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Nainital News: अगर आप नैनीताल घूमने का प्लान बना रहे हैं और सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत को भी करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो शहर की कुछ ऐतिहासिक इमारतें आपको सीधे ब्रिटिश दौर में ले जाएंगी. अंग्रेजों की ओर से बसाई गई इस झील नगरी में आज भी कई ऐसी धरोहरें मौजूद हैं, जिन्होंने अपनी पुरानी पहचान और आकर्षण को संजोकर रखा है.
नैनीताल की ऐतिहासिक पहचान में सेंट जॉन्स चर्च का खास स्थान है. शहर के मल्लीताल के सूखाताल क्षेत्र में स्थित यह चर्च अपनी पुरानी वास्तुकला, शांत वातावरण और औपनिवेशिक दौर की विरासत के लिए जाना जाता है. चर्च की इमारत और आसपास का प्राकृतिक वातावरण आज भी यहां आने वाले पर्यटकों को पुराने दौर की याद दिलाता है. देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरा यह स्थान फोटोग्राफी के लिए भी बेहद आकर्षक है.
नैनीताल का राजभवन शहर की सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है. ब्रिटिश दौर में बने इस भवन की वास्तुकला में गौथिक शैली की स्पष्ट झलक दिखाई देती है. इस विशाल परिसर, हरियाली और पुराने स्थापत्य का मेल इसे खास बनाता है. यहां का गोल्फ कोर्स भी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है. यह इमारत इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस से मेल खाती है.
नैनीताल का गर्नी हाउस इतिहास और रोमांच की एक अलग कहानी अपने भीतर समेटे हुए है. यह ऐतिहासिक भवन प्रसिद्ध शिकारी और लेखक जिम कॉर्बेट से जुड़ा रहा है. कॉर्बेट ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण दौर नैनीताल में बिताया और यह घर उनकी यादों से जुड़ा हुआ है. शांत वातावरण और पुराने पहाड़ी परिवेश के बीच अयार पाटा की पहाड़ी पर स्थित गर्नी हाउस आज भी पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां पहुंचकर नैनीताल के उस दौर की कल्पना की जा सकती है, जब अंग्रेज यहां गर्मियों में आया करते थे.
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नैनीताल का बैंड स्टैंड झील किनारे स्थित उन जगहों में शामिल है, जो शहर के पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की याद दिलाती है. ब्रिटिश दौर में यहां संगीत कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजन हुआ करते थे. नैनी झील के किनारे स्थित यह बैंड हाउस अंग्रेजों के जमाने में मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करता था. आज भी यहां खड़े होकर पर्यटक नैनीताल के पुराने दौर की कल्पना कर सकते हैं. झील के किनारे तस्वीरें खिंचवाने और शहर की ऐतिहासिक फिजा को महसूस करने के लिए यह जगह बेहद आकर्षक है.
नैनीताल का ऑल सेंट्स कॉलेज अपनी शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ शानदार ऐतिहासिक वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है. इसकी इमारत में गोथिक शैली की खूबसूरत झलक दिखाई देती है. ऊंची संरचनाएं, पुराने स्थापत्य तत्व और पहाड़ों के बीच इसका स्थान इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं. ब्रिटिश काल में विकसित नैनीताल की शैक्षिक विरासत को समझने के लिए यह संस्थान महत्वपूर्ण माना जाता है. इसकी पुरानी इमारत आज भी शहर के औपनिवेशिक अतीत की कहानी बताती हैं.
नैनीताल का बैंड स्टैंड झील किनारे का स्थान उन जगहों में शामिल है, जो शहर के पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की याद दिलाती हैं. ब्रिटिश दौर में यहां संगीत कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजन हुआ करते थे. नैनी झील के किनारे स्थित यह बैंड हाउस अंग्रेजों के जमाने में मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करता था. आज भी यहां खड़े होकर पर्यटक नैनीताल के पुराने दौर की कल्पना कर सकते हैं. झील के किनारे तस्वीरें खिंचवाने और शहर की ऐतिहासिक फिजा को महसूस करने के लिए यह जगह बेहद आकर्षक है.
नैनीताल की पाइंस सीमेट्री शहर के शांत और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है. चीड़ के पेड़ों के बीच स्थित यह कब्रिस्तान ब्रिटिश काल से जुड़ी कई पुरानी स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है. यहां मौजूद कब्रें उस दौर में नैनीताल में रहने वाले लोगों और यहां आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों के इतिहास की झलक देते हैं. शांत वातावरण इसे अन्य जगहों से बिल्कुल अलग बनाता है. इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह नैनीताल के औपनिवेशिक अतीत को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.
नैनीताल घूमना सिर्फ नैनी झील, मॉल रोड और खूबसूरत पहाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक इमारतों और विरासत स्थलों को देखकर इसकी एक अलग तस्वीर सामने आती है. सेंट जॉन्स चर्च से लेकर राजभवन, गर्नी हाउस, ऑल सेंट्स कॉलेज, बैंड स्टैंड और पाइंस सीमेट्री तक कई जगहें आज भी ब्रिटिश दौर की यादों को संजोए हुए हैं. मानसून में जब पहाड़ हरियाली से ढक जाते हैं, तब इन ऐतिहासिक स्थलों की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है.



