Homeटेक्नोलॉजीआकाश के लिए ससुर ने राजनीति छोड़ी: कहा- बहनजी के लिए...

आकाश के लिए ससुर ने राजनीति छोड़ी: कहा- बहनजी के लिए जान दे सकता हूं, मायावती की शर्त थी- राजनीति छोड़ो, तभी भतीजे को लूंगी – Uttar Pradesh News


बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्होंने गुरुवार सुबह ‘X’ पर लिखा- मैं इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं। मेरा जीवन बहनजी का ऋणी है। ऐसे में संन्यास तो बहुत छोटी चीज

.

दरअसल, मायावती ने बुधवार को भतीजे आकाश की बसपा में वापसी के लिए एक शर्त रखी थी। दोपहर 2:46 बजे ‘X लिखा था- पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ अगर अपने दामाद आकाश का भला चाहते हैं तो उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। तभी आकाश को फ्री हैंड मिलेगा। आकाश अपने ससुर के स्वार्थी व्यवहार का खामियाजा भुगत रहे हैं।

मायावती के इस बयान के 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए दामाद के लिए राजनीति छोड़ने का ऐलान किया। इसके बाद माना जा रहा है कि मायावती जल्द ही आकाश को पार्टी में उनकी पुरानी जिम्मेदारियां सौंप सकती हैं।

मायावती ने आकाश को 7 दिन पहले पद से हटाया था। उन्होंने कहा था- आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। फिलहाल, आकाश पार्टी में एक आम समर्थक की हैसियत से जुड़े हैं।

2 अगस्त को पार्टी से निकाला था, कहा था- बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे

  • मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को इसी साल 2 अगस्त को पार्टी से निकाल दिया था। कहा था- बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे। अब इन्हें कभी पार्टी में वापस नहीं लूंगी। डेढ़ साल में यह दूसरा मौका था, जब मायावती ने अशोक को पार्टी से निकाला था।
  • इससे पहले, साल 2025 में संगठन में गुटबाजी के आरोप में अशोक सिद्धार्थ और उनके करीबी नितिन सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया था। तब मायावती ने कहा था कि अशोक और नितिन पार्टी के खिलाफ साजिश रच रहे थे। हालांकि, 6 महीने बाद अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी हो गई थी। फरवरी 2026 में अशोक सिद्धार्थ को राष्ट्रीय पदाधिकारियों में नंबर एक की जगह दी गई थी।
ये तस्वीर 3 सितंबर की है। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की बैठक की थी।

ये तस्वीर 3 सितंबर की है। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की बैठक की थी।

आकाश की वापसी के लिए मायावती ने क्या शर्त रखी थी, पढ़िए

  • 9 सितंबर को बसपा कार्यालय से जारी लेटर में मायावती ने कहा था- यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के चुनाव बसपा के लिए महत्वपूर्ण हैं। पार्टी डॉ. आंबेडकर के ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनने के सपने को पूरा करने के लिए पूरे तन-मन-धन से जुटी है। बहुजन मूवमेंट और आरक्षण को लेकर खड़ी की जा रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने दलित समाज से अपील की है कि निजी स्वार्थ में ऐसा कोई काम न करें, जिससे मिशन को नुकसान हो।
  • उन्होंने कहा- पार्टी में भटके हुए लोगों को सुधारने का मौका दिया जा रहा है, लेकिन रुकावट बनने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो रही है। इसके लिए पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का उदाहरण दिया गया। मायावती ने साफ किया कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से ज्यादा अपनी निजी और पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को महत्व दिया। इसका सीधा खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ा है।
  • बसपा प्रमुख ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें। ऐसा होने पर ही आकाश आनंद स्वतंत्र होकर काम कर सकेंगे और तभी पार्टी उन्हें उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस देने के बारे में सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
26 मार्च 2023 को अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से आकाश आनंद की शादी हुई थी। इसमें मायावती भी शामिल हुईं थीं।

26 मार्च 2023 को अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से आकाश आनंद की शादी हुई थी। इसमें मायावती भी शामिल हुईं थीं।

कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?

मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ (फाइल फोटो)

मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ (फाइल फोटो)

  • अशोक सिद्धार्थ मूल रूप से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया और झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट का डिप्लोमा किया।
  • उन्हें उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली। उनकी पोस्टिंग कन्नौज में हुई थी, जो उस समय फर्रुखाबाद जिले का हिस्सा था। यहां वे आंखों की जांच और रिफ्रैक्शन से जुड़े काम करते थे।
  • सरकारी नौकरी के दौरान ही वे BAMCEF से जुड़े और संगठन के काम में सक्रिय हो गए। बाद में वे बसपा और मायावती के करीब आए।
  • मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मायावती के कहने पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर पूरी तरह बसपा के लिए काम शुरू किया। इसके बाद पार्टी में उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा।
  • 2009 में मायावती ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) भेजा। वे जनवरी 2009 से जनवरी 2015 तक विधान परिषद के सदस्य रहे। इसके बाद जुलाई 2016 में वे राज्यसभा पहुंचे और जुलाई 2022 तक सांसद रहे। पार्टी में उन्होंने कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं और अलग-अलग राज्यों के प्रभारी भी रहे।
  • पत्नी सुनीता सिद्धार्थ भी बसपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। वे 2007 से 2012 तक इस पद पर रहीं।
  • बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मार्च 2023 में मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुई। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ का मायावती परिवार से राजनीतिक संबंध पारिवारिक रिश्ते में भी बदल गया।

—————————————

ये खबर भी पढ़ें-

मायावती ने ‘अनुभवहीन’ ईशान को जिम्मेदारी क्यों सौंपी:क्या चुनाव में लॉन्च करेंगी, BSP का उत्तराधिकारी कौन होगा

comp 191 31788790460 1789007974

बसपा से आकाश आनंद के बाहर किए जाने और ईशान आनंद की एंट्री ने पार्टी के भविष्य को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले आकाश को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का मॉडल पेश किया। फिर अचानक अपरिपक्व बताकर पर कतर दिए। साथ ही सबको चौंकाते हुए उन्होंने अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर नई बहस छेड़ दी है। पढ़ें पूरी खबर



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments