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कोयला घोटाला में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर केस बंद: सुप्रीम कोर्ट ने CBI क्लोजर को मंजूरी दी; कहा- क्लीन चिट के बाद फिर जांच शुरू हुई थी




सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में चल रहा क्रिमिनल केस बंद कर दिया है। कोर्ट ने सीबीआई की 2014 में दाखिल की गई दो क्लोजर रिपोर्ट से सहमति जताई है। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के लिए कोई पर्याप्त सामग्री या ठोस कारण नहीं था। यह मामला यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान तलाबीरा-2 कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। साल 2015 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया था। कोर्ट ने मनमोहन सिंह और अन्य आरोपियों को ट्रायल का सामना करने के लिए तलब किया था। इस आदेश को पूर्व प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि विशेष जज ने सीबीआई द्वारा उन्हें क्लीन चिट देने वाली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बावजूद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत छह लोगों के खिलाफ संज्ञान लिया था। डॉ. मनमोहन सिंह का 26 सितंबर 2024 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले को किया खारिज पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी ने दलील दी कि सीबीआई ने 27 अगस्त 2014 और 21 अक्टूबर 2014 को ट्रायल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, स्पेशल जज ने रिपोर्ट को ठुकरा दिया था और 11 मार्च 2015 को पूर्व प्रधानमंत्री को समन जारी कर दिया था। सिब्बल ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सरकारी मंजूरी का इंतजार किए बिना ही मामला दर्ज कर लिया था। क्या था पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने का कोई ठोस कारण नहीं था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया। यह मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा था। ————————————– सरकारी प्रेस में घोटाले का खुलासा…अफसरों ने बदलीं पर्चियां:29.7 टन रद्दी को रिकॉर्ड में बताया 6.82 टन, ट्रक की जगह तक बदल दी मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट प्रेस (शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग) में रद्दी कागज की बिक्री से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर की जांच में सरकारी प्रेस, टेंडर लेने वाली कंपनी और तौल कांटे के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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