PM Modi Travel Advice: भारत में, पर्यटन का मतलब अक्सर पहाड़ों, समुद्र तटों या ऐतिहासिक शहरों की यात्रा से होता है. हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को देश के सीमावर्ती गांवों की यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया है. ये गांव भारत की संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक सुंदरता और देशभक्ति की भावना की एक अनोखी झलक पेश करते हैं. ऐसी यात्राएं न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि इन सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं. आइए, ऐसे ही 6 खूबसूरत सीमावर्ती गांवों के बारे में जानें जिन्हें हर युवा को अपनी यात्रा योजना में शामिल करना चाहिए…
भारत के 6 सीमावर्ती गांव, जिन्हें हर ट्रैवलर को एक बार जरूर देखना चाहिए-
1. माणा, उत्तराखंड
बद्रीनाथ धाम से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित माणा को भारत का पहला गांव माना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक भीम पुल, व्यास गुफा, सरस्वती नदी और आस-पास के शानदार हिमालयी ट्रेकिंग रास्तों का आनंद ले सकते हैं. प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व का यह अनूठा संगम इसे एक खास जगह बनाता है.
2. गुंजी, उत्तराखंड
माउंट कैलाश के रास्ते पर स्थित गुंजी अपने शानदार पहाड़ी नज़ारों और समृद्ध ‘आदि शौका’ संस्कृति के लिए मशहूर है. यहां आने वाले लोग पारंपरिक घरों में रहकर स्थानीय परंपराओं को करीब से जान सकते हैं. शांत माहौल और हिमालय के नज़ारे इस गाँव को खास बनाते हैं.
3. चितकुल, हिमाचल प्रदेश
बास्पा घाटी में बसा चितकुल भारत के सबसे खूबसूरत गाँवों में से एक है। यहाँ पारंपरिक लकड़ी के घर, साफ़-सुथरा माहौल, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ और प्राचीन हिंदुस्तान-तिब्बत व्यापार मार्ग से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व देखने को मिलता है।
4. शिपकी ला, हिमाचल प्रदेश
शिपकी ला एक ऐतिहासिक पहाड़ी दर्रा है जो कभी भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का मुख्य मार्ग हुआ करता था और इसे हाल ही में घरेलू पर्यटकों के लिए खोला गया है. हिमालय के शानदार नज़ारों और बड़े ऐतिहासिक महत्व के कारण यह एक अनोखी पर्यटन जगह के तौर पर उभर रहा है.
5. तुरतुक, लद्दाख
तुरतुक भारत के सबसे उत्तरी हिस्सों में से एक में स्थित है. यह गांव अपनी अनोखी बाल्टी संस्कृति, खुबानी के बागों, श्योक घाटी के शानदार पथरीले नज़ारों और लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) के पास होने के लिए मशहूर है. यह प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत का एक अनोखा अनुभव देता है.
6. चुमुर, लद्दाख
समुद्र तल से लगभग 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चुमुर को ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत एक मॉडल बॉर्डर विलेज के तौर पर विकसित किया जा रहा है. उम्मीद है कि भविष्य में यह ऊंचाई वाले इलाकों में पर्यटन, स्थानीय होमस्टे और पश्मीना से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक मुख्य आकर्षण बनेगा.
( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



