राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 100 रुपये महंगा होकर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 1,47,400 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में सोने की सीमित खरीदारी देखने को मिली, जबकि चांदी का कारोबार सीमित दायरे में रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही अनिश्चितताओं के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक घटनाक्रम तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव नहीं दिख रहे हैं। निवेशक अगले आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की दिशा तय हो सके।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या असर पड़ा?
वैश्विक बाजार में हाजिर सोना शुरुआती कारोबार में बढ़त के बाद फिसलकर करीब 4,049 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 84.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। ओमान तट के पास एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हुए हमले की खबर के बाद भू-राजनीतिक चिंताओं में बढ़ोतरी हुई। इसी कारण निवेशकों की नजर सुरक्षित निवेश विकल्पों पर बनी हुई है।
चांदी के दाम स्थिर क्यों रहे?
घरेलू बाजार में चांदी की कीमत स्थिर रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसमें करीब एक प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह लगभग 58.66 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। मजबूत अमेरिकी विनिर्माण आंकड़ों से औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद बनी है, जिसका सकारात्मक असर चांदी पर देखा गया। हालांकि घरेलू बाजार में इसका पूरा प्रभाव अभी दिखाई नहीं दिया, इसलिए कीमतें स्थिर रहीं।
आगे सोना-चांदी की चाल कैसी रह सकती है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं। इनके आधार पर फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात भी बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में फिलहाल सोना और चांदी दोनों सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं, लेकिन किसी बड़े वैश्विक घटनाक्रम की स्थिति में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।