भारतीय बाजार का सबसे भरोसेमंद माना जाने वाला एचडीएफसी समूह इस समय अपने इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दलाल स्ट्रीट पर यह धारणा लंबे समय से रही है कि चाहे बाजार में कोई भी आंधी आए, दिग्गज वित्तीय संस्थान सुरक्षित रहते हैं। लेकिन पिछले एक साल के प्रदर्शन ने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है।
पिछले 12 महीनों में समूह की चार प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों (एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी एएमसी और एचडीबी फाइनेंशियल) ने मिलकर निवेशकों के 4.38 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए हैं। देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक का शेयर बृहस्पतिवार को एनएसई पर 2.08 फीसदी गिरकर 712 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 710 का नया 52-सप्ताह का निचला स्तर भी छुआ। गिरावट के साथ बैंक का बाजार मूल्यांकन एक साल पहले के 15 लाख करोड़ से घटकर 10.95 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
साल 2026 में अब तक 28 फीसदी टूट चुका यह शेयर 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद से अपनी सबसे खराब वार्षिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है।
गिरावट की वजह
शेयरों में आई ताजा गिरावट की वजह अमेरिका में दर्ज हुआ एक सिक्योरिटीज फ्रॉड क्लास-एक्शन मुकदमा है। आरोप है कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से भारी जमा आकर्षित करने के लिए 2.51 फीसदी अधिक ब्याज की पेशकश की। बैंक ने इस तथ्य को छुपाया, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ।
किस कंपनी ने कराया कितना नुकसान
कंपनी 1 साल में गिरावट मार्केट कैप (करोड़ रुपये) दबाव का कारण
एचडीएफसी बैंक 28% 3,73,000 महंगा फंड, शुद्ध ब्याज मार्जिन पर दबाव
एचडीएफसी लाइफ 29% 47,261 बैंक चैनल से सुस्त बिक्री
एचडीएफसी एएमसी 7% 8,649 ऊंचा वैल्यूएशन, ऑपरेटिंग खर्च
एचडीबी फाइनेंशियल 13% 8,458 लोन ग्रोथ के बावजूद धीमा मुनाफा
कहां दबी हैं संकट की जड़ें?
एचडीएफसी समूह के शेयरों की इस दुर्गति के पीछे केवल एक अदालती मुकदमा नहीं, बल्कि 3 बुनियादी ढांचागत चुनौतियां हैं।
विलय का भारी बोझ : 2023 में पैरेंट हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के बैंक में विलय के बाद बैलेंस शीट तो विशालकाय हो गई, लेकिन बैंक के हाथ कम यील्ड वाले एसेट्स और महंगी देनदारियां आ गईं। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन गिरकर 3.26 फीसदी पर आ गया, जो मर्जर से पहले 4 फीसदी से ऊपर हुआ करता था। क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बिगड़ने से बैंक को महंगे जमा का सहारा लेना पड़ा।
सस्ता कासा जुटाने में नाकामी : रिटेल निवेशक अपना पैसा बैंक खातों में रखने के बजाय सीधे शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में झोंक रहे हैं। नतीजतन, बैंक के लिए सस्ती लागत वाले चालू व बचत खातों की वृद्धि ठंडी पड़ गई, जिससे मार्जिन सुधार में उम्मीद से दोगुना वक्त लग रहा है।
गवर्नेंस और लीडरशिप अनिश्चितता : पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने बोर्ड से इस्तीफा देते हुए कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। दुबई शाखा में बॉन्ड की कथित मिस सेलिंग भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं।
कंपनियों पर सख्ती
- एचडीएफसी लाइफ : बैंक शाखाओं से बीमा बिक्री सपाट। 5 लाख से अधिक के प्रीमियम पर टैक्स छूट हटने और नए सरेंडर-वैल्यू नियमों ने इंश्योरेंस मार्जिन को चोट पहुंचाई।
- एचडीएफसी एएमसी : ऊंचे वैल्यूएशन और बढ़ते खर्च ने मुनाफे की रफ्तार को थाम दिया।
- एचडीबी फाइनेंशियल : लोन बुक 19% की दर से बढ़ने के बाद भी क्रेडिट कॉस्ट अधिक रहने से शुद्ध मुनाफा 9% से ही बढ़ पाया।



