भारतीय शेयर बाजार में युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की मार्केट पल्स-जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून के बीच यानी तीन माह में शेयर बाजार में आए नए निवेशकों में जेन जी की हिस्सेदारी 59% रही। मार्च, 2020 से जून, 2026 तक भी हर साल नए निवेशकों में इनका हिस्सा 53-59 फीसदी रहा।
नए निवेशकों में जेन जी की हिस्सेदारी कितनी रही?
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2020 में देश में 3 करोड़ पंजीकृत निवेशक थे, जो जून, 2026 तक बढ़कर 13.24 करोड़ हो गए। यानी अब देश का लगभग हर 10वां व्यक्ति पंजीकृत निवेशक है। इनमें 4.40 करोड़ सक्रिय निवेशक हैं, जिन्होंने एक साल में कम से कम एक बार ट्रेडिंग की। 3.55 करोड़ कैश मार्केट में सक्रिय रहे, जबकि 85 लाख निवेशकों ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में कारोबार किया।
रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में निवेश करने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। देश के कुल पंजीकृत निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी है। यानी लगभग हर चार में एक निवेशक महिला है।
महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ी है?
| राज्य | हिस्सेदारी |
| गोवा | 33.3% |
| मिजोरम | 32.6% |
| दिल्ली | 31.1% |
| महाराष्ट्र | 29% |
| तमिलनाडु | 28.7% |
| गुजरात | 28.4% |
| उत्तर प्रदेश | 19.2% |
| बिहार | 16.5% |
| एनएसई में 2020 से जून, 2026 के आंकड़ाें से निष्कर्ष | |
लंबी अवधि के निवेश का रुझान क्यों बढ़ रहा है?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कैश मार्केट में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि खुदरा निवेशक एफएंडओ में सिर्फ सट्टेबाजी और जल्द पैसा बनाने के बजाय लंबी अवधि के निवेश पर भी जोर दे रहे हैं। सेबी कह चुका है कि एफएंडओ में ज्यादातर नुकसान होता है।



