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खाना मांगने पर बेटी की हत्या, मां को जमानत: गुजरात हाईकोर्ट बोला- यह समाज की सामूहिक विफलता




गुजरात हाईकोर्ट ने उस महिला को जमानत दे दी है, जिस पर अपनी दो साल की बेटी को खाना मांगने पर पीट-पीटकर मार डालने का आरोप था। कोर्ट ने इस घटना को समाज की सामूहिक विफलता करार दिया है। जस्टिस हसमुख डी सुथार की बेंच ने कहा कि यह घटना एक हृदयविदारक याद दिलाती है कि भूख केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा, न्याय और विवेक का विषय है। क्या है पूरा मामला आरोपी महिला लखीबेन सोलंकी तीन बच्चों की मां है। उसे मार्च 2026 में सूरत के वराछा पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने अपनी बेटी ईशा को तब पीटा था, जब वह भूख के कारण खाना मांग रही थी। महिला के वकील ने जमानत की मांग करते हुए बताया कि वह सात महीने की गर्भवती है। उसके दो अन्य बच्चे हैं, जिनमें से एक बच्चा उसके साथ जेल में है और दूसरा घर पर अकेला है। महिला का पति घर छोड़कर भाग गया था और वह अपराध करने से पहले एक अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन में रह रही थी। कोर्ट ने कहा- यह समाज की सामूहिक विफलता है जस्टिस सुथार ने अपने आदेश में कहा कि जब भुखमरी एक मां को ऐसे चरम कदम उठाने पर मजबूर कर दे, तो यह विफलता व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक होती है। कोर्ट ने माना कि यह घटना सामाजिक कल्याण तंत्र की विफलता को दर्शाती है। यह राज्य और समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे कमजोर परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की रक्षा करें। संविधान और धर्म का दिया हवाला कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत छह साल तक के बच्चों को प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है। राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह पोषण के स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाए। कोर्ट ने अपने फैसले में पन्नालाल पटेल के गुजराती उपन्यास ‘मानवीनी भवाई’ और विक्टर ह्यूगो के ‘लेस मिजरेबल्स’ का जिक्र किया। साथ ही महात्मा गांधी, चार्ल्स डिकेंस, अरस्तू और विभिन्न धर्मों के ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि भूखे को भोजन कराना पवित्र कर्तव्य है। जमानत का आधार सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध में महिला की संलिप्तता पूरी तरह से स्थापित है। हालांकि, कोर्ट ने माना कि यह हत्या गरीबी और भुखमरी के कारण एक मां की अक्षमता और विफलता का परिणाम थी। कोर्ट ने कहा कि यह त्रासदी करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए एक चेतावनी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मां या बच्चा भुखमरी की स्थिति में न रहे।



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