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Employment: अर्थव्यवस्था में कामगारों की बढ़ी भागीदारी, जुलाई में गिरकर 5.1% पर आई देश की बेरोजगारी दर


भारतीय अर्थव्यवस्था और जॉब मार्केट के लिए राहत भरी खबर है। देश में कामगारों की भागीदारी बढ़ने के साथ ही बेरोजगारी की दर में गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा सोमवार को जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल बेरोजगारी दर जुलाई में घटकर 5.1 प्रतिशत पर आ गई है, जो जून में 5.5 प्रतिशत थी। यह सुधार दर्शाता है कि श्रम बाजार की सेहत मजबूत हो रही है और अधिक लोगों को काम मिल रहा है।

जुलाई के सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी को लेकर क्या बदलाव दिखे?

एनएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सकारात्मक सुधार की अगुवाई ग्रामीण इलाकों ने की। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जून के 5.0 प्रतिशत से गिरकर जुलाई में 4.5 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि, शहरी इलाकों में स्थिति लगभग स्थिर रही, जहां बेरोजगारी दर पिछले महीने के 6.6 प्रतिशत की तुलना में मामूली बढ़कर 6.7 प्रतिशत दर्ज की गई। अगर सालाना आधार (जुलाई 2025 से जुलाई 2026) पर तुलना करें, तो शहरी बेरोजगारी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो पिछले साल 7.2 प्रतिशत थी।

क्या श्रम भागीदारी (LFPR) में भी कोई बड़ा सुधार हुआ है?

हां, बेरोजगारी दर में गिरावट के साथ-साथ लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) यानी श्रम बल भागीदारी दर में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई है:


  • कुल भागीदारी: देश का कुल एलएफपीआर (LFPR) जून के 54.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 55.4 प्रतिशत हो गया।

  • ग्रामीण भागीदारी: ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 1.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी के साथ 58.0 प्रतिशत पर पहुंच गई।

  • शहरी भागीदारी: शहरी क्षेत्रों का एलएफपीआर भी जून के 50.1 प्रतिशत से सुधरकर 50.4 प्रतिशत पर आ गया।

कामकाजी महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं?

श्रम बाजार में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी आंकड़ों का सबसे सकारात्मक पहलू है। कुल महिला श्रम बल भागीदारी (एलईपीआर) जून के 32.7 प्रतिशत से उछलकर जुलाई में 34.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की भागीदारी 36.6 प्रतिशत से बढ़कर 38.8 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंशिक सुधार के साथ 25.3 प्रतिशत रही। वहीं, ग्रामीण महिला कार्य जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) में 2.5 प्रतिशत अंक का बड़ा उछाल देखा गया, जो बढ़कर 37.2 प्रतिशत हो गया।

पुरुषों की रोजगार स्थिति और शहरी महिलाओं के लिए क्या हैं चुनौतियां?

पुरुषों के मामले में, कुल बेरोजगारी दर जून के 5.3 प्रतिशत से घटकर 5.0 प्रतिशत रह गई। ग्रामीण पुरुषों के लिए यह दर जून के 4.9 प्रतिशत से कम होकर 4.6 प्रतिशत पर आ गई। शहरी पुरुषों के लिए बेरोजगारी दर मासिक आधार पर स्थिर रही, लेकिन पिछले साल (6.6%) की तुलना में यह गिरकर 5.9% पर आ गई है। हालांकि, शहरी महिलाओं के लिए चुनौती बरकरार है, क्योंकि शहरी महिला बेरोजगारी दर जून के 8.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 8.8 प्रतिशत हो गई। यह रिपोर्ट देश भर के 3,71,021 लोगों (2,11,411 ग्रामीण और 1,59,610 शहरी) के सर्वेक्षण पर आधारित है।

इस आर्थिक सुधार के दीर्घकालिक निहितार्थ क्या हो सकते हैं?

श्रम बल भागीदारी (एलएफपीआर) और कामगार जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) में एक साथ बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था में नए रोजगार पैदा हो रहे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में आ रही यह तेजी कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों में मजबूती का संकेत है। हालांकि, शहरी महिलाओं में बढ़ती बेरोजगारी और स्थिर शहरी श्रम बाजार यह चेतावनी देते हैं कि नीति निर्माताओं को आने वाले समय में शहरी कौशल विकास और महिला-अनुकूल रोजगार अवसरों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।



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