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एक ही नियम से तय होंगे ब्याज: अब नहीं चलेगी बैंकों और NBFC की मनमानी, RBI की तैयारियां क्या?


कर्ज की ब्याज दरें तय करने में अब बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अन्य सभी विनियमित वित्तीय संस्थानों की मनमानी नहीं चलेगी। एक ही नियम से इन संस्थानों में अब कर्ज की ब्याज दरें तय होंगी। इसके लिए आरबीआई ने नियमों में एकरूपता और मानकीकरण लाने का प्रस्ताव पेश किया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा, इस कदम का उद्देश्य कर्जदारों के लिए कर्ज लागत को अधिक पारदर्शी और सुसंगत बनाना है। इसका मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जल्द जारी किया जाएगा।

मौजूदा व्यवस्था में संस्थान ब्याज दरें तय करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, बैंक एमसीएलआर और ईबीएलआर जैसे मानकों पर काम करते हैं, जबकि एनबीएफसी एवं अन्य संस्थानों के अपने अलग नियम हैं। इससे ग्राहकों के लिए विभिन्न संस्थानों की ब्याज दरों की सटीक तुलना करना मुश्किल होता है।

ग्राहकों को ऐसे होगा लाभ


  • सभी संस्थानों में ब्याज तय करने के नियम व गणना के दिन समान होने से कर्ज प्रक्रिया में छिपी शर्तें खत्म होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

  • उपभोक्ता ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सही संस्थान से कर्ज ले सकेंगे। 

  • रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा। री-सेट तिथियों के मानकीकरण से फ्लोटिंग रेट लोन की दरें समय पर घटेंगी।

  • एनबीएफसी की ओर से वसूले जाने वाले मनमाने ब्याज या जुर्माने की गुंजाइश खत्म होगी, जिससे ग्राहक अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

22 साल बाद फिर से मिलेंगे नए शहरी सहकारी बैंक खोलने के लिए लाइसेंस


शहरी इलाकों में करीब 22 साल के बाद फिर से नए सहकारी बैंक खुल सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने ऑन-टैप (किसी भी समय आवेदन की खुली व्यवस्था) आधार पर दोबारा नए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर 2004 से लगी रोक हटाने का फैसला किया गया है। इस संबंध में मसौदा दिशानिर्देश जल्द जारी होंगे।

इसलिए हटी रोक

दो दशकों में शहरी सहकारी बैंकों को लेकर नियमन मजबूत हुआ है। गवर्नेंस और आर्थिक इंडिकेटर्स के मोर्चे पर इनका प्रदर्शन बेहतर हुआ है। 

आवेदन की योग्यता

अच्छी पूंजी वाली कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ही यूसीबी बन सकेंगी। आवेदकों के पास बीते वित्त वर्ष की 31 मार्च तक 300 करोड़ की पूंजी होनी चाहिए। लाइसेंस मिलने के समय शुद्ध एनपीए 3 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

आम यूजर्स पर यूपीआई का नहीं लगेगा शुल्क…

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, यूपीआई लेनदेन में मर्चेंट शुल्क का बोझ आम यूजर्स पर नहीं डाला जाएगा, लेकिन डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत किसी न किसी को चुकानी होगी। सरकार अभी इस विषय पर विचार कर रही है।

वृद्धि दर का अनुमान 6.7%

चुनौतियों के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर अनुमान को 6.6 से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। आरबीआई ने कहा, भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।


  • खुदरा महंगाई के अनुमान को 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। 

केंद्रीय बैंक ने अनुमानों में संशोधन कर बनाया संतुलन


आरबीआई के चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाने और  महंगाई का अनुमान घटाने के पीछे रणनीतिक वजह नीतिगत दरों को लंबे समय तक 5.25 फीसदी पर स्थिर रखना है। महंगाई अनुमान घटाने से भविष्य में दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा, वहीं वृद्धि दर बढ़ाने से रेपो रेट घटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे अर्थव्यवस्था में संतुलन बना रहेगा।



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