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Motilal Oswal: दावा- भारतीय बैंक एक दशक के सर्वश्रेष्ठ दौर में, क्या अब कर्ज लेना होगा आसान?


भारतीय बैंक पिछले एक दशक के अपने सबसे अच्छे दौर में हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने यह जानकारी दी है। कंपनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही। गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। बैंकों की बैलेंस शीट भी मजबूत पूंजी बफर से सुदृढ़ हुई है।

वित्तीय सेवा कंपनी ने बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार को रेखांकित किया। उसने स्वच्छ बैलेंस शीट और मजबूत बुनियादी बातों को भारतीय बैंकों के लिए प्रमुख सहायक कारक बताया। मोतीलाल ओसवाल ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारतीय बैंक एक दशक के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं। एनपीए ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं। यह मूल्यांकन बैंकिंग प्रणाली में संपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार की पृष्ठभूमि में आया है।

हालिया बैंकिंग क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां मार्च 2026 में करीब 1.8 फीसदी के बहु-दशकीय निचले स्तर पर आ गया। शुद्ध एनपीए लगभग 0.4 फीसदी रहा। पूंजी पर्याप्तता भी आरामदायक बनी हुई है।

क्या बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है?

बैंकिंग क्षेत्र तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की लंबे समय तक सफाई और बैलेंस शीट की मरम्मत के बाद मजबूत होकर उभरा है। संपत्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ मजबूत लाभप्रदता भी आई है। पर्याप्त पूंजी ने बैंकों को कर्ज वृद्धि का समर्थन करने के लिए अधिक क्षमता प्रदान की है। मोतीलाल ओसवाल के अवलोकन भारतीय बैंकिंग प्रणाली के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मूल्यांकन के अनुरूप हैं। केंद्रीय बैंक की नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट ने दर्शाया कि बैंक मजबूत पूंजी बफर के साथ लचीले बने हुए हैं। वे गंभीर तनाव परिदृश्यों का सामना करने में सक्षम हैं।

कर्ज के चक्र पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

मोतीलाल ओसवाल ने मजबूत बैंक बैलेंस शीट के व्यापक कर्ज के चक्र पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर भी इशारा किया है। एनपीए ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं। पूंजी की स्थिति स्वस्थ बनी हुई है। बैंक विवेकपूर्ण अंडरराइटिंग मानकों को बनाए रखते हुए कर्ज देने का विस्तार करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। संपत्ति गुणवत्ता में सुधार पिछले दशक के तनाव से एक तेज बदलाव को दर्शाता है। उस दौरान उच्च कॉर्पोरेट लीवरेज और बढ़ते खराब कर्ज ने बैंकों की लाभप्रदता पर दबाव डाला था। इससे कर्ज वृद्धि बाधित हुई थी।

क्या कर्ज वृद्धि में तेजी आई है?

कंपनी का आशावादी मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब कर्ज वृद्धि ने गति पकड़ ली है। 2025-26 के दौरान प्रणाली-व्यापी बैंक कर्ज वृद्धि सालाना आधार पर 14.5 फीसदी बढ़ी। जमा वृद्धि 11.5 फीसदी रही। यह जानकारी भारत की वित्तीय प्रणाली के हालिया मूल्यांकनों में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार है। मोतीलाल ओसवाल का विचार है कि बैंकिंग क्षेत्र बेहतर कर्ज चक्र का एक महत्वपूर्ण लाभार्थी बना रह सकता है। विशेष रूप से स्वस्थ कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और निरंतर आर्थिक गतिविधि कर्ज की मांग का समर्थन करती है।



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