफर कितना यादगार हो सकता है.

सैंडाकफू ट्रेक की शुरुआत आमतौर पर मानेभंजन (Manebhanjan) से होती है. यहां से करीब 32 किलोमीटर लंबा ट्रेक अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरता है. रास्ते में घने जंगल, रंग-बिरंगे रोडोडेंड्रॉन के फूल, छोटे-छोटे पहाड़ी गांव और बादलों से घिरी पगडंडियां इस यात्रा को बेहद खास बना देती हैं. कई जगह नेपाल की सीमा भी ट्रेक के बिल्कुल पास चलती है, जिससे यह सफर और दिलचस्प बन जाता है.

अगर खर्च की बात करें, तो दिल्ली या कोलकाता से पहुंचने, रहने और खाने समेत 4 से 6 दिन की यात्रा पर प्रति व्यक्ति लगभग ₹12,000 से ₹20,000 का खर्च आ सकता है. अगर आप गाइड, पोर्टर या विशेष होमस्टे चुनते हैं, तो बजट थोड़ा बढ़ सकता है. वहीं, ग्रुप में यात्रा करने पर कुल खर्च कुछ कम हो सकता है.

कब जाएं?
मार्च से मई और अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय इस ट्रेक के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. वसंत के मौसम में रास्ते रंग-बिरंगे फूलों से भर जाते हैं, जबकि अक्टूबर के बाद आसमान साफ रहने से हिमालय की चोटियां शानदार दिखाई देती हैं. मानसून के दौरान फिसलन और धुंध की वजह से ट्रेक थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

अगर आप पहली बार किसी लंबे ट्रेक पर जा रहे हैं, तो अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज, रेन जैकेट, गर्म कपड़े, टॉर्च, पावर बैंक और जरूरी दवाइयां साथ जरूर रखें. चूंकि कई हिस्सों में नेटवर्क नहीं मिलता, इसलिए परिवार को पहले से अपनी यात्रा की जानकारी देना भी बेहतर रहता है.



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