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मध्य प्रदेश के बैतूल में भारतीय वायुसेना में शामिल होने से एक दिन पहले लापता हुए युवक मोहित गलफट की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस के अनुसार, जमीन हड़पने की लालच और पुरानी रंजिश के चलते मृतक के दो चचेरे भाइयों और बहनोई ने मिलकर सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या की. 25 जुलाई 2026 को मोहित की गुमशुदगी दर्ज हुई थी. पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि होने पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
बैतूल वायुसेना के जवान की हत्या का मामला
बैतूल में भारतीय वायुसेना में शामिल होने से एक दिन पहले युवक की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. जमीन हड़पने की लालच, पुरानी रंजिश के चलते मृतक के दो चचेरे भाइयों और बहनोई ने मिलकर सुनियोजित षड्यंत्र बनाया और एक होनहार युवक की जान ले ली. बैतूल पुलिस ने वैज्ञानिक विवेचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया है. बैतूल पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया है, जिसमें भारतीय वायुसेना में शामिल होने से ठीक एक दिन पहले एक होनहार युवक की हत्या कर दी गई थी. यह हत्या जमीन हड़पने की लालच, पुरानी रंजिश और एक सुनियोजित षड्यंत्र का परिणाम थी. बैतूल पुलिस ने वैज्ञानिक विवेचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस मामले को सुलझाया है.
यह मामला तब सामने आया जब 25 जुलाई 2026 को थाना आठनेर में ग्राम पुसली निवासी मोहित पिता मंचित गलफट की गुमशुदगी दर्ज कराई गई. अगले दिन, 26 जुलाई 2026 को, मोहित के परिजनों ने खेत के समीप उसके जूते और मोबाइल संदिग्ध अवस्था में पड़े होने की सूचना पुलिस को दी. थाना प्रभारी आठनेर निरीक्षक नरेंद्र सिंह परिहार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. घटनास्थल की परिस्थितियां संदिग्ध पाए जाने पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया. सीन ऑफ क्राइम एक्सपर्ट निरीक्षक आबिद अंसारी ने 26 जुलाई 2026 को घटनास्थल का वैज्ञानिक परीक्षण किया और महत्वपूर्ण भौतिक और तकनीकी साक्ष्य संकलित किए. एसडीआरएफ टीम द्वारा खेत में बने सभी 3-4 कुओं की गहन तलाशी ली गई. तलाशी के दौरान एक कुएं से मोहित का शव बरामद हुआ. शव के गले में वायर कसकर लिपटा हुआ था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने पर प्रकरण में हत्या की धाराओं 103(1), 238 बीएनएस का इजाफा किया गया.
क्या था पूरा मामला?
विशेष जांच दल द्वारा तकनीकी विश्लेषण, वैज्ञानिक साक्ष्यों, घटनास्थल निरीक्षण और आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर जो तथ्य सामने आए, वे अत्यंत चौंकाने वाले हैं. जांच में सामने आया कि हत्या की योजना लगभग 20 दिन पूर्व ही बना ली गई थी. मृतक मोहित की बहन शिवानी ने राजा मस्की के साथ प्रेम विवाह किया था. इसके बाद राजा मस्की की नजर अपने ससुर मंचित गलफट की लगभग 7-8 एकड़ कृषि भूमि पर थी. राजा मस्की का मानना था कि यदि मोहित रास्ते से हट जाएगा तो भविष्य में यह जमीन उसकी पत्नी शिवानी के माध्यम से उसके कब्जे में आ सकती है.
दूसरी ओर, संजय और आकाश का परिवार भी मंचित और मोहित से वर्षों से खेत, सिंचाई, पाइप लाइन, कुएं के पानी और खेत में पार्टी करने को लेकर विवाद रखता था. इन विवादों के कारण दोनों पक्षों में लगातार मनमुटाव बना हुआ था. जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जब संजय और आकाश ने अपने परिवार में इस विवाद का उल्लेख किया, तब आकाश के पिता नारायण ने भी उन्हें मोहित को रास्ते से हटाने के लिए उकसाया और यह विश्वास दिलाया कि घटना के बाद वह उन्हें बचा लेगा. पुलिस इस संबंध में प्राप्त तथ्यों की विधिक जांच कर रही है. इसी दौरान आरोपियों को जानकारी मिली कि मोहित का चयन भारतीय वायुसेना (एयर फोर्स) में हो चुका है और उसे 26 जुलाई 2026 को प्रशिक्षण के लिए रवाना होना है. आरोपियों को आशंका थी कि यदि मोहित नौकरी पर चला गया तो भविष्य में उनकी योजना कभी सफल नहीं होगी. इसी कारण हत्या की साजिश को तत्काल अंजाम देने का निर्णय लिया गया. राजा मस्की, संजय एवं आकाश ने लगभग 20 दिन पहले बैठकर हत्या की पूरी योजना तैयार की और तय किया कि मोहित की हत्या कर शव को इस प्रकार छिपाया जाएगा कि घटना दुर्घटना और गुमशुदगी प्रतीत हो.
पुलिस ने ऐसे किया पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश
25 जुलाई 2026 की रात मोहित एयरफोर्स में चयन की खुशी में गांव के मंदिर में प्रसाद चढ़ाने और वितरण के लिए गांव की दुकान से सोनपापड़ी खरीदकर लौट रहा था. इसी दौरान संजय और आकाश उसे दूसरे मंदिर चलने का बहाना बनाकर मोटरसाइकिल पर बैठाकर गांव से बाहर खेत स्थित झोपड़ी पर ले गए, जहां राजा मस्की पहले से मौजूद था. झोपड़ी में पहुंचते ही तीनों आरोपियों ने मोहित को पकड़ लिया. संजय एवं राजा ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, जबकि आकाश ने वायर उसके गले में कई बार लपेटकर कस दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई. हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बोरी में भरकर खेत में बने तीसरे कुएं में फेंक दिया. पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से मृतक के जूते दूसरे कुएं के पास फेंक दिए, जबकि संघर्ष के निशान पहले कुएं के पास छोड़े गए. मृतक का मोबाइल आरोपी की झोपड़ी में ही छूट गया, जो विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्य सिद्ध हुआ. आरोपियों ने ऐसा स्थान चुना था जहां सामान्यतः कोई नहीं आता-जाता, जिससे उन्हें विश्वास था कि हत्या का लंबे समय तक खुलासा नहीं हो सकेगा. किंतु बैतूल पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी विश्लेषण एवं घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों ने पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया.
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