Homeट्रैवलनैनीताल का रहस्यमयी ताल, जहां पूर्णिमा की रात उतरती हैं परियां, गहराई...

नैनीताल का रहस्यमयी ताल, जहां पूर्णिमा की रात उतरती हैं परियां, गहराई का राज अब भी अनसुलझा


Last Updated:

Pari Tal Nainital: नैनीताल की खूबसूरती से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन इसी जिले में एक ऐसी रहस्यमयी झील भी मौजूद है, जहां प्रकृति के साथ लोककथाओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है. घने जंगलों और पहाड़ों के बीच छिपी परी ताल आज भी अपनी गहराई, मान्यताओं और रोमांचक रास्तों की वजह से लोगों को आकर्षित करती है.

उत्तराखंड के नैनीताल जिले को ‘लेक डिस्ट्रिक्ट’ कहा जाता है, लेकिन यहां एक ऐसी झील भी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. यह है परी ताल, जो प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है. घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित यह ताल रोमांच और सुकून का अद्भुत मेल है. यहां पहुंचते ही चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और झरनों की आवाज प्रकृति प्रेमियों का मन मोह लेती है. यही वजह है कि इसे नैनीताल की छिपी हुई प्रमुख जगहों में गिना जाता है

स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार, हर पूर्णिमा की चांदनी रात में इस ताल पर परियां उतरती हैं और यहां स्नान करती हैं. इसी वजह से इस झील का नाम परी ताल पड़ा. स्थानीय ग्रामीण आज भी इस मान्यता का सम्मान करते हैं और पूर्णिमा के समय यहां जाने या ताल में स्नान करने से परहेज करते हैं. वर्षों से चली आ रही यह लोककथा आज भी लोगों के बीच जीवंत है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण बन चुकी है.

परी ताल तक पहुंचने के लिए नैनीताल से भीमताल-धानाचूली मार्ग होते हुए चाफी गांव पहुंचना पड़ता है. यहां से करीब 3 से 5 किलोमीटर का पैदल ट्रेक शुरू होता है. रास्ता घने जंगलों, फिसलन भरी चट्टानों और नदी को पार करते हुए आगे बढ़ता है. यह ट्रेक आसान नहीं है, लेकिन प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए बेहद रोमांचक अनुभव साबित होता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

परी ताल जाने वाले रास्ते में ब्रिटिशकाल का एक पुराना पुल भी पड़ता है. पत्थरों और लोहे से बना यह पुल आज भी इतिहास की गवाही देता है. जंगलों के बीच स्थित यह पुल ट्रेकिंग के अनुभव को और खास बना देता है. यहां पहुंचने वाले पर्यटक इस ऐतिहासिक पुल पर रुककर तस्वीरें लेना नहीं भूलते.

परी ताल का सबसे बड़ा रहस्य इसकी गहराई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आज तक कोई भी इसकी वास्तविक गहराई का पता नहीं लगा पाया है. यही कारण है कि यह ताल रहस्य और रोमांच का केंद्र बना हुआ है. इसकी शांत सतह के नीचे क्या है, यह आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय है.

परी ताल से जुड़ी एक और चर्चित मान्यता यह है कि यहां हर साल एक हादसा या मौत होती है. हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह लोककथा आज भी प्रचलित है. इसी वजह से गांव के लोग इस ताल में नहाने या गहरे पानी में जाने से बचते हैं और पर्यटकों को भी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.

परी ताल के आसपास कई काली चट्टानें दिखाई देती हैं. स्थानीय लोग इन्हें शिलाजीत युक्त चट्टानें मानते हैं. मान्यता है कि शिलाजीत औषधीय गुणों से भरपूर होता है. हालांकि, इन चट्टानों के बारे में वैज्ञानिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं ने इन्हें भी एक अलग पहचान दी है.

ताल के बिल्कुल पास बहता एक सुंदर झरना इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है. झरने का साफ पानी, घने जंगल और पहाड़ों की हरियाली मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं, जिसे देखकर हर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाता है. फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यही वजह है कि गर्मियों के मौसम में यहां लोगों की काफी भीड़ लगी रहती है, और कई वीडियो फोटोग्राफ इस जगह की इंटरनेट पर देखी जा सकती है.

अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और अनोखी जगह की तलाश में हैं, तो परी ताल बेहतरीन जगह है, यहां तक पहुंचने का रोमांचक ट्रेक, रहस्यमयी लोककथाएं और प्राकृतिक सौंदर्य इसे सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं. हालांकि, यहां जाते समय थोड़ी मेहनत जरूर करनी होगी लेकिन मंजिल पर पहुंचकर नजारे आपके दिल को छू लेंगे.लेकिन एक बात का ध्यान जरूर रखें आप जब भी यहां जाएं तो पानी में उतरने से बचे.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments