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असम हरे-भरे जंगलों और पहाड़ी नजारों के लिए पूरे देश में मशहूर है. यहां की वादियां और शांत वातावरण हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. लेकिन इसी खूबसूरत राज्य में एक ऐसा गांव भी है, जो एक अनोखे और रहस्यमय कारण से चर्चा में रहता है. इस गांव का नाम जतिंगा है, जिसे लोग अक्सर “पक्षियों का सुसाइड पॉइंट” कहते हैं. यह नाम सुनकर ऐसा लगता है मानो यहां पक्षी खुद अपनी जान दे देते हों, लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है. आइए जानते हैं असम के इस अनोखे गांव के बारे में विस्तार से
वर्षों से इस गांव में पक्षियों की असामान्य मौतों की घटनाएं देखी जाती रही हैं, जिसके कारण यह जगह वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी रहस्य या अलौकिक शक्ति का मामला नहीं, बल्कि मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों का परिणाम है. असम के बोरैल हिल्स क्षेत्र में स्थित जतिंगा गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ पक्षियों से जुड़ी इस अनोखी घटना के लिए प्रसिद्ध है. यह गांव घने जंगलों, हरी-भरी पहाड़ियों और बादलों से घिरे शांत वातावरण के बीच बसा हुआ है. यहां स्थानीय पक्षियों के अलावा प्रवासी पक्षी भी बड़ी संख्या में आते हैं.
जतिंगा को “बर्ड सुसाइड पॉइंट” कहने के पीछे एक खास वजह है. दरअसल, यहां पक्षी आत्महत्या नहीं करते. स्थानीय लोगों और पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मौसम, घना कोहरा और अंधेरी रातें पक्षियों को भ्रमित कर देती हैं. उड़ान के दौरान उन्हें दिशा का सही अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे वे पेड़ों, बिजली के खंभों या इमारतों से टकरा जाते हैं. कई बार इसी वजह से उनकी मौत हो जाती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना मुख्य रूप से सितंबर और अक्टूबर के महीनों में ज्यादा देखने को मिलती है. इस दौरान मौसम में नमी अधिक होती है और कोहरा भी छाया रहता है. खासकर शाम और रात के समय पक्षियों के भटकने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.
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जतिंगा गांव गुवाहाटी से करीब 330 किलोमीटर दूर स्थित है. यहां मुख्य रूप से खासी समुदाय के लोग रहते हैं. यह जगह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो शहर की भीड़-भाड़ से दूर शांति और प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं.



