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मंजूरी में मिलेगी छूट: सेमीकंडक्टर फैक्टरी लगाना होगा आसान, जापान दौरे पर पीयूष गोयल की बड़ी घोषणाएं क्या?


जापानी कंपनियों के लिए भारत में सेमीकंडक्टर जैसे हाईटेक कारखाने लगाना अब पहले से आसान होने जा रहा है। विदेश से मंगाई जाने वाली खास मशीनों और उपकरणों के लिए जहां बीआईएस मानक लागू हैं, वहां प्रमाणन में लगने वाला समय घटाने के लिए सरकार नया ढांचा तैयार कर रही है।

इसके तहत उद्योग, कंपनी, उत्पाद या किसी खास परियोजना के स्तर पर छूट देने का विकल्प रखा जाएगा। यह एलान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में जापानी उद्योगपतियों के सामने किया। उन्होंने बताया कि बीआईएस और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को इस पर काम शुरू करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।

 

उद्योग से लेकर परियोजना तक के स्तर पर मिलेगी राहत, आयात पर निर्भरता घटाने में मदद की उम्मीद

वक्त बचा तो पैसा बचा

असल फायदा वक्त का है और वक्त का सीधा मतलब पैसा है। सेमीकंडक्टर का एक कारखाना अरबों डॉलर का होता है और उसमें लगने वाली मशीनें एक तय क्रम में आती हैं। एक जरूरी मशीन की मंजूरी या आपूर्ति अटकती है तो पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और कारखाना शुरू होने की तारीख आगे खिसक सकती है। कारखाना समय पर चालू हुआ तो निर्माण के दौर की नौकरियों से लेकर संयंत्र चलाने वाले इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों तक रोजगार के अवसर भी जल्दी बनेंगे। सबसे अहम, भारत में चिप का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने में मदद मिलेगी।

150 अरब डॉलर की मांग इसलिए जापान अहम

भारत में सेमीकंडक्टर की मांग 2032 तक बढ़कर करीब 150 अरब डॉलर होने का अनुमान है। यानी आने वाले वर्षों में दुनिया के बड़े सेमीकंडक्टर बाजारों में भी शामिल होने जा रहा है। यही वजह है कि सरकार जापान को सिर्फ निवेशक ही नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति शृंखला के साझेदार के तौर पर देख रही है।

भारत को फायदा

इससे भारत की कारोबारी साख बनेगी। साथ ही सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रस्तावित छूट केवल तैयार उत्पादों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि भारत में सेमीकंडक्टर मशीनरी, उपकरण, सामग्री और दूसरे जरूरी कलपुर्जों को विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।

सेमीकॉन मिशन को रफ्तार

सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में बड़े निवेश के लिए सेमीकॉन 1.0 और सेमीकॉन 2.0 के जरिए प्रोत्साहन दे रही है। सेमीकॉन 1.0 के तहत अब तक 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी मिली है और इनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। सेमीकॉन 2.0 के लिए सरकार ने करीब 1.275 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय रखा है।

गुजरात में गोल्फ कोर्स तक का वादा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों से जो वादा किया, वह कारखानों से आगे का था। उन्होंने भरोसा दिया कि गुजरात में काम करने वाले जापानी कर्मचारियों को घर से दूर होने का अहसास नहीं होगा। धोलेरा और साणंद के आसपास स्कूल, आवास, अस्पताल विकसित करने की बात कही। उनके गोल्फ कोर्स का जिक्र करते ही सभागार तालियों से गूंज उठा। गोयल ने कहा कि मकसद जापानी कर्मचारियों को भारत में ऐसा सामाजिक माहौल देना है, जिसमें वे सहज महसूस करें।

भारत-जापान अफ्रीका के बाजार में साथ उतरेंगे चीनी निवेश पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी

भारत और जापान अब अपने आर्थिक सहयोग को द्विपक्षीय व्यापार से आगे ले जाकर अफ्रीकी बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। दोनों देश दक्षिण अफ्रीका समेत अफ्रीकी देशों में मिलकर निवेश और निर्यात बढ़ाने के अवसर तलाशेंगे। फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका ने जापानी उद्योग जगत के साथ बैठकों के बाद कहा कि महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के संयुक्त प्रयास का अहम क्षेत्र हो सकता है। गोयनका ने कहा कि जापान की अपनी मजबूत अनुसंधान एवं विकास क्षमता है। ऐसे में दोनों देश मिलकर अफ्रीका में ज्यादा निवेश कर सकते हैं। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति कुछ ही देशों तक सीमित है और कई मामलों में इन पर चंद देशों का नियंत्रण है।

चीनी निवेश पर सतर्क

चीनी निवेश के सवाल पर गोयनका ने कहा कि दुनिया के कई देशों में चीनी उत्पादों के बड़े पैमाने पर प्रवेश का अनुभव सामने आया है। निवेश के नियम और सब्सिडी सभी देशों में समान नहीं हैं, इसलिए निवेश पर उचित निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक स्तर पर चीन से आने वाले निवेश से भारत को सुरक्षा की जरूरत है।



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