दिल्ली पुलिस ने फरीदाबाद के रहने वाले डॉ. मनीष शर्मा को गिरफ्तार किया है। डॉक्टर मनीष पर नकली और बिना मंजूरी वाली एंटी-कैंसर और दूसरी जीवन रक्षक दवाओं की तस्करी करने का आरोप है। आरोपी डॉक्टर ने रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई की है।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने कैंसर की नकली और प्रतिबंधित विदेशी दवाओं की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई कर वापस लौटे फरीदाबाद के रहने वाले 39 वर्षीय डॉ. मनीष शर्मा को गिरफ्तार किया है।
डॉ. मनीष शर्मा के पास से ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बरामद हुई हैं। पुलिस के अनुसार, ये दवाएं भारत में बिक्री के लिए डीसीजीआई और सीडीएससीओ से स्वीकृत नहीं थीं।
दिल्ली पुलिस ने सुखदेव विहार में घेराबंदी कर होंडा सिटी कार से जा रहे आरोपी को पकड़ा। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी के पास से बरामद हुई सभी दवाएं जापान और अमेरिका की कंपनियों के नाम पर थीं, लेकिन उनकी जाली खेप तुर्किये में तैयार कर अवैध चैनलों के जरिये भारत लाई जा रही थी।
दवा बिक्री को पत्नी के पते पर बनाई फर्जी फर्म
रूस से एमबीबीएस करने वाला मनीष 2014 में भारत लौटने के बाद एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर सका। शॉर्टकट से अमीर बनने की चाहत में उसने फरीदाबाद की जवाहर कॉलोनी में ‘केएमसी हॉस्पिटल’ खोल लिया। साल 2023 में शादी के बाद उसने सोहना में इसकी एक और ब्रांच खोल दी और कमीशन पर फ्रीलांसर डॉक्टरों को रख लिया। पत्नी के पते पर फर्जी फर्म बनाकर इंडियामार्ट पर लाइफ सेविंग दवाओं का थोक विक्रेता बन गया। पुलिस के मुताबिक, 80 से 90% मुनाफे के लालच में वह मरीजों को नकली दवाएं असली कीमत पर बेच रहा था।
डॉक्टर से जब्त दवाएं
1. इक्लुसिग टैबलेट के चार पैकेट : भारत में प्रतिबंधित यह दवा एडवांस्ड ल्यूकेमिया यानी घातक ब्लड कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती है। अमेरिका में इसके एक बॉक्स की कीमत करीब 17 हजार डॉलर यानी लगभग 17 लाख रुपये है। यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने वाली बेहद महंगी दवा है।
2. ह्यूमन एल्ब्यूमिन सॉल्यूशन : पूरी खेप तुर्किये की बताई गई है, जिसे बिना कस्टम ड्यूटी और मेडिकल क्लियरेंस के भारत लाया गया। भारत में वैध माध्यम से उपलब्ध इसके एक बॉक्स की कीमत करीब 5,800 रुपये है। यह गंभीर मरीजों में ब्लड वॉल्यूम बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला लाइफ-सेविंग प्लाज्मा वॉल्यूम एक्सपेंडर है।
3. डार्जेलेक्स के दो बॉक्स : यह दवा भी तुर्किये से अवैध तरीके से लाई गई थी। भारत में अधिकृत आयात वाले इसके एक वायल की कीमत करीब 2.27 लाख रुपये है। यह मल्टीपल मायलोमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली लक्षित एंटीबॉडी थेरेपी है।



