त्योहारी सीजन से ठीक पहले नया स्मार्टफोन खरीदने की तैयारी कर रहे उपभोक्ताओं के लिए यह खबर जेब पर भारी पड़ने वाली है। काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में भारत में स्मार्टफोन की औसत खुदरा कीमतें 21 फीसदी बढ़ चुकी हैं।यह दुनिया के तमाम बड़े बाजारों में दर्ज सबसे तेज उछाल है।
वैश्विक स्तर पर औसत कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। विकसित देशों में यह असर बेहद सीमित रहा, अमेरिका में कीमतें केवल 5 फीसदी, यूरोप में 7 फीसदी और चीन में 10 फीसदी बढ़ीं। इसके विपरीत, एशिया-प्रशांत में 19 फीसदी और भारत में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
15,000 रुपये से कम वाले फोन के कुल पार्ट्स की लागत में अकेले मेमोरी की हिस्सेदारी 45 फीसदी से ऊपर निकल चुकी है। स्मार्टफोन की बिक्री में 45% की गिरावट आई है।
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
भारतीय बाजार का 51 फीसदी से अधिक हिस्सा 20,000 रुपये से कम कीमत वाले लो और मिड-रेंज फोनों का है। पश्चिमी देशों में प्रीमियम फोन अधिक बिकते हैं, जहां टेलीकॉम ऑपरेटरों के लॉन्ग-टर्म प्लान में फोन बंडल होते हैं और बढ़ी हुई लागत ईएमआई में बंट जाती है। प्रीमियम फोन पर कंपनियों के पास मार्जिन होता है, जिससे वे अतिरिक्त लागत खुद वहन कर लेती हैं। लेकिन बजट फोन में मार्जिन न के बराबर होता है, इसलिए कंपनियों ने उत्पादन लागत का पूरा बोझ सीधे भारतीय ग्राहकों की जेब पर डाल दिया।
कीमतें बढ़ने की असली वजह
इस मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य कारण स्मार्टफोन में लगने वाली मेमोरी की बढ़ती लागत है। सितंबर 2025 के बाद से डीआरएएम और एनएएनडी चिप की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ चुकी हैं। दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग के कारण सेमीकंडक्टर निर्माता अपनी उत्पादन क्षमता एआई सर्वरों में लगने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी में लगा रहे हैं। इससे स्मार्टफोन में लगने वाली पारंपरिक मेमोरी की आपूर्ति घट गई।
बजट फोन पर संकट
- बजट फोन पर लागत बढ़ने का सीधा असर बिक्री पर पड़ा है। जून तिमाही में 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में 45 फीसदी की भारी गिरावट आई है।
- कंपनियों ने कीमतें थामने के लिए कई फोनों के मेमोरी कॉन्फ़िगरेशन तक घटा दिए हैं। इसके अलावा, 2026 में लॉन्च हुए नए मॉडल्स पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं।
- काउंटरपॉइंट रिसर्च के भारतीय उपभोक्ता सर्वे के अनुसार, 46 फीसदी खरीदार बजट बढ़ाकर फोन ले रहे हैं, जबकि 25 फीसदी ने खरीदारी टाल दी है और 29 फीसदी लोग रीफर्बिश्ड फोन की तरफ मुड़ रहे हैं।



