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लॉरेंस बिश्नोई का नाम पिछले कुछ सालों में देश के सबसे चर्चित गैंग और बड़े आपराधिक मामलों से जुड़ता रहा है. लेकिन जेल में रहने के बावजूद उसका नेटवर्क कैसे काम करता है? इस गैंग की ताकत क्या है और इसके बड़े चेहरे कौन हैं? गोल्डी बराड़, अनमोल बिश्नोई और रोहित गोदारा जैसे अपराधी किस तरह इस नेटवर्क में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं, जैसे तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए पढि़ए पूरी खबर.
कहते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई ने जेल को ही अपना हेडक्वार्टर बना लिया है.
गैंग्स ऑफ दिल्ली: पहले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे पंजाब के एक गांव से निकला लॉरेंस बिश्नोई कॉलेज की राजनीति के दौरान अपराध की दुनिया में पहुंचा. लेकिन किसी भी शख्स के लिए अकेले इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा करना आसान नहीं होता. पुलिस और जांच एजेंसियों की मानें तो लॉरेंस की असली ताकत सिर्फ उसका नाम नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों में फैले उसके लोग और छोटे-छोटे मॉड्यूल हैं. यही वजह है कि कई सालों से जेल में रहने के बावजूद उसका नाम लगातार बड़े मामलों में सामने आता रहा है.
पुलिस के अनुसार, लॉरेंस के नेटवर्क का असल फैलाव उसके जेल में रहने के दौरान हुआ. आपको लगता होगा कि जेल जाने के बाद किसी अपराधी की आपराधिक गतिविधियां रुक जाती होंगी, लेकिन कई बार जेल अपराधियों के मिलने का सबसे बड़ा अड्डा बन जाती है. जेल में रहने के दौरान लॉरेंस की अलग-अलग राज्यों से आए अपराधियों से पहचान हुई. इसी पहचान के जरिए उसने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इंट्री ली. यहीं से उसका नेटवर्क राज्यों की सीमाओं को छोड़ शहर दर शहर फैलता गया.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग की सबसे खास बात इसका मॉड्यूल सिस्टम है. यानी पूरा नेटवर्क एक जगह से नहीं चलता, बल्कि अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे ग्रुप्स बनाए गए हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि इन मॉड्यूल में शामिल अपराधी एक-दूसरे को नहीं जानते. इससे अगर किसी एक मॉड्यूल पर कार्रवाई हो जाए तो बाकी नेटवर्क पर उसका असर नहीं पड़ता है.
कौन हैं लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खास चेहरे
- गोल्डी बराड़: लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क में सबसे बड़ा नाम सतिंदरजीत सिंह का है, जिसे दुनिया अब गोल्डी बराड के नाम से जानती है. पंजाब के फरीदकोट संबंध रखने वाले गोल्डी बराड भारत ने डिजाइनेटेड टेररिस्ट घोषित किया है. बताया जाता है कि 2017 में वह स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था और अब वह अमेरिका में रह रहा है. गोल्डी बराड ने 2023 में कनाडा में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और मई 2022 में हुई सिद्धू मूसेवाला की हत्या की सोशल मीडिया के जरिए जिम्मेदारी ली थी. उसके नाम से दिल्ली के एक रेस्टोरेंट मालिक से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने, ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी का भी आरोप है. एफबीआई ने उसके खिलाफ 50,000 डॉलर का इनाम घोषित किया है. बताया जाता है कि लंबे समय तक लॉरेंस बिश्नोई गिरोह में रहने के बाद 2025 में उसने ‘रोहित गोदारा और काला जठेरी’ नाम से अगल गिरोह बना लिया है.
- अनमोल बिश्नोई: लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को हाल ही में अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है. पहली बार 2012 में उसका नाम हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले में सामने आया था. उसकी पहली गिरफ्तारी 2017 में जोधपुर के एक कारोबारी से वसूली और फायरिंग के मामले में हुई थी. 2022 में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद वह फर्जी पासपोर्ट के जरिए जयपुर से दुबई भाग गया था. वहां से वह केन्या के रास्ते अमेरिका पहुंचा था. सूत्रों के अनुसार, अनमोल बिश्नोई पर भारत में 31 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें राजस्थान में 20 से अधिक मामले शामिल हैं. अक्टूबर 2024 में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में उसका नाम मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर सामने आया था. सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में हथियार और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने का आरोप भी अनमोल के सिर है.
- रोहित गोदारा: रोहित गोदारा लॉरेंस बिश्नोई गैंग की अहम कड़ी है. कभी मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाला रोहित मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला है. फिलहाल वह विदेश से अपना नेटवर्क ऑपरेट करता है. पुलिस के अनुसार, रोहित गोदारा ने 2010 में अपराध की दुनिया में इंट्री ली थी. अबतक उसके खिलाफ 30 से अधिक आपराधिक मामलों में नामजद है, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली और डकैती जैसी वारदातें शामिल हैं. पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला और कर्णी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी रोहित गोदाना ने ली थी. अप्रैल 2024 में सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग में भी उसका नाम आया था.
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सोशल मीडिया और रंगदारी के रुपयों से पल रहा है यह गिरोह
सूत्रों के अनुसार, किसी भी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क को चलाने के लिए लगातार रुपयों की जरूरत होती है. इस गिरोह के रुपयों का सबसे बड़ा सोर्स फिरौती है, जो कारोबारियों को धमकाकर ली जाती है. कई मामलों में विवादित प्रॉपर्टी को सुलझाने के नाम पर भी मोटी रकम वसूली गई है. इसके अलावा, हथियारों की तस्करी के जरिए भी यह गिरोह अपनी रुपयों की जरूरतें पूरी करता आया है. सूत्रों की माने तो इस गिरोह के काम करने का तरीका भी परंपरागत नहीं है. पहले अपराधी आमतौर पर फोन कॉल या सामने से आकर धमकी देकर जाते थे. लेकिन यह गिरोह शुरू से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, इंटरनेट कॉलिंग सहित दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करता आया है. वहीं, सोशल मीडिया ने इस गिरोह को सबसे अधिक फलने फूलने का मौका दिया है. सोशल मीडिया के जरिए इस गिरोह ने शहर दर शहर अपना नाम पहुंचाया और अपने नाम की दहशत पैदा की.
जेल में रहते हुए भी कैसे वारदातों को दे रहे हैं अंजाम?
अक्सर सवाल उठता है कि अगर लॉरेंस बिश्नोई कई वर्षों से जेल में है, तो उसका नाम नए मामलों में कैसे सामने आता है? इस सवाल पर जांच एजेंसियों का जवाब है कि किसी ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क के ऑपरेशन के लिए सरगना का जमीन पर रहना जरूरी नहीं होता है. गैंग के अलग-अलग अपराधी और उनके मददगार अपने-अपने स्तर पर काम करते हैं. सूत्रों की माने तो पेशी या पैरोल के लिए निकलने वाले अपराधियों के जरिए ऐसे गिरोह अपने मैसेज जेल से बाहर पहुंचाते हैं और उन्हीं के जरिए ये मैसेज वापस इन तक पहुंचते हैं. ऐसे में इसने जेल में मिलने वालों पर कितनी भी निगरानी रख लें, ये आपका काम करके निकल जाते हैं.
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सलमान खान को मिली धमकियां, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और दूसरे गैंगों से लॉरेंस की गैंगवार जानने के लिए इंतजार कीजएि गैंग्स ऑफ दिल्ली की अगली कड़ी का.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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