Gangs Of Delhi: कबड्डी… कबड्डी… कबड्डी… करीब 14 साल का एक लड़का अपनी सांस थामकर सामने खड़ी टीम को अपने हाथ की थाप देने की कोशिश कर रहा है. तभी पीछे से आवाज आती है… ओ हिमांशु, अब बस कर रे, स्कूल ना जाणा के? इस आवाज कबड्डी में खेल में खो चुके हिमांशु की मां की थी. अपनी मां की आवाज सुन हिमांशु हल्के से मुस्कुराया और घर की तरफ चल पड़ा. इसी बीच अपने बेटे के ऊंचे कद, रौबेले अंदाज को देखकर मां के जहन में एक ही बात आती है… भगवान इसने किसी की नजर ना लागण दे. लेकिन, उस मां को क्या पता था कि उसके इस बेटे को नजर तो लग चुकी है. नजर किसी और की नहीं, बल्कि उसके अपने शौकी चाचा की.
हिमांशु के इस शौकी चाचा का अपराध की दुनिया से पुराना नाता था. हत्या, हत्या की कोशिश, लूट और फिरौती जैसे कई मामले उसके खिलाफ दर्ज थे. हरियाणा जेल में बंद उसका शौकी चाचा अक्सर पैरोल पर हिमांशु से मिलने गांव आता जाता था. गांव में शौकी के खौफ का दबदबा ऐसा था कि ज्यादातर लोग इस परिवार के आगे आने से बचते थे. खौफ का यही दबदबा हिमांशु को अपराध की दुनिया की तरफ खींचने लगा था. फिर वही हुआ, जिसका डर था. हिमांशु पहले गांव में होने वाले तमाम झगड़ों, फिर शराब के कारोबार को लेकर होने वाली मारपीट में दिखना शुरू हो गया. उम्र की 15वीं की दहलीज पर पहुंच चुके हिमांशु का पुलिस से पहला राफ्ता 2018 में हुआ.
गांव में शराब के कारोबार को लेकर हुई मारपीट के मामले में उसके खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की गई. यहीं से हिमांशु ने पुलिस के रिकॉर्ड के साथ अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था. जैसे जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे उसकी आपराधिक गतिविधियां बढ़ती गईं. 2020 आते-आते उसके खिलाफ हत्या की कोशिश का भी एक मामला दर्ज हो चुका था. दरअसल, एक कार को लेकर हिमांशु का उसके दोस्त अंकित के साथ झगड़ा हो गया था. यह झगड़ा यहां तक पहुंच गया कि हिमांशु ने हत्या के इरादे से अंकित के भाई सनी पर गोली चला दी. इस वारदात में सनी की जान तो बच गई, लेकिन कबड्डी के उभरते सितारे हिमांशु ने अपराध की दुनिया में मजबूत कर रख दिया था. इसी मामले में उसे पकड़कर हिसार के बाल सुधार गृह भेज दिया गया.
फिर पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाई…
यह बात 12 अक्टूबर 2020 की है. शाम के करीब 6 बजे रहे होंगे. अचानक पूरा जुवेनाइल होम चीख पुकार से गूंजने लगता है. इन्हीं आवाजों को सुनने के बाद असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट भागे-भागे मौके पर पहुंचते हैं. सामने का नजारा बेहद भयावह था. ड्यूटी पर तैनात तीन वार्डन दर्द से करार रहे थे. तीनों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी. वहां लगे सभी टेलीफोन के तार काट दिए गए थे. बच्चों ने वॉर्डन का मोबाइल भी छीन लिया था. पड़ताल थोड़ी और आगे बढ़ी तो पता चला कि विभिन्न आपराधिक मामलों के चलते जुवेनाइल होम भेजे गए 20 बच्चे फरार हो गए है. फरार होने वाले बच्चों में साहिल और उसका रिश्तेदार साहिल भी शामिल था. स्थानीय पुलिस की मदद से 20 में 18 बच्चों को फिर पकड़ लिया गया, लेकिन हिमांशु और साहिल पुलिस की गिरफ्त से बचने में कामयाब रहे. इसके बाद, तब से लेकर आज तक हिमांशु कभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया.
हिमांशु को मिली दिल्ली के गैंगस्टर का साथ
जुवेनाइल होम से फरार होने से पहले हिमांशु ने अपने भविष्य की रेखा खुद से खींच ली थी. अपनी फरारी से पहले उसने तय कर लिया था कि आगे क्या करना है. इस प्लान को अंजाम देते हुए उसने दिल्ली के बड़े गैंगस्टर्स के गैंग में शामिल होने की कोशिश शुरू कर दी. किसी तरह वह दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना के साथ नवीन बाली तक पहुंचने में कामयाब हो गया. उस समय दिल्ली में नीरज बवाना गैंग का अच्छा खासा दबदबा था. नीरज बवाना उस समय तिहाड़ जेल में कैद था. बाली से मुलाकात के बाद हिमांशु ने नीरज बवाना से मिलने की इच्छा जाहिर कर दी. चूंकि नीरज बवाना उस समय आइसोलेशन सेल में था, लिहाजा नवीन हिमांशु की मुलाकात नीरज से नहीं करा पाया.
पहले साबित को वफादारी, फिर होगी मुलाकात
नीरज बवाना से मुलाकात के लिए बार-बार जिद करने पर नवीन बाली ने हिमांशु को पहले अपनी वफादारी साबित करने के लिए कहा. वफादारी साबित करने के लिए उसे अशोक प्रधान गैंग के तीन लोगों की हत्या करनी थी. हिमांशु ने बाली के साथियों की मदद से इस काम को अंजाम दिया. हालांकि बाद में नीरज बवाना ने पूछताछ के दौरान हिमांशु से सीधा संबंध होने की बात से इंकार किया. बवाना का दावा था कि वह आइसोलेशन सेल में बंद था, लिहाजा उसे हिमांशु की गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. वहीं, नवीन बाली ने पुलिस को बताया कि कुछ ही समय बाद हिमांशु ने साहिल और योगेश कादियान उर्फ बॉबी के साथ मिलकर अपना अलग गैंग बना लिया था.
एक साल तक डेरा डाले रही पुलिस, लेकिन…
समय के साथ हिमांशु के पैर अपराध की दुनिया में मजबूत होते चले गए. अगस्त 2022 तक उसके खिलाफ सिर्फ रोहतक के शिवाजी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में हत्या समेत 12 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे. इसी बीच, गांव में शराब के कारोबार को लेकर उसके परिवार की गांव में रहने वाले दूसरे परिवार से दुश्मनी बढ़ती चली गई. 2022 में इसी दुश्मनी के चलते हुई गोलीबारी में दो लोगों की हत्या कर दी गई. बदला लेने के लिए हिमांशु ने विरोध गुट के एक बस ड्राइवर की हत्या कर दी. इस वारदात के बाद हरियाणा पुलिस ने हिमांशु की गिरफ्तारी के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी. पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए रिताउली में बाकायदा डेरा डाल दिया. जगह-जगह पर बैरिकेड्स लगाए गए. आने-जाने वाली गाड़ियों की तलाशी ली गई. घरों में छापेमारी भी हुई. लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया.
बनाया अपना नया गैंग और ‘भाऊ’ बना हिमांशु
हिमांशु का नाम अब सिर्फ रिताउली या रोहतक तक सीमित नहीं था. उसने अपने रिश्तेदार साहिल के साथ मिलकर अपना नया गैंग बना लिया. यही से हिमांशु अब ‘हिमांशु भाऊ’ बन गया. उसने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में बड़ी तेजी से अपना नेटवर्क तैयार किया. उसके एक इशारे पर फिरौती वसूलने के साथ हत्या की वारदातों को अंजाम दिया जाने लगा. देखते ही देखते 21 साल के हिमांशु के खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हो गए. इनमें अधिकतर मामले या तो हत्या के थे, या फिर हत्या के प्रयास के थे. इन हत्याओं के साथ हिमांशु का नाम दिल्ली पुलिस की मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर्स की लिस्ट में भी शामिल हो गया. दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये और हरियाणा में डेढ़ लाख रुपये का इनाम घोषित किया.
बरेली से बनवाया पासपोर्ट और भाग निकला पुर्तगाल
हिमांशु को अंदाजा हो चुका था कि अब उसके लिए भारत में रहना मुश्किल होता जा रहा है. अगस्त 2022 में लुकआउट सर्कुलर जारी होने से पहले उसने फर्जी दस्तावेजों के मदद से अपना पासपोर्ट बनवा लिया. यह पासपोर्ट बरेली से बनवाया गया था. पासपोर्ट मिलते ही हिमांशु पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंचा और वहां से डंकी रूट से यूरोप चला गया. उसके पीछे उसका रिश्तेदार साहिल भी विदेश पहुंच गया. इसके बाद, दोनों ने पुर्तगाल को अपनी पनाहगाह बनाया और वहीं से अपने गैंग को चलाने लगे. पुर्तगाल से ही हिमांशु ने दिल्ली के राजौरी गार्डन में एक बर्गर फ्रैंचाइजी के अंदर फायरिंग करवाई. इस फायरिंग में एक शख्स की जान गई. वारदात के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर हिमांशु ने पोस्ट कर इस हत्या की जिम्मेदारी ली.
अगस्त 2023 में इंटरपोल ने जारी किया रेड नोटिस
अगस्त 2023 तक हिमांशु का नाम दिल्ली और हरियाणा पुलिस के साथ-साथ एनआईए की लिस्ट में भी पहुंच गया था. दरअसल, एनआईए ने विदेश में बैठे गैंगस्टर्स और आतंकवादी नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर अपनी जांच शुरू की थी. इसी जांच के दौरान हिमांशु का नाम आतंकी अर्शदीप डल्ला और बंबीहा गैंग के मददगारों के तौर पर सामने आया. एनआईए की पहल पर इंटरपोल ने हिमांशु के खिलाफ रेड आउट नोटिस अगस्त 2023 में जारी किया था. अब हिमांशु और उसके कुछ साथियों को विदेश से भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रहीं हैं.



