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दोस्त बने दुश्‍मन तो स्वाहा हुईं 25+ जिंदग‍ियां, मौत के बाद भी हत्‍याएं जारी, गैंगस्‍टर गोगी की फिल्मी है कहानी


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छात्रसंघ चुनाव और वर्चस्व की होड़ में गैंगस्‍टर जितेंद्र गोगी और टिल्‍लू ताजपुरिया के बीच हुई दुश्मनी ने 25 से अधिक लोगों की जान ले ली. दिल्‍ली-एनसीआर में आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्‍टर गोगी की 2021 में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. वकीलों के भेष में आए शूटरों ने वारदात को रोहिणी कोर्ट रूम के अंदर अंजाम दिया था. वहीं 2023 में तिहाड़ जेल के भीतर टिल्लू ताजपुरिया का मर्डर कराकर इस हत्‍या का बदला लिया गया. शामली में हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की हत्‍या ने पांच साल पहले मर चुके गोगी नाम एक बार फिर जिंदा कर दिया है. आज पढि़ए दोस्ती से शुरू होकर कोर्ट और जेल के खूनी खेल के रास्‍ते शामली हत्‍याकांड तक की पूरी दास्‍तान.

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गैंगस्‍ट जितेंद्र मान उर्फ की हत्‍या के बाद भी हत्‍याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

गैंग्‍स ऑफ दिल्‍ली. इस कहानी की शुरुआत बाहरी दिल्ली के दो पड़ोसी गांव अलीपुर और ताजपुर कलां से होती है. अलीपुर का जितेंद्र मान उर्फ गोगी और ताजपुर कलां का सुनील मान उर्फ टिल्लू एक ही बिरादरी से आते थे. खेल-कूद के शौकीन गोगी और टिल्‍लू ने स्पोर्ट्स कोटे के जरिए दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में दाखिला लिया था. गोगी वॉलीबॉल और एथलेटिक्स का बेहतरीन खिलाड़ी था, तो टिल्लू अखाड़े में कुश्ती के दांव-पेंच सीखकर पहलवान बनने के सपने देख रहा था. कॉलेज के शुरुआती सालों में इन दोनों की गिनती जिगरी यारों में हुआ करती थी.

दोनों के बीच ऐसा गजब का तालमेल था कि देखने वाले दोनों को सगे भाई से भी बढ़कर मानते थे. लेकिन, 2010 से 2013 के बीच कॉलेज छात्र संघ चुनाव में वर्चस्‍व की होड़ ने इनकी दोस्ती की बुनियाद को बुरी तरह से हिला दिया. कल तक जिगरी यार कहलाने वाले दोनो दोस्‍त अब जानी दुश्‍मन बन गए थे. दरअसल, इस चुनाव में गोगी का करीबी अरुण उर्फ कमांडो और टिल्‍लू का एक रिश्‍तेदार चुनाव लड़ रहे थे. दो अलग-अलग प्रत्‍याशियों के लिए अलग-अलग समर्थन दोस्‍ती में दरार की कारण बन गया. इसी बीच, टिल्‍लू गुट के लोगों ने अरुण उर्फ कमांडो की बेरहमी से पिटाई कर दी.

मामला यहीं पर खत्‍म नहीं हुआ, टिल्‍लू गुट ने अरुण पर ऐसा दबाव बनाया कि वह चुनाव से अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर हो गया. इस चुनाव में टिल्‍लू के रिश्‍तेदार की जीत हुई. इस जीत को गोगी ने अपने स्‍वाभिमान पर चोट माना और कॉलेज की कैंटीन से शुरू हुआ यह झगड़ा गहरी रंजिश में तब्‍दील हो गया. दोनों ने पढ़ाई पीछे छोड़ अपने-अपने गुट बना लिए और देखते ही देखते दिल्‍ली के कुख्‍यात गैंगेस्‍टर बन बैठे.

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जो दिखे गोली मार दो… दोनों गैंग के बीच शुरू हुई खूनी रंजिश

  1. गोगी का अपराध से पहला वास्ता करीब 17 साल की उम्र में एक मामूली झगड़े से हुआ था. कॉलेज की रंजिश और पिता की मौत के बाद हालात कुछ ऐसे बने कि गोगी अपराध के दलदल में धंसता ही चला गया. 2013 में गैंगस्टर नीतू डबोदिया के एनकाउंटर और 2015 में नीरज बवाना की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली-एनसीआर के अपराध जगत में जो खालीपन आया, उसे गोगी और टिल्लू दोनों ने अपने सिंडिकेट से भरना शुरू कर दिया था.
  2. गैंगस्‍टर गोगी ने कुलदीप उर्फ फज्जा और रोहित मोई जैसे शार्पशूटर्स को अपने गैंग से जोड़कर एक खौफनाक नेटवर्क तैयार किया. उसने हरियाणा के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी के साथ हाथ मिलाया. दूसरी तरफ टिल्लू ताजपुरिया ने नीरज बवाना, नवीन बाली, सुनील राठी और बम्बीहा सिंडिकेट के साथ थाम लिया. दोनों तरफ से जबरन वसूली, जमीन पर कब्जे और सुपारी किलिंग की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था.
  3. 2015 के बाद दोनों गैंग्‍स ने अपने गुर्गों को साफ कह दिया था कि जो सामने दिखे, उसे ढेर कर दो. यानी अब दोनों ही गैंग्‍स एक दूसरे को बर्दाश्‍त करने के लिए तैयार नहीं थे. इसी कड़ी में, गोगी गैंग ने टिल्लू के करीबी दीपक उर्फ राजू की हत्‍या कर दी. इसके जवाब में टिल्लू गैंग ने गोगी के करीबी साथी अरुण उर्फ कमांडो की हत्या कर दी. इसके बाद निरंजन मास्टर, सुमित और देवेंद्र प्रधान जैसे कई नाम इस रंजिश की भेंट चढ़ गए.
  4. इन हत्‍याकांड के बाद पुलिस ने गोगी को अरेस्‍ट कर सलाखों के पीछे भेज दिया. लेकिन 2016 में जब हरियाणा पुलिस उसे बहादुरगढ़ से पेशी पर ले जा रही थी, तब उसके साथियों ने पुलिसकर्मियों पर मिर्च पाउडर झोंककर उसे छुड़ा लिया था. अपनी फरारी के दौरान गोगी पर हत्या, रंगदारी और डकैती के दर्जनों मामले दर्ज हुए. उस पर दिल्ली व हरियाणा पुलिस की ओर से लाखों का इनाम घोषित किया गया.
  5. मार्च 2020 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सीक्रेट ऑपरेशन में गुरुग्राम के एक फ्लैट से गोगी, कुलदीप फज्जा और रोहित मोई को हथियारों के जखीरे के साथ दबोच लिया. गिरफ्तारी से ठीक पहले गोगी ने एनकाउंटर के डर से सोशल मीडिया पर सरेंडर की घोषणा का वीडियो भी जारी किया था. उस पर मकोका लगाया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया. टिल्लू ताजपुरिया पहले से ही सलाखों के पीछे था. दोनों जेल के अंदर से रंगदारी और गैंगवार की वारदातों को अंजाम देते रहे.

रोहिणी कोर्ट शूटआउट में हुआ गोगी का अंत
24 सितंबर 2021 की दोपहर दिल्ली की रोहिणी अदालत गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी. गोगी को कोर्ट रूम नंबर 207 में जज के सामने पेशी के लिए लाया गया था. टिल्लू ताजपुरिया ने जेल के भीतर बैठकर गोगी के खात्मे की पूरी साजिश तैयार की थी. वकीलों की ड्रेस में दो शार्प शूटर राहुल और जयदीप कोर्ट रूम के अंदर पहले से मौजूद थे. जैसे ही गोगी कठघरे के पास पहुंचा, दोनों ने पिस्टल निकाली और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. सबकुछ इतना जल्‍दी हुआ कि गोगी को संभलने तक का मौका भी नहीं मिला. स्पेशल सेल की जवाबी कार्रवाई में दोनों शार्पशूटर्स को वहीं ढेर कर दिया गया. इसके बाद, गोगी को अस्‍पताल पहुंचाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

डेढ़ साल बाद गोगी की हत्‍या का तिहाड़ में बदला
गोगी की हत्या के बाद गैंग की कमान बाहर और जेल के अंदर मौजूद उसके साथियों ने संभाल ली. बदले की आग में जल रहे गोगी गैंग ने जेल के अंदर टिल्‍लू ताजपुरिया की हत्‍या की साजिश रच डाली. 2 मई 2023 की सुबह तिहाड़ जेल के हाई-सिक्योरिटी वार्ड में बंद गोगी गैंग के दीपक तीतर, योगेश टुंडा, राजेश और रियाज खान ने लोहे की ग्रिल से नुकीले सुए और धारदार हथियार बनाए. उन्होंने सुरक्षा बैरकों को पार कर टिल्लू ताजपुरिया पर जानलेवा हमला बोल दिया. चारों ने टिल्‍लू पर 100 से भी ज्‍यादा वार किए. इस हमले में ताजपुरिया की मौके पर ही मौत हो गई. लगभग 100 वार झेलने के बाद लहूलुहान टिल्लू की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई.

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गोगी और टिल्‍लू से किस तरह जुड़ी है गायक-यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्‍या?
गोगी और टिल्लू की मौत के बाद भी यह दुश्मनी पूरी तरह खत्म नहीं हुई. दोनों गिरोहों के बचे हुए गुर्गे देश और विदेश से नेटवर्क चलाते हुए एक-दूसरे को निशाना बनाते रहे. इसी कड़ी में अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश के शामली में हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वजह बनी उसका वायरल गाना ‘भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’. इस गाने को गोगी गैंग ने रोहिणी कोर्ट में हुए शूटआउट का मजाक और टिल्लू गैंग के समर्थन के तौर पर देखा गया था. बाद में पुलिस मुठभेड़ में शूटआउट को अंजाम देने वाले शूटर्स को भी एनकाउंटर में मार गिराया था.

टिल्‍लू गैंग से दुश्‍मनी में गोगी गैंग ने किन किन लोगों को अपना निशाना बनाया?
गोगी और टिल्‍लू की दुश्‍मनी में करीब 25 से ज्‍यादा लोगों की जान गई. इसमें 2017 का हर्षिता दहिया हत्‍याकांड भी शामिल है. पानीपत में हरियाणवी लोक गायिका हर्षिता दहिया की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्‍याकांड में गोगी का नाम सामने आया था. 2018 में हुए एक शूटआउट में गोगी गैंग ने पीतमपुरा में टिल्लू के साथी रवि भारद्वाज को 25 गोलियां मारी थीं. वहीं 2019 में नरेला में स्थानीय नेता वीरेंद्र मान उर्फ कालू पर 26 गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी. 2018 में ही, बुराड़ी के संतनगर इलाके में गोगी गैंग ने टिल्लू के गुर्गों की गाड़ी पर 50 राउंड फायर किए थे. इस गोलीबारी में गैंग के गुर्गों सहित कुछ निर्दोष राहगीर भी हताहत हुए थे.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…

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