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‘मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं’: 36 दोषियों को फांसी सुनाने वाले यूपी के जज ने लिखा- डरने से अच्छा इस्तीफा दे दूं – Muzaffarnagar News


वरुण कुमार शर्मा | मुजफ्फरनगर4 मिनट पहले

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‘मैं मरना पंसद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नही। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं। तब तक सर्विस करूंगा वरना इस्तीफा दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।

मुझे माता-पिता ने शुरू से सिखाया है कि भगवान से डरो, किसी और से नहीं। अगर मैं किसी और से डरूंगा तो जनता का भरोसा कोर्ट से उठ जाएगा। मैं माफियाओं से डरने लगूंगा तो इस पवित्र न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना ही ठीक रहेगा।’

यह टिप्पणी सोमवार को मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में लिखी। कोर्ट ने नदीम पर 1 लाख जुर्माना भी लगाया।

रवि कुमार दिवाकर वही जज हैं, जिन्होंने अपनी 17 साल की न्यायिक सेवा में 36 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। सिर्फ मुजफ्फरनगर में उन्होंने 5 महीने में 23 दोषियों को मृत्युदंड दिया है। पिछले महीने जिला जज ने उनकी कोर्ट से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर दूसरी अदालतों में ट्रांसफर कर दिया था।

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फैसले में लिखीं जज रवि कुमार दिवाकर की बड़ी टिप्पणियां-

1. मुजफ्फरनगर में गैंगस्टर और माफियाओं का आतंक था जज ने लिखा- मुजफ्फरनगर में भरी अदालत में विक्की त्यागी की हत्या कर दी गई थी। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं था। एक समय शौकीन गैंग का आतंक हुआ करता था। हाल ही में इसी कोर्ट ने शौकीन के भाई शाहनवाज को फांसी की सजा दी गई है।

2. ज्ञानवापी मामले के बाद परिवार को भी धमकियां मिलीं जज ने फैसले में कहा- वाराणसी के ज्ञानवापी मामले के बाद मुझे और परिवारवालों को कई बार जान से मारने की धमकी मिली। अंततरराष्ट्रीय स्तर से भी धमकियां दी गईं। एक आरोपी अदनान खान ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर धमकी दी थी कि काफिर का खून तुम्हारे लिए हलाल है, जो तुम्हारे दीन के खिलाफ लड़ रहे हैं। मेरी फोटो लगाकर आंखों के ऊपर लाल रंग से काफिर लिखा था।

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3. इस वक्त बोलना ठीक नहीं, पद की भी मर्यादा होती है जज ने लिखा- इस वक्त मैं कुछ व्यवहार से बहुत दुखी हूं। कोई व्यक्ति दुनिया को बेवकूफ बना सकता है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को नहीं। ऐसे बर्ताव की वजह माफियाओं, गैंगस्टरों और अपराधियों को बचाना है। ऐसा क्यों हुआ, मैं यह भी जानता हूं। लेकिन, इस वक्त बोलना ठीक नहीं होगा, क्योंकि पद की भी मर्यादा होती है।

4. गैंगस्टर ने मैसेज भेजा- अभी सिर्फ मुकदमे हटवाए, नहीं माने तो ट्रांसफर करवा देगें जज ने यह भी लिखा कि मुझे पश्चिम के एक गैंगस्टर ने मैसेज भेजा था कि अभी तो सिर्फ मुकदमों को ही हटवाया गया है। अगर हमारे पीछे पड़े तो कोर्ट भी चेंज करवा देंगे। जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देगें, क्योंकि हमारी पहुंच ऊपर तक है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह एक गंभीर संकट होता है, जब जज दबाव या प्रभाव में न्याय करने में असमर्थ हो जाते हैं।

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने शहजादी की हत्या करने वाले उसके पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई है।

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने शहजादी की हत्या करने वाले उसके पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई है।

अब शाहपुर शहजादी हत्याकांड के बारे में विस्तार से समझ लीजिए-

  • 23 जुलाई 2018 की रात लगभग 8:30 बजे नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की। उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली में शहजादी की मौत हो गई।
  • शहजादी के माता-पिता और भाई कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन 24 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया शहजादी का आखिरी बयान निर्णायक रहा। अपने बयान में शहजादी ने कहा था कि उसके पति नदीम ने ही उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी।
  • अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार (7 सितंबर) को नदीम को फांसी की सजा सुनाई। शहजादी ने अपने बयान में दहेज की मांग या प्रताड़ना का कोई जिक्र नहीं किया था, इसलिए नदीम को दहेज हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया। मामले में आरोपी ननद सोनी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं सास शमशीदा की मौत हो चुकी है।
आरोपी नदीम को पुलिस सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।

आरोपी नदीम को पुलिस सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।

29 नवंबर 2025 को संभाला था कार्यभार न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार संभाला था। 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली में तैनात रहे।

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“बेटी दोषी है तो उसे सजा मिले, लेकिन मेरे पति निर्दोष हैं। जो वकील है, उसी ने प्रियंका से सब कुछ कराया। हम बस यही चाहते हैं कि हमारे पति को छुड़वा दीजिए।” ये शब्द हैं प्रियंका चौधरी की मां सुभावती चौधरी के। उनकी बेटी पर ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप हैं। बस्ती में तैनात थानेदार सूर्य प्रकाश सिंह ने इसी मामले से परेशान होकर 29 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। पढ़ें पूरी खबर…

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