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Tatarpur Heritage Fort: भरतपुर का 300 साल से अधिक पुराना ततारपुर किला (Tatarpur Fort) अब नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा. इस ऐतिहासिक धरोहर को हेरिटेज होटल में बदलने की योजना से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. किले के संरक्षण और पुनर्विकास से इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रहेगी, जबकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को शाही विरासत का अनुभव मिलेगा. यह परियोजना भरतपुर को राजस्थान के प्रमुख हेरिटेज पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
Tatarpur fort: अलवर जिले के ऐतिहासिक किलों में खैरथल-तिजारा जिले के ततारपुर गांव स्थित ततारपुर किला अपनी भव्यता और स्थापत्य कला के लिए खास पहचान रखता है. करीब 300 वर्ष से ज्यादा पुराने इस किले का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के वंशज राजा ततार सिंह चौहान ने करवाया था. वर्तमान में यह निजी संपत्ति है, जहां हेरिटेज होटल विकसित किया जा रहा है. अपनी ऐतिहासिक विरासत और आकर्षक बनावट के कारण यह किला पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.
पृथ्वीराज चौहान के वंशज ततार सिंह चौहान द्वारा हुमायूं काल में बसाए गए ऐतिहासिक ततारपुर फोर्ट का अब कायाकल्प किया जा रहा है. इस किले को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे आगामी दिनों में यह क्षेत्र विश्व पर्यटन के पटल पर उभरेगा. जिसमें दिल्ली एनसीआर सहित अन्य क्षेत्र के लोग यहां घूमने आ सकते हैं.
खैरथल तिजारा जिले के ततारपुर गांव में स्थित किले को निजी कंपनी द्वारा काम किया जा रहा है. इस परियोजना से ततारपुर और आसपास के क्षेत्र में बड़े आर्थिक और ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहे हैं. किले के पुनरुद्धार कार्य से यहां मजदूरों, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन और माली व कारीगरों को रोजगार मिल गया है.
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इतिहास के अनुसार, ततार सिंह चौहान ने इस किले का निर्माण करवाकर ततारपुर गांव बसाया था. ततारपुर के अंतिम शासक मदन गोपाल सिंह चौहान थे. जुलाई 1995 में उनका देहांत हो चुका. इस किले में राजा ततार सिंह चौहान के बाद इस ऐतिहासिक चौहान किले में कई पीढ़ियों ने शासन किया है.
ततारपुर निवासी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि चौहान वंश के मदन गोपाल सिंह चौहान के निधन के बाद उनके चारों पुत्र कुछ समय तक इसी किले में रहे. बाद में सभी धीरे-धीरे अलवर शहर में जाकर बस गए, जिससे किले की देखरेख कम होती गई और यह समय के साथ जर्जर होने लगा.
वर्षों तक उपेक्षित रहने के बाद किले को एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया. अब कंपनी इसके संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्याकरण का कार्य कर रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, ततारपुर किले को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि अलवर और देशभर से आने वाले पर्यटक इसकी ऐतिहासिक विरासत और भव्यता का अनुभव कर सकें. ततारपुर के इस किले में 450 साल पुरानी घोड़ा बग्गी आज भी मौजूद है. जिसमें बैठकर ततार सिंह चौहान आते थे. पृथ्वीराज चौहान के सबसे ताकतवर राजा माने जाने वाले तातार सिंह चौहान थे.



