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Mount Abu Famous Tree: प्रदेश में प्राकृतिक और वन्यजीव के लिए माउंट आबू का जंगल हमेशा से अनोखा था है. अब माउंट आबू में देश का दूसरा सबसे बड़ा सफेदा का पेड़ मिला है. इस पेड़ की उम्र करीब 150 वर्ष मानी जा रही है. इस पेड़ के बारे में एक वन विशेषज्ञ और वन विभाग के अधिकारी ने रिसर्च की है.
माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी एरिया में करीब 150 साल पुराना सफेदा का एक विशाल पेड़ मिला है. वन विशेषज्ञ और पूर्व वन अधिकारी डॉ. सतीशकुमार शर्मा ने इस पेड़ पर रिसर्च की तो इसकी वास्तविक उम्र 150 वर्ष से अधिक सामने आई. वन विभाग के उप वन संरक्षक अनिल गुप्ता से सूचना मिलने के बाद डॉ. शर्मा मौके पर पहुंचे और पेड़ के आकार व उम्र से जुड़े आंकड़े जुटाए.
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह सफेदा का पेड़ करीब 20 मीटर ऊंचा हैं. इसकी उम्र करीब 150 वर्ष मानी जा रही है. पेड़ के तने की छाती की ऊंचाई पर परिधि 4.55 मीटर दर्ज की गई है. राष्ट्रीय रिकॉर्ड में उपलब्ध डेटा से इसका आंकलन करने पर सामने आया कि मोटाई के मामले में यह देश का दूसरा सबसे मोटा सफेदा पेड़ है. खास बात यह है कि देश के सबसे मोटे सफेदा पेड़ से इसकी परिधि में सिर्फ 15 सेंटीमीटर का अंतर है.
माउंट आबू के जंगल में कई दुर्लभ और अनोखी जड़ी बूटियां पाई जाती है. यहां अंग्रेजों के समय में कई स्थान पेड़ नीलगिरी, बांस समेत कई पौधे लगाए गए थे. जो आज विशाल पेड़ का आकार ले चुके हैं. शर्मा ने बताया कि देश का सबसे मोटा सफेदा वृक्ष आंध्र प्रदेश के अनामैया जिले की मदनपल्ली रेंज के हॉर्सली हिल में मौजूद है. रिकॉर्ड के मुताबिक इसे वर्ष 1859 में तत्कालीन चित्तूर जिले के कलेक्टर डब्ल्यू. एच. हॉर्सले ने लगाया था. इसी के नाम पर इस स्थान का नाम हॉर्सली हिल पड़ा.
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वर्ष 1995 में केंद्र सरकार ने इस पेड़ को देश का सबसे बड़ा सफेदा वृक्ष घोषित कर महावृक्ष पुरस्कार भी दिया था. इस पेड़ के बाद दूसरा सबसे बड़ा सफेदा का पेड़ आबू में मिला है. ये पेड़ काफी खास हैं. डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके तने पर करीब तीन मीटर तक कोई शाखा नहीं है. इसके बाद तना कई बड़ी शाखाओं में बंट जाता है. करीब डेढ़ सदी से खड़ा यह विशाल पेड़ माउंट आबू की अनोखी जलवायु और यहां मौजूद पुराने पेड़ों की खासियत को दिखाता है.
डॉ. शर्मा ने इस पेड़ के माप और अन्य जानकारियों का राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज महावृक्ष रिकॉर्ड से मिलान किया. यह पेड़ अब केवल राजस्थान का ही नहीं देश का दूसरा सबसे बड़ा सफेदा के पेड़ के रूप में पहचाना जाएगा. इतने पुराने पेड़ का आज भी सुरक्षित और मजबूत स्थिति में खड़ा होना इसे और खास बनाता है. इस खोज के बाद वन विभाग अब पेड़ के संरक्षण और पहचान की तैयारी कर रहा है. जिससे यहां घूमने आने वाले पर्यटकों को भी इसके बारे में पता लग सके.



