राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने शनिवार को पुणे में कहा, ‘ युवाओं को यह समझना होगा कि आजादी का मतलब केवल अपनी मर्जी से कुछ भी करने की मनमानी नहीं है।’ कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘युवा आजादी को केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की स्वतंत्रता समझ सकते हैं, लेकिन आजादी का वास्तविक अर्थ यह नहीं है। हमें यह समझाना होगा कि देश की आजादी के पीछे एक लंबा संघर्ष और इतिहास रहा है।’ डोभाल ने अधिकारों के दुरुपयोग पर जताई चिंता NSA ने कहा कि आज के युवाओं को खुद को पूरी तरह प्रतिबद्ध करना चाहिए और सोचना चाहिए कि वे केवल राष्ट्रहित में काम करेंगे। उन्हें छोटे निजी हितों का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए और अगर ऐसे विचार मन में आएं भी, तो उन्हें नजरअंदाज कर देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देश अपने मिशन में सफल होगा और इतिहास का एक नया अध्याय लिखेगा। देश भाग्यशाली है कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह जैसे नेता मिले हैं। शाह बोले- 2014 में पीएम मोदी का पहला फैसला शाह ने बताया कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी द्वारा लिए गए पहले फैसलों में से एक अजीत डोभाल को एनएसए नियुक्त करना था। उन्होंने कहा कि इस कदम ने भारत के रणनीतिक रुख को बदल दिया। शाह ने कहा कि आज भारत की विदेश नीति में फौलाद जैसी मजबूती है और हमने आत्मसम्मान के साथ दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत की है। भागवत बोले- नई पीढ़ी को आदेश न दें, बातचीत करें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 25 जुलाई को दिल्ली में कहा, ‘आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्र जंतर-मंतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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अजीत डोभाल ने कहा- आजादी का मतलब केवल मनमानी नहीं: आज की पीढ़ी को इसका सही मतलब समझना होगा, ये लंबे संघर्ष के बाद मिली है
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