नई दिल्ली6 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर छात्रों की नाराजगी पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “देखिए, छोटे-छोटे बच्चों में कितनी निराशा है।”
कोर्ट ने कहा कि सरकार से किसी टकराव की मंशा नहीं है, लेकिन व्यवस्था में कुछ समस्याएं हैं। कोर्ट ने CBSE की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। साथ ही केंद्र से सहयोग करने की बात कही है।
CBSE का OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम ऐसी व्यवस्था है, जिसमें ऑन्सर शीट की स्कैन कॉपी कंप्यूटर पर जांची जाती है। शिक्षक कागज की कॉपी देखने के बजाय डिजिटल स्क्रीन पर मूल्यांकन करते हैं।

कोर्ट में सरकार के 3 तर्क…
- केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जिन स्टूडेंट्स की मार्कशीट में गड़बड़ी थी। उनमें से अधिकांश मामलों का समाधान कर दिया गया है।
- सरकार इस व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एस राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग बनाया गया है।
- यह आयोग मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा करेगा और जरूरी सुधारों की सिफारिश करेगा। हम इस मामले को विरोध के तौर पर नहीं देख रहे हैं। समिति पहले से शिकायतों की जांच कर रही है।
याचिका में स्पष्ट नियमावली की मांग
यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने वकील लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश देने की मांग की गई है कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए OSM मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी स्पष्ट नियमावली बनाई जाए।
इस व्यवस्था की निगरानी और सुधार लागू करने के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित की जाए। जिन स्टूडेंट्स को पहले ही प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें न्यूनतम अर्हता अंकों में राहत दी जाए।
विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम कक्षा 12 अंक की शर्त से भी छूट देने का निर्देश दिया जाए।


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