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कैलाश मानसरोवर यात्रा का चौथा दल धारचूला में फंसा: भूस्खलन से 18 सड़कें बंद; केदारनाथ मार्ग पर भी पत्थर गिरे, पैदल यात्रा जारी – Pithoragarh News


कैलाश मानसरोवर मार्ग पर गर्भाधार के समीप दरकी पहाड़ी।

उत्तराखंड में लगातार बारिश का असर अब प्रमुख तीर्थ यात्राओं पर दिखने लगा है। पिथौरागढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भूस्खलन होने से चौथा दल धारचूला में ही रुक गया है, जबकि जिले की 18 सड़कें बंद हैं।

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वहीं रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी कई जगह भूस्खलन हुआ, हालांकि प्रशासन ने रास्ता साफ कर पैदल यात्रा फिर शुरू करा दी है।

पिथौरागढ़ जिले में गर्भाधार के पास पहाड़ी दरकने से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें आ गईं। इसके चलते वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। इसी कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा का चौथा दल धारचूला में रोक दिया गया है। सड़क खुलने के बाद ही श्रद्धालुओं को गुंजी के लिए रवाना किया जाएगा।

पहाड़ी दरकने से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग प्रभावित हुआ।

जानिए पूरा मामला

1. 18 सड़कें बंद, थल-मुनस्यारी मार्ग 5 घंटे बाद खुला भारी बारिश के बाद कैलाश मानसरोवर मार्ग समेत जिले की 18 सड़कें मलबा आने से बंद हो गईं। इनमें तवाघाट-गुंजी, मुवानी-आलम दारमा, सोबला-उमचिया, बंगापानी-जाराजिबली और होकरा-नामिक जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। वहीं थल-मुनस्यारी सड़क पर शुक्रवार रात मलबा गिरने से करीब पांच घंटे तक यातायात ठप रहा। सड़क सुबह करीब 10 बजे खुलने के बाद आवाजाही फिर शुरू हो सकी।

2. 15 दिन से बारिश बनी आफत पिछले 15 दिनों से सीमांत जिले में लगातार बारिश से हालात बिगड़े हुए हैं। धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र में कई सड़कें, पैदल रास्ते और पुल प्रभावित हैं, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

3. मलबा हटाने में जुटीं बीआरओ और प्रशासन की टीमें जिला आपदा प्रबंधन विभाग और बीआरओ की टीमें कैलाश मानसरोवर मार्ग समेत अन्य प्रभावित सड़कों से मलबा हटाने में जुटी हैं। मौसम अनुकूल रहने पर बंद मार्गों पर जल्द यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

टनकपुर में कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल के श्रद्धालुओं का इस तरह तिलक लगाकर पारंपरिक स्वागत हुआ था।

टनकपुर में कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल के श्रद्धालुओं का इस तरह तिलक लगाकर पारंपरिक स्वागत हुआ था।

कैलाश यात्रा का पहला दल लौटा

कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल दर्शन कर सकुशल भारत लौट आया है। शनिवार सुबह लिपुलेख दर्रे पर टेकओवर प्रक्रिया के बाद चीनी अधिकारियों ने यात्रियों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हवाले किया। पहले दल में 49 में से 48 यात्री कैलाश मानसरोवर पहुंचे थे। इनके साथ एक डॉक्टर और तीन किचन स्टाफ भी शामिल थे। लौटने के बाद दल गुंजी होते हुए बुंदी के लिए रवाना हुआ।

उधर, तीसरे दल ने शनिवार सुबह लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश किया, जबकि दूसरा दल फिलहाल कैलाश परिक्रमा पर है। वहीं चौथा दल सड़क की स्थिति सामान्य होने के बाद धारचूला से गुंजी के लिए रवाना किया जाएगा।

रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड-चीड़बासा के बीच इस तरह गिरे बोल्डर।

रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड-चीड़बासा के बीच इस तरह गिरे बोल्डर।

केदारनाथ यात्रा पर भी बारिश का असर

रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश के बीच गौरीकुंड-चीड़बासा पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं हुईं। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने कुछ समय के लिए यात्रा रोकी, लेकिन मलबा हटाने के बाद पैदल यात्रा फिर से शुरू करा दी गई। फिलहाल चीड़बासा में कुछ बड़े पत्थर हटाने का काम जारी है, इसलिए घोड़े-खच्चरों का संचालन अभी बंद रखा गया है।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि केदारनाथ धाम की यात्रा फिलहाल सुचारु रूप से जारी है। मानसून को देखते हुए जिले के सभी कंट्रोल रूम समन्वित तरीके से काम कर रहे हैं। नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भूस्खलन संभावित स्थानों पर जेसीबी मशीनें पहले से तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मार्ग को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। यात्रियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

रुद्रप्रयाग में भूस्खलन के बाद रास्ता साफ कर केदारनाथ की पैदल यात्रा फिर शुरू कराई गई।

रुद्रप्रयाग में भूस्खलन के बाद रास्ता साफ कर केदारनाथ की पैदल यात्रा फिर शुरू कराई गई।

कई नदियां खतरे के निशान के करीब

लगातार बारिश के बीच उत्तराखंड की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, सरयू और काली नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। यदि अगले एक-दो दिन तक बारिश जारी रही तो कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के स्तर तक पहुंच सकता है। फिलहाल ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 337.88 मीटर है, जबकि खतरे का स्तर 340.50 मीटर है। वहीं हरिद्वार में गंगा 290.70 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान 294 मीटर से नीचे है।

इन जगहों पर प्रशासन की सबसे ज्यादा नजर

बाढ़ की आशंका को देखते हुए श्रीनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार और रामनगर को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। भीमगौड़ा बैराज (हरिद्वार) से 36,183 क्यूसेक और वीरभद्र बैराज (ऋषिकेश) से 41,989 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं मनेरी, जोशियाड़ा, इछाड़ी, आसन और व्यासी डैम से भी नियंत्रित जल निकासी जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने निचले इलाकों के लोगों और प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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