नई दिल्ली2 घंटे पहले
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फाइल फोटो
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED देशभर में अपनी जांच व्यवस्था को और बड़ा करने जा रहा है। 1 जनवरी 2027 से ED के पास 50 PMLA जोन और 5 अलग FEMA जोन होंगे। साथ ही एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की जांच को मौजूदा 4-5 साल से घटाकर करीब डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इस रीस्ट्रक्चरिंग से डायरेक्टरेट की मंजूर पोस्ट 2,029 से बढ़कर 3256 हो जाएंगी। फंक्शनल यूनिट्स की संख्या 131 से बढ़कर 241 हो जाएगी। वहीं, FEMA जोन दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में होंगे।
इसके अलावा प्रोजेक्ट प्रवर्तन भवन’ के तहत 31 मार्च 2029 तक ED के कामकाज वाले सभी 39 शहरों में अपने कार्यालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
ये सभी फैसले ED के 14-15 सितंबर को बेंगलुरु में हुए 36वें जोनल अधिकारियों के तिमाही सम्मेलन के दौरान लिए गए।
इन जगहों से जानकारी जुटाएगा ED
ED ने जांच के लिए NATGRID, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम, कंपनियों और इमिग्रेशन से जुड़े डेटाबेस, डिजिटल करेंसी के लेनदेन और FIU-इंडिया की जानकारी के इस्तेमाल की समीक्षा की है।
साइबर अपराधों की जांच के लिए एडवांस फोरेंसिक टूल और मौके पर सबूत जुटाने वाली किट बढ़ाई जाएंगी।
नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं में विशेषज्ञों की मदद भी बढ़ाई जाएगी।
गौरतलब है कि ED की मौजूदा आधिकारिक संरचना में 5 रीजन, 27 जोन और 18 सब-जोन हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी ED से जुड़ी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने भी मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। कोर्ट ने ED से पूछा है कि उसकी एडजुडीकेटिंग अथॉरिटी के सामने कितने मामले लंबित हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर बहुत बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और कानून के मुताबिक इन्हें 180 दिन के अंदर निपटाना है, तो क्या हर मामले में ठीक से सोच-विचार करके फैसला हो पाएगा?




