नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल के कोझिकोड जिले में वडाकरा एमडीएमए केस ने पूरे राज्य को हैरान कर दिया है. पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के आरोप में तीन लेडी टीचर्स को अरेस्ट किया है. ये तीनों जिले के पूर्वी हिस्से में मौजूद छोटे से पहाड़ी शहर पेराम्बरा में काम करती थीं. ये टीचर्स ब्लॉक रिसोर्स सेंटर से जुड़ी थीं जो समग्र शिक्षा केरल के तहत काम करता है. डिस्ट्रिक्ट एंटी-नारकोटिक्स स्पेशल एक्शन फोर्स ने यह बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस का कहना है कि ये टीचर्स सिंथेटिक ड्रग्स के लिए अहम मीडिएटर का काम करती थीं. वे इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कस्टमर्स तलाशती थीं. इसके बाद पैसों का लेन-देन कर ड्रग्स सप्लाई होती थी.
होम डिपार्टमेंट के ‘ऑपरेशन तूफान’ के तहत स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम इस मामले की जांच कर रही है. इस टीम को वडाकरा इंस्पेक्टर ए. वी. दिनेश लीड कर रहे हैं. पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में अभी और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
वडाकरा ड्रग्स केस में पुलिस ने अब तक कितने आरोपियों को अरेस्ट किया है?
पुलिस ने अब तक कुल पांच लोगों को पकड़ा है. वडाकरा के रहने वाले सफवान को 26 जून को एमडीएमए के साथ गिरफ्तार किया गया था. यह गिरफ्तारी ऑपरेशन तूफान के दौरान हुई थी. पुलिस की पूछताछ में क्यूआर कोड और बैंक खातों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आईं. इसके बाद 11 जुलाई को फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर के. सी. कीर्तना को गिरफ्तार किया गया. कीर्तना के खाते में भी पैसों के ट्रांसफर के सुबूत मिले थे.
इसके बाद 26 जुलाई को स्पेशल एजुकेटर के. काव्या को पुलिस ने अरेस्ट किया. काव्या ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को पढ़ाती थी. उसके बैंक खाते से भी इस नेटवर्क को पैसे भेजे गए थे. पुलिस ने 28 जुलाई को ट्रेनर वी. पी. नीष्मा को भी गिरफ्तार कर लिया. उसी दिन कन्नूर जिले के डिलीवरी वर्कर जिजिल कुरियाकोस को भी पकड़ा गया. जिजिल पैसों के लेन-देन और ड्रग्स की डिलीवरी का काम संभालता था. ये टीचर्स समग्र शिक्षा केरल के तहत काम करती थीं. यह भारत में स्कूली शिक्षा के लिए एक सेंट्रल स्कीम है.
कम सैलरी पाने वाली लेडी टीचर्स के बैंक खातों में लाखों रुपये कैसे आए?
कन्नूर रेंज के डीआईजी के. कार्तिक और कोझिकोड रूरल पुलिस चीफ मेरिन जोसेफ ने 29 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने बताया कि जांच में टीचर्स के खातों से भारी पैसों के लेन-देन का पता चला है. इन टीचर्स की महीने की सैलरी महज 12 से 13 हजार रुपये थी. पुलिस को इनके खातों में लाखों रुपये का बैलेंस मिला है. जांच टीम को शक है कि इन खातों का इस्तेमाल एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क के लिए किया गया.
पुलिस का मानना है कि टीचर्स को ड्रग्स डील के बदले भारी कमीशन मिलता था. ये टीचर्स बेहद शानदार लाइफस्टाइल जी रही थीं. कीर्तना और काव्या हमेशा साथ देखी जाती थीं. कॉलेज के स्टाफ को लगता था कि वे गहरी दोस्त हैं. कीर्तना स्कूल के एंटी-ड्रग्स कैंपेन का भी अहम हिस्सा थी. वह अक्सर स्टूडेंट्स के लिए जुम्बा क्लास लेती थी. शुरुआत में इन टीचर्स ने खुद ड्रग्स लेना शुरू किया था. जब वे इसे खरीद नहीं पाईं तो वे खुद ड्रग्स की एजेंट बन गईं.
टीचर्स ने स्कूली बच्चों के बजाय आखिर किसे अपने जाल में फंसाया था?
पुलिस ने 29 जुलाई को एक बेहद अहम बयान जारी किया है. शुरुआती जांच में स्कूली बच्चों के ड्रग्स नेटवर्क में शामिल होने के सुबूत नहीं मिले हैं. पब्लिक इस बात से बेहद डरी हुई थी कि आरोपी टीचर्स एजुकेशन सेक्टर से जुड़ी थीं. लोगों को लग रहा था कि बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं. हालांकि इन टीचर्स ने ड्रग्स तस्करी के लिए सीधे कॉलेज स्टूडेंट्स को अपना टारगेट बनाया था.
जांच टीम का कहना है कि उन्हें इस बारे में कई बड़े सुराग मिले हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि इस काले धंधे में और भी टीचर्स को फंसाने की कोशिश हुई थी. पुलिस अब इस एंगल से भी मामले की गहराई से जांच कर रही है. इस बड़े खुलासे के बाद पूरे एजुकेशन सिस्टम पर ही सवाल उठने लगे हैं.
जुम्बा क्लास और बन बिक्री की आड़ में कैसे चलता था एमडीएमए का धंधा?
इन आरोपियों ने बड़ी चालाकी से अपने काले कारनामे को अंजाम दिया. उन्होंने टीचर होने का फायदा उठाया जिससे किसी को उन पर शक न हो. आरोपियों ने जुम्बा क्लास और बन बिक्री को अपने ड्रग्स के धंधे का मेन कवर बना लिया था.
फूड डिलीवरी ऐप के जरिए काम करने वाले एजेंट की गिरफ्तारी से कई गहरे राज खुले. पुलिस ने बताया कि एमडीएमए को बेंगलुरु से कोझिकोड लाया गया था. आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर अपने बेंगलुरु ट्रिप के वीडियो भी धड़ल्ले से शेयर किए थे.
वे कस्टमर्स को खाड़ी देशों के एक फोन नंबर पर संपर्क करने को कहते थे. डिजिटल पेमेंट मिलने के बाद कस्टमर्स को एक लोकेशन भेजी जाती थी. यह एक तरह का डेड ड्रॉप होता था. इस छिपी हुई लोकेशन से कस्टमर्स को खुद अपनी ड्रग्स उठानी होती थी. इस काम में डिलीवरी वर्कर उनकी पूरी मदद करता था.
एजुकेशन डिपार्टमेंट ने ड्रग्स केस सामने आने के बाद क्या कड़ा कदम उठाया?
इस पूरे मामले के खुलासे के बाद एजुकेशन डिपार्टमेंट पूरी तरह अलर्ट हो गया है. शिक्षा विभाग ने स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्ट्रेट के निर्देश पर कीर्तना और काव्या को नौकरी से निकाल दिया है. नीष्मा को भी बर्खास्त करने की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है. ये तीनों टीचर्स एजुकेशन डिपार्टमेंट में अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही थीं. वहीं समग्र शिक्षा केरल ने भी इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है.
एसएसके ने सभी जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर्स को तुरंत एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का निर्देश दिया है. यह मीटिंग राज्य भर के स्पेशल एजुकेटर्स और टीचर्स के लिए बुलाई जाएगी. स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने 29 जुलाई को एक सख्त सर्कुलर भी जारी किया है. इसमें सभी बीआरसी कोऑर्डिनेटर्स को खास हिदायत दी गई है. उन्हें स्पेशल एजुकेटर्स के काम पर अब कड़ी नजर रखने को कहा गया है.



