वैश्विक स्तर पर बदल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और आर्थिक दबावों के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुए ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026’ में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और उभरती रणनीतिक क्षमताओं का असर दिखाई दिया।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले आयोजित इस फोरम में उद्योग जगत के दिग्गजों ने साफ किया कि 1 ट्रिलियन (1 लाख करोड़) डॉलर के अंतर-समूह व्यापार और 7.8% की प्रभावशाली जीडीपी विकास दर के साथ भारत अब वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित हो चुका है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस आयोजन में घरेलू वृद्धि दर, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार को ब्रिक्स देशों और पूरे ग्लोबल साउथ का मार्गदर्शन करने वाला मुख्य आधार बताया गया है।
ब्रिक्स के विस्तार से भारत और ग्लोबल साउथ को क्या हासिल होगा?
11-सदस्यीय ढांचे और विस्तारित ‘ब्रिक्स+’ व्यवस्था के तहत यह मंच अब दुनिया की विशाल आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व कर रहा है। एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स वेलफेयर (इंडिया) के उपाध्यक्ष अनुपम वोहरा के अनुसार, इस सम्मेलन में लगभग 17 से 18 राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स+ ढांचा अब लगभग 18 से 20 देशों और ग्लोबल साउथ की करीब 60% आबादी व प्रतिनिधित्व को समेटे हुए है। दुनिया भर में जारी वित्तीय दबावों और वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। यह नया ढांचा पारंपरिक व्यवस्था के समानांतर एक मजबूत वैकल्पिक आर्थिक मॉडल पेश कर रहा है।



