उज्जैन13 मिनट पहले
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उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर शिप्रा आरती के अधिकार को लेकर पंडा समिति और जिला प्रशासन (महाकाल मंदिर समिति) के बीच विवाद गहरा गया है। 5 अगस्त से शुरू हुआ यह गतिरोध लगातार जारी है। प्रशासन आरती को हरिद्वार और बनारस की तर्ज पर भव्य बनाना चाहता है, जबकि पंडा समिति इसे अपने पारंपरिक अधिकारों पर अतिक्रमण मान रही है। इसी सिलसिले में पंडा समिति ने शनिवार शाम 4 बजे शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करने का एलान किया है।
5 अगस्त को मंदिर समिति के बटुक रामघाट पहुंचे, पंडा समिति ने रोका
पंडा समिति के मुताबिक, रामघाट पर 11 साल से शाम 6:30 बजे शिप्रा आरती का आयोजन किया जा रहा है। 5 अगस्त को महाकाल मंदिर समिति ने महाकाल थाने और प्रशासन को पत्र भेजकर आरती के लिए सुरक्षा और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की मांग की। शाम करीब 5 बजे महाकाल मंदिर के बटुकों के साथ मंदिर समिति के लोग रामघाट पहुंचे।
पंडा समिति के लोगों ने उन्हें आरती करने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध की स्थिति बनी रही। बाद में मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर दूसरी जगह आरती की।

7 अगस्त को पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को आरती करने से रोका तो पुलिस ने बलपूर्वक पंडों को हटाया।
7 अगस्त को पुलिस की मौजूदगी में फिर हुआ विवाद
7 अगस्त को पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को रामघाट पर आरती करने से रोक दिया। मौके पर पुलिस बल और दो एसडीएम पहुंचे। अधिकारियों ने पंडा समिति के लोगों को समझाने की कोशिश की। जब गतिरोध खत्म नहीं हुआ तो पुलिस ने पंडा समिति के पुजारियों को वहां से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से रामघाट पर दूसरी जगह आरती कराई।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में पंडा समिति ने शनिवार को शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करने का फैसला किया है।
एसडीएम बोले- सिंहस्थ के श्रद्धालुओं को हरिद्वार जैसी आरती दिखाना उद्देश्य
एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार जैसी आरती देखने को मिले, इसलिए नई शुरुआत की जा रही है। उनके मुताबिक, महाकाल प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा नदी के किनारे आरती शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी को रोकने या हटाने की बात नहीं है।

पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति की ओर से आरती कराने का विरोध किया।
पंडा समिति- 11 साल से हम करा रहे आरती, जिम्मेदारी बदलना बाहर करने जैसा
पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि तीर्थ पुरोहित वर्ष 2015 से लगातार शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं। पिछले वर्षों में आरती के स्वरूप में बदलाव कर इसे भव्य बनाया गया।
11 साल बाद अचानक महाकाल मंदिर समिति को आरती की जिम्मेदारी देना पुरोहितों को आयोजन से बाहर करने जैसा है। उन्होंने कहा कि पुरोहित आरती खुद ही कराएंगे और महाकाल मंदिर समिति को आरती नहीं करने देंगे। उन्होंने प्रशासन से अपना काम और पुरोहितों को अपना काम करने देने की बात कही।

शुक्रवार को रामघाट पर दूसरी जगह महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से आरती कराई
एसडीएम बोले- दोनों समितियों को साथ आरती करने का प्रस्ताव दिया था
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने पंडा समिति के पुरोहितों से महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ आरती में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। दोनों पक्षों के साथ मिलकर आरती करने की बात कही गई थी, लेकिन पुरोहित तैयार नहीं हुए। गर्ग के मुताबिक, अब रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से कराई जाएगी। शनिवार शाम को भी रामघाट पर आरती होगी।
स्मार्ट सिटी ने आरती के आयोजन के लिए टेंडर निकाला
उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शिप्रा आरती को बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में विकसित करने के लिए हाल ही में टेंडर निकाला है। इसका नाम ‘उज्जैन में मां शिप्रा आरती का आयोजन’ है।
इसके तहत निजी एजेंसी के माध्यम से आरती के आयोजन, प्रबंधन, ब्रांडिंग और डिजिटल प्रचार-प्रसार की योजना है। स्मार्ट सिटी के सीईओ संदीप शिवा के मुताबिक, चयनित निजी एजेंसी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत यूनिटी मॉल के पीछे स्थित शिप्रा घाट पर दैनिक और विशेष आरती करेगी।

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